ब्रेकिंग
BJP नेता कैलाश विजयवर्गीय ने डोनाल्ड ट्रंप को कहा फूफा, बताया मैकडॉनल्ड्स छोड़ क्या खाएं एक क्लासरूम में बच्चे, दूसरे में सो रहे मास्टर… वीडियो वायरल होने के बाद मचा बवाल ट्रैक्टर से स्टंटबाजी पड़ी महंगी… जुलूस के दौरान खाई पलटी, वीडियो हुआ वायरल 7 साल बाद चीन दौरे पर पीएम मोदी, राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक जारी, रूस समेत 20 से ज्यादा देशों... PM मोदी की मां को अपशब्द कहने वाले का BJP से कनेक्शन, दिग्विजय सिंह ने किया बड़ा दावा इस मामले में रूस और चीन से पीछे है अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा का भी बजता है डंका विवादों के बीच छलका पवन सिंह का दर्द, सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जाहिर किए जज्बात एक ही मैच में 2 हैट्रिक से चूककर भी छाए इमरान ताहिर, 46 की उम्र में वो किया, जो कोई सोच भी नहीं सकता क्या सच में TikTok से हट जाएगा बैन? कंपनी भारत में शुरू कर रही हायरिंग राधा अष्टमी आज, जानें इस दिन का महत्व और व्रत कथा
देश

दोस्‍ती पर संकट, अकाली दल ने दबाव बढ़ाया तो हाथ झटकने में देर नहीं लगाएगी BJP

चंडीगढ़। हरियाणा में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की दोस्‍ती पर संकट है। हरियाणा की 30 विधानसभा सीटों पर टिकट की दावेदारी जताते हुए शिरोमणि अकाली दल ने भाजपा पर दबाव बढ़ा दिया है। जिस तरह से लोकसभा चुनाव के नतीजे आए, उसके मद्देनजर नहीं लगता कि भाजपा हरियाणा में अकाली दल को अधिक अहमियत देगी। विधानसभा चुनाव में कम से कम 30 सीटें छोडऩे का अकाली दल का दबाव ज्यादा ही बढ़ा तो दोनों दलों की दोस्ती पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं। शिअद ने ज्‍यादा दबाव बढ़ाया तो हरियाणा मेें भाजपा उससे हाथ झटकने में देर नहीं लगाएगी।

हरियाणा में अकाली दल मांग रहा भाजपा से 30 विधानसभा सीटें, भाजपा मूड में नहीं

पंजाब में अकाली दल और भाजपा का बरसों पुराना साथ है। लोकसभा चुनाव में जब अकाली दल ने हरियाणा में चुनाव लडऩे की रणनीति तैयार की थी, तब भरोसा दिलाया गया कि अकाली इस चुनाव में भाजपा का साथ दें, इसकी एवज में अकाली दल के लिए विधानसभा चुनाव में कुछ सीटें छोड़ी जा सकती हैं। उस समय सीटों की संख्या पर कोई बातचीत नहीं हुई थी, लेकिन अब अकाली द

हरियाणा में अकालियों से पंजाब का बदला ले रही भाजपा

हरियाणा में भाजपा के लिए अकाली दल की अहमियत उतनी ही है, जितनी पंजाब में अकाली दल के लिए भाजपा की है। पंजाब में अकाली दल ने भाजपा को कभी पनपने नहीं दिया। इसी फार्मूले पर अब भाजपा हरियाणा में चल रही है और अकाली दल को उसकी मांग के अनुरूप किसी सूरत में 30 टिकट देने को तैयार नहीं है। भाजपा के प्रांतीय नेताओं का मानना है कि अगर अकाली दल वास्तव में चुनाव लडऩा चाहता है तो उसके लिए पांच सीटें छोड़ी जा सकती हैं। यह सीटें कौन सी होंगी, इसका निर्धारण भी भाजपा खुद ही करेगी।

भाजपा की इस पेशकश पर यदि अकाली नेता तैयार नहीं हुए तो दोनों दलों के बीच दूरियां बढ़ने की संभावना से इन्‍कार नहीं किया जा सकता। दोनों दलों के बीच इन दूरियों का असर पंजाब में अकाली दल व भाजपा के रिश्तों पर पड़ना स्वाभाविक है। शुरू में अकाली दल के नेताओं को कम से कम सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार करने की कोशिश रहेगी। इसमें सफलता नहीं मिली तो अकाली दल और भाजपा के रिश्ते जुदा होना तय हैं, जिसकी नींव हरियाणा से पड़ सकती है।

भाजपा ने हरियाणा में लोकसभा चुनाव के दौरान 90 में से 79 विधानसभा सीटों पर बढ़त हासिल की है। इसके बावजूद पार्टी ने कम से कम 75 विधानसभा सीटें जीतने का लक्ष्य निर्धारित किया है। बाकी 15 सीटों पर भी भाजपा ने अपनी दावेदारी नहीं छोड़ी, लेकिन उसका टारगेट 75 सीटें जीतने का ही है। इसमें यदि बढ़ोतरी होती है तो यह भाजपा के लिए बोनस होगा। इन्हीं 15 सीटों में से पांच सीटें भाजपा अपनी सहयोगी पार्टी अकाली दल को देने की पेशकश कर सकती है।

अकाली दल के नेताओं ने भाजपा हाईकमान से मांगा मिलने का समय

अकाली दल नेताओं ने भाजपा हाईकमान से मुलाकात के लिए समय मांगा है। अकाली दल का दावा है कि हरियाणा की कुरुक्षेत्र, करनाल, सिरसा और अंबाला लोकसभा सीटों की 15 से 20 विधानसभा सीटें सिख बाहुल्य हैं। इन सीटों पर अकाली दल की पकड़ मजबूत है। इसलिए यह सीटें अकाली दल को आवंटित की जाएं। शुरू में हरियाणा में अकाली दल और इनेलो मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, मगर एसवाईएल नहर निर्माण के मुद्दे पर दोनों दलों के राजनीतिक रिश्ते खत्म हो गए। इसके बावजूद बादल व चौटाला परिवार के पारिवारिक रिश्ते अभी भी कायम हैं। यदि अकाली दल और भाजपा की राजनीतिक राहें जुदा हुई तो चौटाला व बादल परिवार के राजनीतिक रिश्तों को आक्सीजन मिल सकती है।

‘अकाली दल हरियाणा में चुनाव लड़ने को तैयार’

लोकसभा चुनाव में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के भरोसे के बाद अकाली दल मैदान से हट गया था। अकाली दल ने लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा की पूरी मदद की, जिसके बाद भाजपा की सबी 10 सीटों पर जीत हुई। अब अकाली दल द्वारा अमित शाह को प्रस्ताव दिया गया है कि हरियाणा भाजपा व अकाली दल की संयुक्त बैठक हाईकमान की मौजूदगी में कराई जाए, जिसमें सीटों के आवंटन पर फैसला हो सके। अकाली दल हरियाणा में विधानसभा चुनाव लडऩे के लिए तैयार है।

  – बलविंदर सिंह भूंदड़, राज्यसभा सदस्य एवं प्रभारी, शिरोमणि अकाली दल हरियाणा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button