Global Crude Oil Crisis: होर्मुज संकट के बीच सऊदी की प्रमुख पाइपलाइन पर हमला, हूतियों ने मायून द्वीप पर किया कब्जा

रियाद (सऊदी अरब): सऊदी अरब ने अपनी प्रमुख ईस्ट-वेस्ट (East-West) कच्चे तेल की पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमलों के उपरांत एहतियात के तौर पर इसका परिचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।
यह रणनीतिक पाइपलाइन देश के पूर्वी तेल उत्पादक क्षेत्रों से कच्चा तेल लाल सागर स्थित यानबू (Yanbu) बंदरगाह तक पहुंचाने का मुख्य माध्यम है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसके जरिए सऊदी अरब रणनीतिक जलडमरूमध्य होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के विवादित मार्ग से बचे बिना ही वैश्विक बाजारों तक तेल की निर्बाध आपूर्ति करता है। गुरुवार को कई सशस्त्र ड्रोनों ने इस पाइपलाइन नेटवर्क को निशाना बनाया, जिसके बाद सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने सुरक्षा समीक्षा और तकनीकी निरीक्षण के मद्देनजर सप्लाई रोकने की आधिकारिक घोषणा की।
🛰️ पंपिंग स्टेशनों को भारी नुकसान: इराक की सीमा से ड्रोन आने का दावा
हमले की गंभीरता और कूटनीतिक रुख:
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सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा नुकसान: अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, रास्ते में स्थित कई पंपिंग स्टेशनों को गंभीर क्षति पहुंची है; उपग्रह चित्रों में एक स्टेशन पर भीषण आग और दूसरे स्थान से घना काला धुआं उठता दर्ज किया गया है।
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इराकी क्षेत्र से हमले का आरोप: सऊदी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि हमले में प्रयुक्त ड्रोन इराकी सीमा की ओर से दागे गए थे, जिसमें कुछ कर्मचारी घायल हुए हैं और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।
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सऊदी अरब का संयम: इराकी प्रधानमंत्री के औपचारिक अनुरोध पर सऊदी अरब ने फिलहाल त्वरित जवाबी सैन्य कार्रवाई टाल दी है, ताकि बगदाद सरकार अपनी जमीन से हो रहे हमलों पर प्रभावी नियंत्रण कर सके। इराक ने भी घटना की निंदा करते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
🌊 होर्मुज संकट के बीच पाइपलाइन की उपयोगिता: 50 लाख बैरल प्रतिदिन का था लक्ष्य
ऊर्जा आपूर्ति पर संकट और उत्पादन में गिरावट:
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वैकल्पिक लाइफलाइन: ईरानी गतिविधियों और तनाव के चलते होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप होने के बाद यह पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए सबसे सुरक्षित मार्ग बन चुकी थी।
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सप्लाई का दबाव: जून माह की शुरुआत तक इस पाइपलाइन के माध्यम से यानबू पोर्ट तक तेल भेजने की मात्रा बढ़कर 50 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी।
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उत्पादन का ऐतिहासिक निचला स्तर: इसी बीच सऊदी अरब ने ओपेक (OPEC) को सूचित किया है कि उसका कच्चा तेल उत्पादन पिछले महीने वर्ष 1990 के बाद के सबसे निचले पायदान पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक आपूर्ति तंत्र और संवेदनशील हो गया है।
🏝️ हूती विद्रोहियों ने मायून द्वीप पर किया कब्जा: बाब-अल-मंदेब में सप्लाई रूट पर नया खतरा
लाल सागर में भू-राजनीतिक उथल-पुथल:
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सामरिक द्वीप पर नियंत्रण: यमन के हूती लड़ाकों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मायून द्वीप (पेरिम द्वीप) पर अपना कब्जा स्थापित कर लिया है।
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समुद्री मार्ग की घेराबंदी: यह ज्वालामुखीय द्वीप बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के केंद्र में स्थित है, जहां से विश्व का प्रमुख समुद्री व्यापार गुजरता है। इससे पूर्व हूतियों ने 80 किमी दूर स्थित तटीय मोचा शहर को भी अपने नियंत्रण में लिया था।
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शिपिंग ट्रैफिक में 60% गिरावट: हूती हमलों के चलते बाब-अल-मंदेब मार्ग से मालवाहक जहाजों की आवाजाही पहले ही 60 प्रतिशत तक घट चुकी थी; अब इस द्वीप पर कब्जे से सऊदी अरब और खाड़ी देशों को अफ्रीका का चक्कर लगाकर लंबा समुद्री मार्ग अपनाने पर मजबूर होना पड़ सकता है।
📈 कच्चा तेल 100 डॉलर के पार: कूटनीतिक वार्ताओं में ईरान का बढ़ा दबाव
बाजार पर असर और कूटनीतिक गतिविधियां:
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कीमतों में उछाल: बुनियादी ढांचे पर हमलों और प्रमुख समुद्री गलियारों के बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें पुनः $100 प्रति बैरल का मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर गईं।
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ईरान का आक्रामक रुख: ईरान ने हूतियों के कदमों का खुला समर्थन करते हुए सऊदी अरब से हूती-नियंत्रित क्षेत्रों की आर्थिक नाकाबंदी हटाने की मांग की है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा है कि वाशिंगटन के साथ किसी भी समग्र समझौते में यमन को शामिल करना अनिवार्य होगा।
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तनाव घटाने का प्रयास: सऊदी अरब ने अपनी संप्रभुता और रक्षा के अधिकार को सुरक्षित रखते हुए वार्ता की तत्परता दोहराई है। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच तनाव कम करने और क्षेत्रीय सुरक्षा बहाली को लेकर कूटनीतिक संवाद की सूचना सामने आई है।





