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‘अलग-अलग फॉर्मेट में अलग-अलग कप्तान, टीम इंडिया को कब पड़ेगी इसकी जरूरत’

मुंबई। भारत में टेस्ट और सीमित ओवरों के फॉर्मेट के लिये अलग-अलग कप्तान रखने पर चर्चा चल रही है लेकिन मांजरेकर का मानना है कि अभी इसकी जरूरत नहीं है क्योंकि विराट कोहली तीनों प्रारूपों में बल्लेबाज के रूप में पहली पसंद हैं। मांजरेकर से पूछा गया कि क्या भारत को भी हर प्रारूप में अलग कप्तान रखने की जरूरत है, उन्होंने कहा कि अगर आपके पास ऐसा कप्तान है जो तीनों प्रारूप में अच्छा प्रदर्शन करता है तो फिर आपको प्रत्येक प्रारूप के लिये अलग कप्तान रखने की जरूरत नहीं है। ’’

उन्होंने कहा कि अभी आपके पास विराट कोहली है जो तीनों प्रारूप में शानदार है इसलिए भारत को हर प्रारूप के लिये अलग कप्तान रखने की जरूरत नहीं है। भविष्य में ऐसा हो सकता है। मांजरेकर ने कहा कि भारत भाग्यशाली रहा है कि उसके पास महेंद्र सिंह धौनी और कोहली जैसे कप्तान रहे और इसलिए अलग अलग कप्तानों की जरूरत नहीं पड़ी।

संजय मांजरेकर ने कहा कि अगर भारत ऐसी स्थिति में आता है जहां उसके पास बेहतरीन टेस्ट कप्तान और टेस्ट खिलाड़ी है लेकिन वह 50 ओवर या टी20 में अच्छा नहीं है तो तब आप अलग प्रारूप के लिये अलग कप्तान रख सकते हो। लेकिन भारत के पास अभी तीनों प्रारूप में अच्छा प्रदर्शन करने वाला कप्तान है। पूर्व में भी धौनी ऐसे कप्तान थे। वह तीनों प्रारूप में कप्तान थे और तीनों में अच्छा प्रदर्शन भी करते थे।

आपको बता दें कि टीम इंडिया में अलग-अलग प्रारूप में अलग-अलग कप्तान बनाने की बात काफी पहले से ही चल रही है। इस मामले पर कई पूर्व खिलाड़ियों ने अपनी-अपनी राय दी है। कई लोगों का ऐसा मानना है कि विराट कोहली को टेस्ट और वनडे का कप्तान बने रहना चाहिए, लेकिन टी20 की कप्तानी रोहित शर्मा को सौंप देनी चाहिए क्योंकि उनका रिकॉर्ड कप्तान के तौर पर इस प्रारूप में काफी अच्छा रहा है। आइपीेएल में उन्होंने कप्तान के तौर पर काफी सफलता हासिल की है, लेकिन वहीं विराट वहां पर कप्तान के तौर पर ज्यादा सफल नहीं हो पाए हैं।

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