Punjab Haryana High Court Order: 17 साल से पेंशन के लिए भटक रहे 80 साल के बुजुर्ग को न्याय; HC ने अधिकारियों-बैंक अफसरों की रोकी सैलरी

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पिछले 17 सालों से अपनी दिवंगत पत्नी की पेंशन के लिए सरकारी दफ्तरों और बैंकों के चक्कर काट रहे 80 वर्षीय बुजुर्ग जगदीश राज अरोड़ा को बड़ी राहत प्रदान की है। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए गुरदासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), जिला खजाना अधिकारी (DTO) और संबंधित बैंक अधिकारियों का वेतन (तनख्वाह) तत्काल प्रभाव से रोकने का कड़ा आदेश जारी किया है। अधिकारियों और बैंक प्रबंधन द्वारा एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालने की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को अपने जायज हक के लिए दर-दर भटकने पर मजबूर किया गया, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
🚫 अदालत की अनुमति के बिना नहीं निकाल सकेंगे वेतन: 2023 से लंबित याचिका पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख
हाईकोर्ट ने अपने सख्त निर्देशों में स्पष्ट किया है कि जब तक बुजुर्ग की पेंशन के समस्त बकाये का पूर्ण एवं प्रभावी तरीके से निपटारा नहीं कर दिया जाता, तब तक संबंधित विभागीय अधिकारी और बैंक अफसर अदालत की पूर्व अनुमति के बिना अपनी तनख्वाह नहीं निकाल सकेंगे।
याचिकाकर्ता जगदीश राज अरोड़ा ने वर्ष 2023 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए याचिका दायर की थी। उनकी पत्नी सुदर्शन कुमारी ब्लॉक प्राइमरी शिक्षा अधिकारी (BPEO) के पद से सेवानिवृत्त हुई थीं। उनकी मृत्यु के पश्चात लगातार प्रयासों के बावजूद पेंशन वितरण प्राधिकरण और बैंक प्रबंधन एक-दूसरे के पाले में गेंद डालते रहे, जिससे बकाया राशि का भुगतान अटका रहा।
🏢 खजाना अधिकारी और बैंक में टलता रहा मामला: हाईकोर्ट ने अधिकारियों की हीलाहवाली पर जताई नाराजगी
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के बकाया पेंशन प्राप्त करने के कानूनी अधिकार पर किसी भी पक्ष को कोई विवाद नहीं है।
सुनवाई के दौरान गुरदासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने हलफनामे में बताया कि पंजाब के अकाउंटेंट जनरल (AG) कार्यालय द्वारा 24 सितंबर 2012 को ही जिला खजाना अधिकारी को पत्र जारी कर दिया गया था, लेकिन बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) ने इसे धरातल पर लागू नहीं किया। दूसरी ओर, बैंक प्रबंधन का तर्क था कि जिला खजाना अधिकारी स्तर से कुछ आवश्यक औपचारिक कार्रवाई पूरी न होने के कारण राशि जारी नहीं हो सकी।
👴 ‘जिंदगी के आखिरी पड़ाव में हक के लिए भटकता रहा बुजुर्ग’: जस्टिस कुलदीप तिवारी ने अधिकारियों को लगाई फटकार
प्रशासनिक तंत्र और बैंक अधिकारियों के इस उपेक्षापूर्ण रवैये पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए जस्टिस कुलदीप तिवारी की एकलपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता अपनी जिंदगी के आखिरी पड़ाव में होने के बावजूद अपने जायज अधिकार को पाने के लिए लगातार भटकने को मजबूर रहा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक और बैंकिंग ढिलाई के कारण किसी वरिष्ठ नागरिक को इस तरह प्रताड़ित नहीं किया जा सकता, इसलिए जब तक बुजुर्ग को उनका पूरा बकाया नहीं मिल जाता, तब तक किसी भी दोषी अधिकारी को वेतन का भुगतान नहीं किया जाएगा।





