Dhamtari Navratri Kanya Bhoj: धमतरी के सरस्वती शिशु मंदिर में सामूहिक कन्या भोज का आयोजन, नवदुर्गा के स्वरूप में सजीं बालिकाएं

धमतरी: शारदीय नवरात्र के पावन पर्व पर देवी आराधना के बीच धमतरी के सरस्वती शिशु मंदिर में आस्था, श्रद्धा और भारतीय संस्कृति की एक बेहद अनूठी और मनमोहक झलक देखने को मिली। नवरात्र की पंचमी तिथि के अवसर पर विद्यालय परिसर में एक भव्य सामूहिक कन्या भोज का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 80 कन्याओं का विधि-विधान से पूजन कर उन्हें आदर के साथ भोजन कराया गया। इस दौरान कुछ खास बालिकाएँ साक्षात नवदुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों में सजकर पहुँची थीं, वहीं हनुमान जी के दिव्य स्वरूप में एक छोटे बालक की उपस्थिति ने इस पूरे आयोजन में चार चांद लगा दिए।
🍽️ पंक्तिबद्ध बैठकर हुआ कन्या पूजन, आचार्य-दीदियों ने परोसा प्रसाद
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की शुरुआती तीन कक्षाओं यानी अरुण, उदय और प्रभात की नन्हीं कन्याओं को एक साथ सुंदर पंक्तियों में बैठाया गया। इसके पश्चात वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ उनकी आरती उतारकर पूजा-अर्चना की गई और फिर पारंपरिक कन्या भोज की शुरुआत की गई। विद्यालय के सभी आचार्य और आचार्याओं ने अपने कर-कमलों से इन कन्याओं को स्वादिष्ट खीर-पूरी का प्रसाद परोसा। पूजन के उपरांत बालिकाओं को विशेष रूप से श्रृंगार सामग्री और पवित्र चुनरी भी उपहार स्वरूप भेंट की गई। पूरे विद्यालय परिसर में माता की आराधना और पारंपरिक सेवा गीतों की गूंज से माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।
🌟 “नारी शक्ति के प्रति आदर का भाव जगाना ही इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य है”
विद्यालय की प्राचार्या खेमिन साहू ने जानकारी देते हुए बताया कि नवरात्र के इस पवित्र अवसर पर विद्यालय के सभी आचार्य-दीदियों के आपसी सहयोग से इस कन्या भोज का सफल आयोजन किया गया। इसमें पालकों (अभिभावकों) की भी बेहद महत्वपूर्ण और सक्रिय भागीदारी रही। अभिभावक अपनी प्यारी बच्चियों को साक्षात नवदुर्गा के विभिन्न स्वरूपों में सजा-धजाकर विद्यालय लेकर पहुँचे थे, जहाँ उनका विधिवत पूजन किया गया।
प्राचार्या खेमिन साहू ने कहा, — “नवरात्रि के पावन पर्व पर आचार्य-दीदियों के मार्गदर्शन में कन्या भोज का यह सुंदर कार्यक्रम कराया गया, जिसमें हमें अभिभावकों का भी पूरा सहयोग मिला। समाज और नई पीढ़ी के भीतर नारी शक्ति के प्रति सम्मान और आदर का भाव जगाना ही इस इस प्रकार के आयोजनों का मुख्य उद्देश्य है।” उन्होंने आगे कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य न सिर्फ बच्चों को हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ना है, बल्कि उनमें बालपन से ही महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव विकसित करना भी है। विद्यालय में बालिकाओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन करना हमारी इसी महान सांस्कृतिक परंपरा का एक अहम हिस्सा है।
🎶 सेवा गीतों से गूंजा परिसर, बच्चों में बढ़ी सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रति रुचि
विद्यालय की शिक्षिका किरण होल्कर ने बताया कि इस कार्यक्रम के दौरान लगभग 80 कन्याओं को सहर्ष भोजन कराया गया। विद्यालय के समस्त स्टाफ ने मिलकर इस आयोजन को पूरी तरह सफल बनाया। पंचमी के इस खास दिन पर सुबह से ही विद्यालय में भक्तिभाव से भरे सेवा गीतों का गायन किया गया, और कन्या भोज के दौरान भी लगातार गूंजते इन गीतों ने पूरे वातावरण को पूरी तरह से अध्यात्म में डुबो दिया था।
उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति, धर्म और गौरवशाली परंपराओं को बहुत करीब से जानने और समझने का अवसर मिलता है। इसके साथ ही, माता-पिता और अभिभावकों की इस सहभागिता से बच्चों में धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रति गहरी रुचि भी जागृत होती है। नवरात्र की पंचमी पर आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में श्रद्धा, सेवा और श्रेष्ठ संस्कारों का एक बेहद सुंदर संगम देखने को मिला। कन्याओं के पूजन और इस सामूहिक भोज के माध्यम से विद्यालय ने नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं से जोड़े रखने का एक बहुत ही सुंदर संदेश दिया है।



