Indira Ekadashi 2026 Date: कब है इंदिरा एकादशी? जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और तुलसी पूजा का महत्व

आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली इंदिरा एकादशी का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व माना गया है। साल 2026 में इंदिरा एकादशी का पावन व्रत 6 अक्टूबर, मंगलवार को रखा जाएगा।
आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की इस एकादशी का नाम ‘इंदिरा एकादशी’ सतयुग के राजा इंद्रसेन के नाम पर पड़ा था। चूंकि यह एकादशी पितृ पक्ष के दौरान आती है, इसलिए इस दिन भगवान विष्णु की आराधना और पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
श्री हरि विष्णु की पूजा तुलसीदल के बिना अधूरी मानी जाती है, और एकादशी तथा पितृ पक्ष के इस अद्भुत संगम पर तुलसी जी की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इंदिरा एकादशी का व्रत मुख्य रूप से पितरों के उद्धार और उन्हें मोक्ष दिलाने के लिए किया जाता है।
🌱 इंदिरा एकादशी पर तुलसी पूजा का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार:
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पितरों की सद्गति: इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करने और तुलसी जी की परिक्रमा करने से पितरों को सद्गति मिलती है और पितृदोष से भी पूरी तरह मुक्ति प्राप्त होती है।
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विष्णु कृपा: तुलसी पत्र समर्पित करने से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
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विशेष नियम: इस बात का विशेष ध्यान रखें कि एकादशी तिथि को तुलसी पत्र तोड़ना पूरी तरह वर्जित माना गया है। इसलिए पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले (दशमी तिथि को ही) तोड़कर रख लें। इस नियम का पालन करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।
🛒 इंदिरा एकादशी पूजा की थाली में जरूर रखें ये सामग्रियां
इंदिरा एकादशी की पूजा थाली तैयार करते समय निम्नलिखित मुख्य सामग्रियों को अवश्य शामिल करें:
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प्रतिमा और वस्त्र: भगवान विष्णु का चित्र या शालिग्राम जी की प्रतिमा और उनके प्रिय पीले फूल।
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तुलसीदल और अक्षत: एक दिन पूर्व (दशमी तिथि को) तोड़े गए तुलसीदल और अर्पण के लिए अक्षत (चावल)।
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चंदन और पंचामृत: पीला चंदन या गोपीचंदन तथा दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से बना पवित्र पंचामृत।
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भोग और दीपक: भोग के लिए पीले फल जैसे केले, मिठाई या पंजीरी तथा शुद्ध देशी घी का दीपक और धूपबत्ती।
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गंगाजल और पुस्तक: आचमनी पात्र, गंगाजल और पाठ के लिए ‘इंदिरा एकादशी व्रत कथा’ की पुस्तक।





