Itarsi Gandhi Jayanti Special: महात्मा गांधी की इटारसी यात्रा के 93 साल, सेठ लख्मीचंद गोठी धर्मशाला में एक रात रुके थे बापू

आज जब पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर उन्हें नमन कर रहा है, तब मध्य प्रदेश के इटारसी के लिए यह दिन बापू से जुड़ी एक ऐतिहासिक याद को ताजा करने का खास अवसर है। आज से करीब 93 साल पहले 30 नवंबर 1933 को महात्मा गांधी ट्रेन के जरिए वर्धा से इटारसी पहुंचे थे और उन्होंने शहर की सेठ लख्मीचंद गोठी धर्मशाला में एक रात बिताई थी। रेलवे स्टेशन के बिल्कुल सामने स्थित यह ऐतिहासिक धर्मशाला आज भी उस दौर की अनमोल यादों और गौरवशाली इतिहास को अपने भीतर समेटे हुए है।
🧹 धर्मशाला की साफ-सफाई और स्वच्छता ने खींचा था बापू का ध्यान: सभी वर्गों के प्रवेश और समानता के संदेश से हुए थे प्रभावित
महात्मा गांधी के लिए स्वच्छता केवल एक कार्य नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का बड़ा माध्यम थी। उस दौर में जब होटल्स या आधुनिक लॉज नहीं हुआ करते थे, यात्रियों के लिए गोठी धर्मशाला प्रमुख ठिकाना हुआ करती थी। धर्मशाला की बेहतरीन व्यवस्था और वहां सभी जातियों व वर्गों के लोगों को मिलने वाले समान स्थान ने बापू को बहुत प्रभावित किया था। अपनी यात्रा के दौरान गांधीजी ने धर्मशाला की व्यवस्था और स्वच्छता की प्रशंसा करते हुए संचालकों के प्रति विशेष आभार भी व्यक्त किया था, जो आज भी दस्तावेजों में दर्ज है।
🇮🇳 जवाहरलाल नेहरू और डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसी महान हस्तियों का भी रहा है नाता: स्वतंत्रता आंदोलन के दिग्गजों ने की थी शिरकत
इस ऐतिहासिक गोठी धर्मशाला का गौरवशाली इतिहास केवल महात्मा गांधी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी 22 अप्रैल 1935 को नागपुर यात्रा के दौरान यहां कुछ समय के लिए ठहरे थे। इसके अलावा, 14 अगस्त 1935 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद भी अपने सहयोगियों के साथ यहां करीब तीन घंटे रुके थे। काका कालेलकर, सुचेता कृपलानी और पंडित रविशंकर शुक्ल जैसे स्वतंत्रता संग्राम के कई अन्य दिग्गज नेता भी आंदोलन के दौरान इस धर्मशाला के मेहमान बन चुके हैं।



