बरेली नगर निगम का कारनामा, कौडियों के भाव दे रखी करोड़ों की संपत्ति, हजारों रुपए के किराए पर लेता है बिल्डिंग

बरेली। नगर निगम एक तरफ तो खुद की आमदनी बढ़ाने के लिए हाउस टैक्स रिवाइज करके लोगों पर बोझ डालने की बात करता है। वही खुद की संपत्तियों को लीज पर कौडी के भाव देकर खुद किराए के भवन पचासों हजार रुपये फूंककर किराए पर लेता है। रामपुर गार्डेन में शुक्रवार को जिन दो कोठियों को सील किया गया था। वह न सिर्फ पॉश इलाके में है बल्कि करीब एक बीघे जमीन पर यह दोनों कोठियां बनी है, जिसमें कोठी नंबर दो में तो रहने वाले लोगों ने उसको डेंट पेंट करवाकर बंगले की शक्ल दे दी है। इन कोठियों की कीमत करीब तीस करोड़ रुपये भी ज्यादा होगी। बड़ी बात यह है कि इन कोठियों को नगर निगम ने दो लोगों को लीज पर दिया था।
कुछ दिन तक लीज का पैसा 200 से 250 रुपये रहने वाले लोग जमा करते रहे। बाद में वह भी बंद कर दिया लेकिन कब्जा करके आराम से रहते रहे। काफी दिनों तक तो नगर निगम को पता ही नही था कि इन कोठी की मिल्कियत उसके पास है। बाद में जब पूर्व नगर आयुक्त ने दस्तावेज खंगाले तो पता चला कि यह कोठियां दोनों नगर निगम की है। नोटिस भी दी गई लेकिन कोठियां खाली नहीं हुई।
खास बात यह है कि तब स्मार्ट सिटी के लिए कार्यालय की जरुरत पड़ी तो रामपुर गार्डेन में ही 50 हजार रुपये के किराये पर दूसरी बिल्डिंग ले ली गई लेकिन इन कोठियों को खाली नहीं कराया गया। अब जब शुक्रवार को कोठियों को खाली कराने के लिए टीम पहुंची तो यहां के रहने वालों ने श्राद्ध के दिन होने की बात कहकर मोहलत मांग ली। ऐसे में दो घंटे पहले लगाई गई सील बाद में खोलनी पड़ी। इसी तरह से एलन क्लब के मामले में भी हुआ था।
अभी भी अरबों रुपये की संपति नगर निगम की शहर में है, जिसका चिन्हांकन तक नहीं हो पाया है। दोनों ही किराएदारों की लीज खत्म हो गई है । इसलिए इनको नोटिस दिया गया था। बाद में उनको सील कर दिया गया था। उन्होंने कुछ दिन की मोहलत मांगी है। ललितेश सक्सेना, कर अधीक्षक , नगर निगम