Karachi Section 144 Imposed: कराची में धारा 144 लागू, रैलियों और प्रदर्शनों पर रोक; पाकिस्तान में गहराया राजनीतिक संकट

पाकिस्तान में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। एक तरफ आतंकवाद की गंभीर चुनौती है, दूसरी तरफ इमरान खान की पार्टी (PTI) का विरोध प्रदर्शन और सरकार की सख्त कार्रवाई जारी है। इस बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में इमरजेंसी और गवर्नर शासन लागू कर दिया है और वहां सेना को तैनात करने के आदेश जारी किए गए हैं। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इस आपातकाल और गवर्नर शासन को अपनी मंजूरी दे दी है। इसके अलावा, कराची में भी 20 अक्टूबर तक धारा 144 लागू कर दी गई है, जिसके तहत धरने, रैलियों और सार्वजनिक रूप से पांच से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
🛡️ सेना की तैनाती और आतंकवाद के आंकड़े
पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत खैबर पख्तूनख्वा में सेना की तैनाती का आदेश दिया है।
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रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के अनुसार, इस प्रांत में पिछले दो वर्षों के दौरान करीब 6,200 आतंकवादी घटनाएं हुईं जिनमें लगभग 1,200 लोगों की जान गई।
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सरकार का दावा है कि प्रांत में करीब 1.25 लाख पुलिसकर्मी होने के बावजूद 17 हजार पद खाली पड़े हैं, जिसके चलते सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए सेना की मदद लेनी पड़ रही है।
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हालांकि, इमरान खान की पार्टी PTI ने इस पूरी कार्रवाई को ‘राजनीतिक रूप से प्रेरित’ बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।
📉 कराची में सख्ती और दोहरी चुनौती
खैबर पख्तूनख्वा के बाद अब कराची प्रशासन ने भी कड़े कदम उठाए हैं। प्रशासन का कहना है कि लगातार हो रहे प्रदर्शनों के कारण ट्रैफिक जाम बढ़ रहा था और आम नागरिकों की आवाजाही के साथ-साथ अस्पतालों तक पहुंच भी बाधित हो रही थी। PTI ने पहले इमरान खान की रिहाई और कानून के शासन की मांग को लेकर कराची में प्रदर्शनों की योजना बनाई थी।
वर्तमान में पाकिस्तान की सरकार के सामने एक साथ दोहरी चुनौतियां खड़ी हैं—एक तरफ आतंकवाद पर काबू पाना और दूसरी तरफ राजनीतिक असंतोष को संभालना। इन सख्त फैसलों से देश में स्थिरता आएगी या सरकार, सेना और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ेगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।





