ब्रेकिंग
Rahul Gandhi on CEC: 'ज्ञानेश कुमार को जाना ही होगा, PM करवाएंगे इस्तीफा', CWC बैठक में राहुल गांधी ... 'मुसलमानों को निशाना बनाने की साजिश', धर्मवार आंकड़े मांगने पर भड़के ओवैसी Delhi Pollution GRAP 2026: सर्दियों से पहले CAQM का बड़ा फैसला, BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल गाड़ियो... चुनाव प्रक्रिया पर फिर उठे गंभीर सवाल: महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की चिट्ठी से मचा सियासी ... BJP State Incharges Meeting: बीजेपी मुख्यालय में 4 घंटे चली मैराथन बैठक, नितिन नबीन ने प्रभारियों को... Smriti Irani on Congress: हार की बौखलाहट में चुनाव आयोग पर हमला कर रही कांग्रेस, स्मृति ईरानी का तीख... Delhi Police Drug Bust: लेडी डॉन पार्वती के घर से सोना, नकदी और 4 संपत्तियों के कागजात जब्त; अंतरराज... Ketan Agarwal Murder Case: पुणे में रूह कंपाने वाली साजिश, 5,053 पन्नों की चार्जशीट में 'डेथ कैप मशर... Agra-Lucknow Expressway Accident: फिरोजाबाद में भीषण सड़क हादसा, इटावा DFO विकास नायक और उनके ड्राइव... Former IAS Divya Mittal: पूर्व IAS दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री, बिना किसी दल के बनाएंगी अपना...
देश

इन तीन वजहों से मलेशिया के पूर्व पीएम महातिर ने की फ्रांस के खिलाफ बयानबाजी, जानें एक्‍सपर्ट व्‍यू

नई दिल्‍ली। फ्रांस को लेकर दुनिया के कई मुल्‍कों, खासकर इस्‍लामिक देशों में विरोध बढ़ता ही जा रहा है। इस विरोध में मलेशिया की तरफ से आया ताजा बयान काफी आक्रामक दिखाई देता है। इसमें मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री महाथिर मुहम्मद ने पिछले दिनों फ्रांसीसी शिक्षक की हत्या को सही ठहराते हुए कहा है कि पूर्व के नरसंहारों के लिए मुस्लिमों को नाराज होने और लाखों फ्रांसीसी लोगों की हत्या करने का हक है। पूर्व राष्‍ट्रपति का ये बयान फ्रांस के पीएम इमेन्‍युल मैक्रॉन के उस बयान के बाद आया है जो उन्‍होंने एक स्‍कूल टीचर की हत्‍या और नीस के चर्च में तीन लोगों की हत्‍या के बाद दिया था। स्‍कूल टीचर की हत्‍या के बाद फ्रांस सरकार ने कई इस्‍लामिक संगठनों पर प्रतिबंध तक लगा दिया था। हिस्‍ट्री की स्‍कूल टीचर ने क्‍लास के दौरान कथिततौर पर पैगंबर साहब का कार्टून दिखाया था। इसके बाद कई देशों ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त की थी। वहीं नीस की घटना की भी कई देशों ने कड़ी आलोचना की है।

पूर्व राष्‍ट्रपति महाथिर के बयान को भले ही पूरी दुनिया एक अलग नजरिए से देख रही हो लेकिन जानकार इसके पीछे तीन बड़ी वजह मानते हैं। विदेश मामलों के जानकार और वरिष्‍ठ पत्रकार कमर आगा का कहना है कि मलेशिया के इस बयान के पीछे जो तीन बड़ी वजह हैं उनमें सबसे पहली वजह पैगंबर मोहम्‍मद साहब का कार्टून है। जिसको कोई भी इस्‍लामिक राष्‍ट्र या इस्‍लाम को मानने वाला सही नहीं मानता है। इसकी दूसरी बड़ी वजह मलेशिया की आतंरिक समस्‍याएं हैं, जिनसे वो अपनी जनता का ध्‍यान हटाना चाहता है और उसे इसके लिए एक मौका भी मिल गया है। उनकी निगाह में इस तरह के तीखे और आक्रामक बयान की तीसरी बड़ी वजह है, उसके इस्‍लामिक देशों का मुखिया बनने की चाह। इसको लेकर वो काफी समय से प्रयास भी कर रहा है।

आगा की मानें तो इस्‍लाम के प्रति फ्रांस समेत दूसरे मुल्‍कों की सोच में बड़ा बदलाव आतंकी संगठन इस्‍लामिक स्‍टेट के द्वारा किए गए कत्‍लेआम से भी आया है। इसके बाद दुनिया के कई मुल्‍कों की सोच इस्‍लाम के प्रति काफी हद तक बदल गई। इसका फायदा कहीं न कहीं कट्टरपंथी ताकतों ने भी उठाया और इसको हवा दी। इतिहास पर नजर डालें तो फ्रांस और जर्मनी समेत यूरोप के दूसरे देशों में भी इस तरह का कत्‍लेआम देखा गया है। फ्रांस की ही बात करें तो वहां पर काफी संख्‍या में इस्‍लाम को मानने वाले लोग रहते हैं। ये लोग अधिकतर अफ्रीकी देशों से माइग्रेट कर वहां पर आए हैं। लेकिन फ्रांस समेत उन जगहों पर जहां पर उनका शासन रहा है वहां पर इन लोगों और वहां के स्‍थानीय लोगों में हमेशा से ही एक दूरी रही है। फ्रांस की सोच है कि वहां पर रहने वाले सभी लोग उनकी संस्‍कृति और सभ्‍यता के मुताबिक आगे बढ़ें, लेकिन वहीं दूसरी तरफ अन्‍य देशों से पलायन कर फ्रांस में बसने वाले अपने धर्म, संस्‍कृति और सभ्‍यता को नहीं छोड़ना चाहते हैं। यही वजह है कि ये लोग वहां की सोसायटी में घुलमिल नहीं सके

उनका कहना है कि मलेशिया, पाकिस्‍तान और तुर्की उन देशों में शामिल है जिसने फरवरी 2020 में इस्‍लामिक देशों का एक अलग संगठन बनाने की कवायद शुरू की थी। इसके तहत मौजूदा इस्‍लामिक सहयोग संगठन से अलग एक संगठन बनाने की कवायद के जरिए मलेशिया ने सभी इस्‍लामिक देशों का मुखिया बनने का सपना देखा था। इसमें पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को मुख्‍य अतिथी बनाया गया था। लेकिन सऊदी अरब के दबाव के चलते इमरान ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया था। अब फ्रांस के मुद्दे के साथ मलेशिया को एक बार फिर से वैश्विक मंच पर आने का मौका मिल गया। आगा का ये भी कहना है कि मौजूदा समय में सऊदी अरब इस्‍लामिक सहयोग संगठन में बेहद बड़ी और मजबूत भूमिका में है। लेकिन हकीकत ये है कि उसकी लीडरशिप काफी कमजोर हो चुकी है।

मलेशिया इसका ही फायदा उठाकर इस्‍लामिक देशों का मुखिया बनना चाहता है, जिसको सऊदी अरब समेत समूचा अरब जगत कभी नहीं मान सकता है। हालांकि इससे बाहर के इस्‍लामिक देश, जो अच्‍छी खासी तादाद में हैं इसमें शामिल जरूर हो सकते हैं। मलेशिया, पाकिस्‍तान और तुर्की अपने आंतरिक मसलों में बुरी तरह से घिरे हुए हैं। ऐसे में वो कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहते हैं। इस तरह बयान देकर वो अपने मकसद में काफी हद तक कामयाब भी हो जाते हैं।

Related Articles

Back to top button