BRICS Summit 2026: 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत पहुंचे व्लादिमीर पुतिन, पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक आज

नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन देर रात एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंचे हैं। राष्ट्रपति पुतिन यहां आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) में सहभागिता करेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक में भाग लेंगे। पुतिन के आगमन से पूर्व रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव भी भारत पहुंच चुके हैं। क्रेमलिन के वरिष्ठ अधिकारी यूरी उशाकोव के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन आज शुक्रवार को वार्षिक ब्रिक्स व्यापार मंच (BRICS Business Forum) के पूर्ण सत्र को संबोधित करेंगे, जो पारंपरिक रूप से मुख्य शिखर सम्मेलन से पूर्व उद्योग एवं व्यापार प्रतिनिधियों के मध्य संवाद का प्रमुख मंच है।
🇮🇳 दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर हुआ गर्मजोशी से स्वागत: विशेष रणनीतिक साझेदारी पर जोर
स्वागत शिष्टाचार और राजनयिक संबंध:
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पालम हवाई अड्डे पर अगवानी: नई दिल्ली स्थित वायुसेना स्टेशन पालम पर केंद्रीय राज्य मंत्री और सांसद कीर्तिवर्धन सिंह ने रूसी राष्ट्रपति की औपचारिक अगवानी की।
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विदेश मंत्रालय का बयान: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्वागत संदेश जारी करते हुए रेखांकित किया कि भारत और रूस के संबंध ऐतिहासिक और बहुआयामी हैं, जो समय की कसौटी पर खरी उतरी ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ (Special and Privileged Strategic Partnership) पर आधारित हैं।
🤝 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक: INNOPROM India प्रदर्शनी का संयुक्त दौरा
उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता और औद्योगिक सहयोग:
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पीएम मोदी से मुलाकात: राष्ट्रपति पुतिन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे, जिसमें सामरिक, ऊर्जा और व्यापारिक प्राथमिकताओं पर विमर्श होगा।
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इनोप्रोम प्रदर्शनी का अवलोकन: दोनों शीर्ष नेता भारत और रूस के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालयों द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित औद्योगिक तकनीकी प्रदर्शनी ‘इनोप्रोम इंडिया’ (INNOPROM India) का दौरा करेंगे।
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मुख्य शिखर कार्यक्रम: ब्रिक्स नेताओं का मुख्य सम्मेलन 12 सितंबर से प्रारंभ होगा, जिसकी अध्यक्षता भारत कर रहा है।
🌐 पुतिन के भारत दौरे का विस्तृत कार्यक्रम: 11 से 13 सितंबर तक का शेड्यूल
तीन दिवसीय राजकीय यात्रा का घटनाक्रम:
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11 सितंबर: ब्रिक्स बिजनेस फोरम के पूर्ण सत्र का संबोधन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता और इनोप्रोम इंडिया प्रदर्शनी का संयुक्त अवलोकन।
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12 सितंबर: ब्रिक्स नेताओं की पूर्ण बैठक, जिसमें भारतीय अध्यक्षता के प्रमुख संकल्पों, वैश्विक सुरक्षा, वित्तीय संरचना और सांस्कृतिक सहयोग पर गंभीर मंथन होगा।
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13 सितंबर: ‘विस्तारित ब्रिक्स’ (Expanded BRICS) सत्र का आयोजन, जिसमें सदस्य राष्ट्रों, साझेदार देशों तथा आमंत्रित अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख शामिल होंगे और शिखर सम्मेलन के संयुक्त घोषणापत्र (Final Document) को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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वैश्विक नेताओं से संवाद: पुतिन सम्मेलन से इतर दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी के साथ अलग से बैठकें करेंगे।
🇨🇳 चीनी राष्ट्रपति शी जिनफिंग भी होंगे शामिल: 7 साल बाद पहला भारत दौरा
क्षेत्रीय कूटनीति और सीमावर्ती घटनाक्रम:
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शी जिनफिंग की यात्रा: चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग भी ब्रिक्स सम्मेलन में शिरकत करने भारत आ रहे हैं, जो पिछले 7 वर्षों में उनका पहला भारत दौरा है।
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द्विपक्षीय वार्ता का कार्यक्रम: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को शी जिनफिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। यह बातचीत ऐसे दौर में हो रही है जब दोनों देश व्यापारिक संबंधों और सीमा सुरक्षा को लेकर निरंतर कूटनीतिक संवाद में हैं।
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कूटनीतिक पृष्ठभूमि: जिनफिंग का यह दौरा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच बीजिंग में हुई विशेष प्रतिनिधि स्तर की चर्चाओं के उपरांत हो रहा है, विशेषकर तब जब अरुणाचल प्रदेश सेक्टर में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की चुनौतियां चर्चा में रही हैं।
🌍 बहुपक्षीय कूटनीति का केंद्र बनी दिल्ली: कई राष्ट्राध्यक्षों के साथ पीएम मोदी की बैठकें
वैश्विक संवाद की समय सारिणी:
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दोपहर 3:30 बजे: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय विमर्श।
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शाम 6:15 बजे: प्रधानमंत्री मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के मध्य रणनीतिक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तृत वार्ता।
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अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर जोर: भारत की अध्यक्षता में यह सम्मेलन बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को नई दिशा देने पर केंद्रित रहेगा।





