Ketan Agarwal Murder Case: पुणे में रूह कंपाने वाली साजिश, 5,053 पन्नों की चार्जशीट में ‘डेथ कैप मशरूम’ और ‘लोहागढ़ रेकी’ का खुलासा

महाराष्ट्र के पुणे में घटित बहुचर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में रोंगटे खड़े कर देने वाली जानकारियां सामने आई हैं।
पुणे पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में अदालत के समक्ष 5,053 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में मोबाइल फॉरेंसिक डेटा, वॉट्सऐप चैट्स, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR), गूगल सर्च हिस्ट्री और प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयानों सहित अकाट्य डिजिटल व तकनीकी साक्ष्यों को शामिल किया गया है।
चार्जशीट के अनुसार, इस पूरे हत्याकांड की साजिश रचने और उसे अंजाम देने के लिए इंटरनेट व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था। इसी बीच केतन का एक भावुक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह अपनी पीठ पर आरोपी सिया गोयल के नाम का टैटू बनवाता नजर आ रहा है।
💔 सिया के जन्मदिन पर देना चाहता था सरप्राइज: पीठ पर गुदवाया था प्रेमिका का नाम
हत्या से पहले का भावनात्मक पहलू और वायरल वीडियो:
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19 जून को था जन्मदिन: आरोपी सिया गोयल का जन्मदिन 19 जून को था। केतन अपनी महिला मित्र के इस जन्मदिन को बेहद खास बनाना चाहता था।
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सरप्राइज देने के लिए बनवाया टैटू: जन्मदिन से ठीक पहले केतन ने अपनी पीठ पर सिया के नाम का स्थायी टैटू बनवाया था, ताकि वह जन्मदिन के मौके पर उसे यह टैटू दिखाकर एक खास तोहफा और सरप्राइज दे सके।
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जांच का हिस्सा बना वीडियो: अब सोशल मीडिया पर केतन द्वारा टैटू बनवाते समय का वीडियो सामने आया है, जिसे पुलिस ने अपनी केस डायरी और जांच का अहम हिस्सा बनाया है।
🌐 गूगल पर सर्च किया ‘सोनम केस’ और ‘डेथ कैप मशरूम’: साजिश के लिए खंगाला इंटरनेट
चार्जशीट में दर्ज गूगल सर्च हिस्ट्री के चौंकाने वाले तथ्य:
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सोनम मर्डर केस का अध्ययन: पुलिस चार्जशीट के मुताबिक, हत्या की साजिश रचने के दौरान इंटरनेट पर पुराने मर्डर केसेज और ट्रेकिंग हादसों का गहन अध्ययन किया गया। सिया गोयल ने गूगल पर ‘सोनम केस’ सर्च कर उसके तौर-तरीकों की जानकारी जुटाई थी।
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जहरीले मशरूम से मारने का प्लान: सर्च हिस्ट्री में ‘Death Cap Mushroom India’, ‘Who Hit Preeti Singh’, ‘Sonam Case’ और ‘Who kill Family by Mushroom’ जैसे संदिग्ध कीवर्ड्स पाए गए। इससे साफ है कि पहले जहरीले मशरूम के जरिए हत्या करने की संभावना भी तलाशी गई थी।
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डेटा डिलीट करने की तरकीबें: इसके अलावा आईफोन से कॉल हिस्ट्री कैसे डिलीट करें, ट्रेकिंग हादसों का कानूनी पहलू और लोहागढ़ किले से जुड़े हादसों की रिपोर्ट्स को भी बार-बार पढ़ा गया था।
🗺️ 28 मई को लोहागढ़ किले की रेकी: तस्वीरों के जरिए तय हुआ घटना स्थल
हत्या के स्थान के चयन और प्लानिंग की टाइमलाइन:
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28 मई को रेकी: साजिशकर्ताओं ने केतन की हत्या के लिए पुणे के निकट स्थित लोहागढ़ किले को चुना। पुलिस का दावा है कि 28 मई को लोहागढ़ की बाकायदा रेकी की गई थी।
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29 मई को केस स्टडी: रेकी के अगले ही दिन 29 मई को सोनम मर्डर केस और उसके बचने के तरीकों का फिर से विश्लेषण किया गया।
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31 मई को ट्रेकिंग का बहाना: 31 मई को सिया केतन को ट्रेकिंग के बहाने लोहागढ़ ले गई, जहां उसने संभावित घटनास्थलों और गहरी खाइयों की तस्वीरें खींचीं।
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चेतन चौधरी को भेजी तस्वीरें: बाद में इन तस्वीरों को सह-आरोपी चेतन चौधरी को दिखाया गया और केतन को नीचे फेंकने के लिए सटीक जगह फाइनल की गई।
🛑 लुल्लानगर में की गई धक्का देने की रिहर्सल: पहले से तय था पुलिस को क्या बताना है
अपराध के पूर्वाभ्यास और कवर-अप की साजिश:
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धक्का देने की प्रैक्टिस: पुलिस चार्जशीट में यह बेहद सनसनीखेज दावा किया गया है कि केतन को गहरी खाई में गिराने के लिए आरोपियों ने पहले से अभ्यास किया था। इसके लिए पुणे के लुल्लानगर इलाके में धक्का देने की मॉक प्रैक्टिस की गई थी।
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झूठी कहानी की स्क्रिप्टिंग: वारदात के बाद पुलिस, परिजनों और आम जनता को क्या बयान देना है और किन सबूतों को कैसे नष्ट व छिपाना है, इसका पूरा प्लान पहले से तैयार कर लिया गया था।
⛰️ 18 जून को लोहागढ़ में रची गई खूनी पटकथा: प्रत्यक्षदर्शी गवाह ने खोला पूरा राज
वारदात का अंतिम दिन और कानूनी स्थिति:
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18 जून की साजिश: जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले 18 जून को केतन को बहाने से लोहागढ़ ले जाया गया।
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खाई में दिया धक्का: पुलिस के आरोप के अनुसार, वहां पहले चेतन चौधरी ने केतन को पीछे से जोरदार धक्का दिया। इसके तुरंत बाद सिया गोयल ने भी उसे गहरी घाटी की तरफ धकेल दिया, जिससे गिरकर उसकी मौत हो गई।
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प्रत्यक्षदर्शी गवाह मौजूद: पुलिस ने चार्जशीट में दावा किया है कि इस पूरी वारदात का एक प्रत्यक्षदर्शी गवाह भी उनके पास है, जिसने आरोपियों को संदिग्ध परिस्थितियों में देखा था।
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मजबूत कानूनी शिकंजा: 5,053 पन्नों की इस विस्तृत चार्जशीट के जरिए पुलिस ने डिजिटल फॉरेंसिक, लोकेशन ट्रैकिंग, कॉल रिकॉर्ड्स और बयानों को जोड़कर आरोपियों के खिलाफ अदालत में एक बेहद मजबूत शिकंजा कसा है।





