Haryana School Renaming News: हरियाणा में 279 सरकारी प्राथमिक स्कूलों के बदले गए नाम, पहली कक्षा से होगी अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई

चंडीगढ़: हरियाणा राज्य के भीतर प्राथमिक स्तर की शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता को और अधिक उन्नत बनाने तथा सरकारी स्कूलों को एक नई अकादमिक पहचान दिलाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इसके तहत राज्य के कुल 279 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के नामकरण में परिवर्तन करने का निर्णय लिया गया है। इस नई व्यवस्था के अंतर्गत राज्यभर के 202 विद्यालयों को ‘राजकीय मुख्यमंत्री उत्कृष्टता एवं प्रारंभिक अंग्रेजी प्राथमिक विद्यालय’ तथा शेष 77 विद्यालयों को ‘राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक विद्यालय’ के नाम से जाना जाएगा और तदनुसार इन्हें नामित किया जाएगा।
परिसर के पास संचालित स्कूलों के लिए जारी की गई जिलेवार सूची, शिक्षा विभाग ने दी आधिकारिक जानकारी
स्कूल शिक्षा विभाग की तरफ से जारी किए गए आधिकारिक आदेशों के अनुसार, यह बदलाव विशेष रूप से उन प्राथमिक विद्यालयों में लागू किया गया है, जो या तो पहले से निर्धारित मॉडल संस्कृति, मुख्यमंत्री उत्कृष्टता, पीएम श्री माध्यमिक या फिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के कैंपस के अंदर अथवा उनके बिल्कुल समीप संचालित हो रहे हैं। विभाग ने इस नए और आधुनिक नामकरण के साथ ही सभी संबंधित विद्यालयों की विस्तृत जिलेवार सूची भी सार्वजनिक कर दी है, ताकि प्रशासनिक स्तर पर सुगमता बनी रहे।
कक्षा पहली से अनिवार्य होगी अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई, हिंदी और अंग्रेजी के मिलेंगे अलग-अलग सेक्शन
इस नई नीति के लागू होने के उपरांत सभी चयनित प्राथमिक विद्यालयों के भीतर पहली कक्षा की सम्पूर्ण पढ़ाई अनिवार्य रूप से अंग्रेजी माध्यम के जरिए कराई जाएगी। इसके साथ ही, जब छात्र दूसरी कक्षा में प्रवेश करेंगे तो उन्हें हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के अलग-अलग अनुभागों (सेक्शन) में पढ़ाई करने का विकल्प प्रदान किया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि प्रत्येक विद्यालय में दोनों माध्यमों की कक्षाओं के लिए एक-एक पृथक सेक्शन सुचारू रूप से संचालित किया जाएगा। अधिसूचना जारी होने के साथ ही इन तमाम विद्यालयों को सह-शिक्षा (को-एजुकेशन) संस्थानों के तौर पर चलाया जाएगा।
शुल्क व्यवस्था को लेकर स्पष्ट किए गए नियम, सत्र 2027-28 से लागू होगी विद्यालय विकास निधि
विभाग की ओर से दोनों श्रेणियों के इन विद्यालयों के लिए वित्तीय और आर्थिक प्रावधान भी अलग-अलग तय किए गए हैं। ‘राजकीय मुख्यमंत्री उत्कृष्टता एवं प्रारंभिक अंग्रेजी प्राथमिक विद्यालयों’ में नियमित मिलने वाली सरकारी निधियों (फंड्स) के अतिरिक्त विद्यार्थियों से किसी भी तरह का शुल्क अथवा किसी भी प्रकार का अन्य आर्थिक योगदान नहीं लिया जाएगा। दूसरी तरफ, ‘राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक विद्यालयों’ के लिए शैक्षणिक सत्र 2027-28 से विद्यालय विकास निधि (स्कूल डेवलपमेंट फंड) की व्यवस्था को क्रमिक रूप से लागू किया जाएगा।
सामान्य तबादलों के बजाय स्क्रीनिंग परीक्षा के आधार पर की जाएगी शिक्षकों की नियुक्ति
इन विशेष विद्यालयों में अध्यापकों और शिक्षकों की तैनाती पारंपरीक एवं सामान्य स्थानांतरण या तैनाती प्रक्रिया के जरिए न होकर एक सख्त ‘स्क्रीनिंग प्रक्रिया’ के माध्यम से संपन्न होगी। यह पूरी कार्यप्रणाली ठीक उसी तर्ज पर अपनाई जाएगी जैसी वर्तमान में मॉडल संस्कृति, पीएम श्री और मुख्यमंत्री उत्कृष्टता विद्यालयों के चयन में अमल में लाई जा रही है। इस व्यवस्था को लाने का मुख्य मकसद ऐसे योग्य और दक्ष शिक्षकों को चुनकर तैनात करना है, जो अंग्रेजी माध्यम समेत अन्य निर्धारित आधुनिक शैक्षणिक मानकों के अनुकूल विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे सकें।
प्रधान सचिव और प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के स्तर से जारी हुए निर्देश, कई जिलों के स्कूल हुए शामिल
स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विजय दहिया की ओर से जारी किए गए इन महत्वपूर्ण आदेशों को प्रारंभिक शिक्षा निदेशक मनीता मलिक ने गत 27 अक्टूबर को तमाम संबंधित जिला अधिकारियों और विद्यालय प्रमुखों के पास आवश्यक एवं त्वरित कार्रवाई के वास्ते प्रेषित कर दिया है। जिन प्रमुख जिलों के विद्यालयों में ये बदलाव देखने को मिलेंगे उनमें अंबाला, भिवानी, चरखी दादरी, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गुरुग्राम, हांसी, हिसार, झज्जर, जींद, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, महेंद्रगढ़, नूंह, पलवल, पंचकूला, पानीपत, रेवाड़ी, रोहतक, सिरसा, सोनीपत और यमुनानगर शामिल हैं। शिक्षाविदों का मानना है कि सरकार के इस दूरदर्शी कदम से प्राथमिक शिक्षा के ढांचे में आधुनिक पद्धतियों का विस्तार होगा और विद्यार्थियों का भविष्य मजबूत बनेगा।





