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Durg Supela Ravan Bhata History: भिलाई स्टील प्लांट से भी पुराना है दुर्ग का रावण भाटा, 150 साल से चली आ रही है रावण दहन की परंपरा

दुर्ग: सुपेला स्थित रावण भाटा केवल रावण दहन का कोई आम मैदान नहीं है, बल्कि यह करीब डेढ़ सौ साल पुरानी समृद्ध परंपरा और गौरवशाली इतिहास की पहचान है. भिलाई इस्पात संयंत्र (Bhilai Steel Plant) की स्थापना से भी बहुत पहले से यहां विजयादशमी के पावन अवसर पर रावण दहन किया जाता रहा है. वक्त के साथ पीढ़ियां बदल गईं और इस औद्योगिक शहर का पूरा स्वरूप भी बदल गया, लेकिन सुपेला रावण भाटा में रावण दहन की यह ऐतिहासिक परंपरा आज भी पूरी आस्था के साथ लगातार जारी है.

🐂 बैलगाड़ियों से मेला देखने पहुंचते थे दूर-दराज के लोग, सरपंच-उपसरपंच के दौर से जुड़ी है कहानी

स्थानीय निवासी एवं पार्षद केशव चौबे ने पुरानी यादें साझा करते हुए बताया कि जब सुपेला एक ग्राम हुआ करता था, तब यहां के ग्रामीणों ने रावण की प्रतिमा स्थापित कर दहन की इस परंपरा की शुरुआत की थी. उस दौर में आसपास के करीब 15 से 20 गांवों के लोग बैलगाड़ियों में सवार होकर रावण दहन देखने सुपेला पहुंचते थे, और कई परिवार तो उत्सव से कई दिन पहले ही यहां आकर डेरा डाल लेते थे. रावण दहन के साथ यहां एक विशाल मेला भी लगता था, जहां लोग दूर-दूर से आकर अपनी जरूरत की खरीदारी करते थे. उन्होंने बताया कि उस समय भगवती ताम्रकार सरपंच और उनके पिता बोरो प्रसाद चौबे उपसरपंच हुआ करते थे, और ग्रामीणों की आपसी सहभागिता से शुरू हुई यह परंपरा आज भी पूरी शान से चली आ रही है.

🤝 45 वर्षों से परंपरा देख रहे हैं कृष्ण सेन, युवा पीढ़ी संभाल रही है विरासत

वहीं, स्थानीय निवासी कृष्ण सेन ने बताया कि कभी पूरे दुर्ग जिले में रावण दहन के मामले में सुपेला रावण भाटा की एक अलग और अनूठी पहचान हुआ करती थी. उन्होंने कहा, “मैं करीब 45 वर्षों से इस भव्य परंपरा को अपनी आंखों से देखते आ रहा हूं. रावण दहन के अवसर पर यहां हमेशा भारी जनसैलाब उमड़ता था और दूर-दूर से लोग इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने आते थे.” सुपेला की इस सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपरा को अब वर्तमान की युवा पीढ़ी पूरी जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ा रही है और इस विरासत को सहेजकर रख रही है.

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