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स्वास्थ्यकर्मी पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, वेतन का भुगतान नहीं होने और सुरक्षा का मुद्दा उठाया

नई दिल्ली। नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ सहित स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है। इसमें अधिकारियों को कोविड-19 वार्डो में काम करने वाले या संदिग्ध मरीजों के निकट आने वाले लोगों को उचित सुरक्षा किट प्रदान करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है।

यूनाइटेड नर्सेज एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका में कोविड-19 रोगियों के उपचार से संबंधित मामले में हस्तक्षेप करने की अनुमति मांगी गई है, जिस पर अदालत ने स्वत: संज्ञान लिया है। एसोसिएशन ने अपनी याचिका में कहा है कि स्वास्थ्य कर्मचारी कोविड-19 के प्रकोप के अगले मोर्चे पर काम करते हैं।

काम के लंबे घंटों और मनोवैज्ञानिक दबाव समेत उन्हें खतरे का सामना करना पड़ता है। याचिका में कहा गया है कि स्वास्थ्यकर्मियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा (शारीरिक/मानसिक) का अत्यधिक महत्व है। स्वास्थ्यकर्मियों के अभाव में हजारों कोविड-19 रोगियों का इलाज नहीं हो सकेगा। इसके घातक परिणाम होंगे।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन थका देने वाले और कठिन समय में कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिनका देशभर के स्वास्थ्यकर्मियों को सामना करना पड़ रहा है। इनमें कई अस्पतालों में पर्याप्त व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) की अनुपलब्धता, कोविड-19 परीक्षण किट का पर्याप्त संख्या में न होना, पीपीई का मानक के अनुसार न होना शामिल है। इसके अलावा आइसोलेशन वार्डो में मूलभूत सुविधाओं की कमी, वेतन का भुगतान न करना और कुछ निजी अस्पतालों द्वारा सरकारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन जैसी समस्याएं हैं।

एसोसिएशन ने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश देने को कहा है कि स्वास्थ्यकर्मियों को पर्याप्त और मानक पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाए और वार्डो की सभी नर्सो और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों को अस्पतालों के पास उचित आवास उपलब्ध कराया जाए।

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