Smriti Irani on Congress: हार की बौखलाहट में चुनाव आयोग पर हमला कर रही कांग्रेस, स्मृति ईरानी का तीखा पलटवार

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाने को लेकर कांग्रेस पार्टी पर करारा हमला बोला है।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी मैदान में लगातार मिल रही पराजय की हताशा और बौखलाहट के चलते कांग्रेस अब संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश रच रही है।
स्मृति ईरानी ने सवाल किया कि जब कांग्रेस को पंजाब, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में जीत मिली, तब क्या कांग्रेस नेतृत्व ने चुनाव आयोग को क्लीन चिट दी थी? ऐसे में केवल हारने पर निष्पक्ष चुनाव आयोग पर पक्षपात के झूठे आरोप लगाना कांग्रेस की पुरानी फितरत बन चुका है।
❓ गैर-बीजेपी शासित राज्यों में क्या है कांग्रेस का रुख: स्मृति ईरानी ने दागे सीधे सवाल
दिल्ली मुख्यालय से प्रेस कॉन्फ्रेंस के मुख्य बिंदु:
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चुनिंदा रुख पर घेरा: नई दिल्ली स्थित भाजपा के केंद्रीय मुख्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए स्मृति ईरानी ने कहा कि सवाल यह उठता है कि क्या कांग्रेस नेतृत्व हिमाचल प्रदेश, पंजाब, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों के लिए चुनाव आयोग को क्लीन चिट देने को तैयार है?
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दोगले रवैये का आरोप: उन्होंने कहा कि जहां कांग्रेस जीत दर्ज करती है, वहां संवैधानिक संस्थाएं निष्पक्ष हो जाती हैं और जहां जनता उन्हें नकार देती है, वहां वे तुरंत ईवीएम और चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल खड़े करने लगते हैं।
📋 वोटर लिस्ट विवाद पर बड़ा बयान: क्या फर्जी और मृत लोगों के नाम जोड़ना चाहती है कांग्रेस?
मतदाता सूची शुद्धिकरण और 13.30 करोड़ नामों का तथ्य:
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चुनाव आयोग का आधिकारिक रुख: स्मृति ईरानी ने कहा कि आज कांग्रेस नेतृत्व ने जिन 13 करोड़ 30 लाख नामों का जिक्र किया है, उनके संबंध में चुनाव आयोग 26 तारीख को ही विस्तृत और स्पष्ट आधिकारिक बयान जारी कर चुका है।
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फर्जी मतदाताओं पर सवाल: उन्होंने तीखे लहजे में पूछा कि यदि मतदाता सूची के शुद्धिकरण के दौरान दोहरे नाम (डुप्लीकेट एंट्रीज) हटाए गए हैं या किसी मृत व्यक्ति का नाम सूची से विलोपित किया गया है, तो कांग्रेस पार्टी क्यों चाहती है कि मृत व्यक्तियों के नाम वापस जोड़े जाएं?
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बोगस वोटिंग की मंशा: क्या कांग्रेस पार्टी यह चाहती है कि मतदाता सूची में एक ही व्यक्ति का नाम दो-दो बार दर्ज रहे ताकि फर्जी मतदान को बढ़ावा मिल सके?
🏛️ संवैधानिक संस्थाओं की साख पर हमला अनुचित: मोदी विरोध में देश के ढांचे को नुकसान
लोकतांत्रिक मर्यादा और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा:
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2019 के बयानों की याद: स्मृति ईरानी ने कहा कि वर्ष 2019 में कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे नरेंद्र मोदी की छवि धूमिल करने की हर संभव कोशिश करेंगे।
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लोकतंत्र पर प्रहार अस्वीकार्य: उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदैव कहा है कि विपक्ष उनकी राजनीतिक नीतियों की जमकर आलोचना कर सकता है, किंतु राजनीतिक विरोध की यह आड़ भारत की स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक ढांचे पर सीधे प्रहार में नहीं बदलनी चाहिए।
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संविधान को क्षति पहुंचाने का आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि आज कांग्रेस पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अपनी संकीर्ण राजनीति के लिए देश के बुनियादी संवैधानिक ढांचे को तहस-नहस करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।
📜 इतिहास के पन्ने पलटकर कांग्रेस को घेरा: ब्रिटिश हुकूमत और ए.ओ. ह्यूम की भूमिका
कांग्रेस के गठन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर सवाल:
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इतिहास का आईना: बीजेपी नेता ने कहा कि यदि कांग्रेस पार्टी इतिहास का हवाला देकर वर्तमान संस्थाओं पर उंगली उठाती है, तो उसे अपनी स्थापना से जुड़ा वह ऐतिहासिक पन्ना भी पढ़ना चाहिए जो देश के सामने उसकी वास्तविक शुरुआत को उजागर करता है।
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ए.ओ. ह्यूम का सुझाव: ब्रिटिश शासनकाल के दौरान राजस्व, कृषि और वाणिज्य सचिव रहे ए.ओ. ह्यूम ने तत्कालीन वायसराय को सुझाव दिया था कि 1857 जैसी किसी भी जनक्रांति से ब्रिटिश साम्राज्य की रक्षा के लिए एक सुरक्षा कवच (Safety Valve) के तौर पर राजनीतिक संगठन के रूप में कांग्रेस का गठन किया जाना चाहिए।
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शर्मनाक स्थिति: स्मृति ईरानी ने कहा कि जिस पार्टी की नींव औपनिवेशिक हितों की रक्षा के लिए रखी गई थी, उसका आज ऐतिहासिक लाहौर अधिवेशन की आड़ लेकर स्वतंत्र भारत के निष्पक्ष चुनाव आयोग पर हमला करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है।





