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मध्यप्रदेश

Ujjain Politics: उज्जैन महापौर मुकेश टटवाल को बीजेपी रथ से उतारा; बाबा साहेब प्रतिमा के पास बैठ जताया विरोध

उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के रोड शो के बाद स्थानीय राजनीति में जबरदस्त भूचाल आ गया है। रोड शो के दौरान रथ पर सवार उज्जैन के प्रथम नागरिक महापौर मुकेश टटवाल को नीचे उतार दिया गया, जिसे महापौर ने अपना सार्वजनिक अपमान बताया है। इस घटना से वे बेहद व्यथित और नाराज हैं। महापौर की खुलकर सामने आई नाराजगी के बाद जहाँ कांग्रेस ने इस मौके का राजनीतिक लाभ उठाना शुरू कर दिया है, वहीं भाजपा के शीर्ष नेता और मंत्री डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं।

🌹 “बाबा साहब से मांगेंगे अपमान सहने की शक्ति”: 20 सितंबर को टॉवर चौक पर बैठेंगे महापौर टटवाल

रोड शो में हुए अपमान से आहत होकर महापौर मुकेश टटवाल ने 20 सितंबर को सुबह 11 बजे उज्जैन के टॉवर चौक पर स्थित बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष 3 घंटे तक बैठने का फैसला किया है।

महापौर ने कहा, “मैं बाबा साहब से इस अपमान को सहन करने की शक्ति मांगूंगा। जनता ने मुझे जो जिम्मेदारी दी है, उसे अपमान का घूंट पीकर भी पूरा करने की हिम्मत देने की प्रार्थना करूंगा।” महापौर के इस कदम के बाद उज्जैन में भाजपा का पिछले 25 वर्षों से चला आ रहा पुराना राजनीतिक व सामाजिक समीकरण दांव पर लग गया है।

✊ बैरवा समाज ने की बड़े आंदोलन की तैयारी: कांग्रेस भी महापौर के समर्थन में उतरी

महापौर की सार्वजनिक नाराजगी के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में हड़कंप मच गया है। महापौर बैरवा समाज से आते हैं और समाज के प्रतिनिधियों ने इस घटना को समाज के सम्मान से जोड़ते हुए कड़ा ऐतराज जताया है। उज्जैन शहर और पूरे जिले में बैरवा समाज का मजबूत वोट बैंक है।

सहानुभूति और मौके की नजाकत को भांपते हुए कांग्रेस भी खुलकर महापौर के समर्थन में आ गई है। बैरवा समाज के नेताओं ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर दिल्ली के जंतर-मंतर तक उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।

🤝 नाराज महापौर को मनाने पहुंचे दिग्गजों के अमले: प्रभारी मंत्री बोले— “टटवाल हमारे परिवार के सदस्य हैं”

घटना की गंभीरता को देखते हुए 18 सितंबर को उज्जैन के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, राज्यसभा सांसद संत बालयोगी उमेश नाथ महाराज और विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा सहित कई वरिष्ठ भाजपा पदाधिकारी महापौर से मिलने पहुंचे। दूसरी तरफ, तराना से कांग्रेस विधायक महेश परमार और नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष भी महापौर का ढांढस बंधाने पहुंचे।

प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने मामले को शांत करने का प्रयास करते हुए कहा, “महापौर हमारे परिवार का हिस्सा हैं, मित्र हैं और हमेशा बीजेपी के साथ हैं। मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष ने भी उनसे बात की है। यह एक सामान्य बात है, कभी-कभी मानवीय भूल हो जाती है।”

🏛️ उज्जैन में 25 वर्षों से लगातार बैरवा समाज से ही रहे हैं महापौर: सीएम मोहन यादव के क्षेत्र पर असर

पूरे विवाद का सबसे बड़ा राजनीतिक पहलू यह है कि उज्जैन नगर निगम में वर्ष 2000 के बाद से लगातार मदनलाल ललावत, सोनी मेहर, रामेश्वर अखंड, मीना जोनवाल और अब 2022 से मुकेश टटवाल—सभी बैरवा समाज से ही महापौर बनते आए हैं। शहरी क्षेत्र में बैरवा समाज के करीब 90,000 नागरिक और 65,000 मतदाता हैं।

उज्जैन जिले की सभी 7 विधानसभा सीटों पर इस समाज का गहरा प्रभाव है, खासकर उज्जैन दक्षिण सीट पर, जहाँ से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विधायक हैं। 2023 के चुनाव में सीएम मोहन यादव यहाँ से 12,941 वोटों से जीते थे। ऐसे में इस सामाजिक विवाद का सबसे संवेदनशील असर मुख्यमंत्री के अपने गृह क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।

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