ब्रेकिंग
Parliament Question Hour Analysis: संसद के लाखों सवालों में आम जनता के मुद्दे कहां? जानिए गरीबी और ज... Maharashtra Voter List SIR 2026: वोटर लिस्ट से नाम हटाने से पहले BLA को देनी होगी सूची, चुनाव आयोग क... RSS Chief Mohan Bhagwat: अतिवाद से परेशान है दुनिया, भारत के पास है ज्ञान का खजाना; अखिल भारतीय विहा... Tamil Nadu Language Dispute: सथानकुलम में दिशा-निर्देश बोर्ड से मिटाए गए हिंदी शब्द, भारी विरोध के ब... Ozone Urbana Scam: बेंगलुरु में होम बायर्स से 927 करोड़ की ठगी, ओजोन ग्रुप के CMD एस. वासुदेवन गिरफ्... Manori Beach News: स्पीडबोट से विदेशी जहाज में चोरी करने घुसे थे बदमाश, गैस रिसाव से 4 की मौत; हेलीक... यूपी की 11 MLC सीटों पर भाजपा का चुनावी चक्रव्यूह: 23 अक्टूबर को मतदान, सामाजिक समीकरणों पर जोर Ramnagar Road Accident: नैनीताल घूमने निकले नेशनल बास्केटबॉल प्लेयर यतीश यादव की सड़क हादसे में मौत,... दिल्ली के 736 पार्कों का सुरक्षा ऑडिट पूरा: उपराज्यपाल के निर्देश पर DDA ने 3 श्रेणियों में बांटे पा... वृंदावन आश्रम पर गहराया विवाद: शिष्य की संदिग्ध मौत के बीच हाथरस का युवक 3 महीने से लापता
देश

ओवैसी के पासे से ममता के लिए सांप-छछूंदर की स्थिति, ओवैसी ने दिया साथ चुनाव लड़ने का प्रस्ताव

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में भाजपा और वाम-कांग्रेस के मोर्चे से लड़ाई की रणनीति तैयार कर रही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एआइएमआइएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने सांप-छछूंदर की स्थिति पैदा कर दी है। ओवैसी ने साथ चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दे दिया है जिसे स्वीकार करना और न करना दोनों की ममता की मुश्किलें बढ़ाएगा। यही कारण है कि ओवैसी के प्रस्ताव पर तृणमूल में चुप्पी है।

भाजपा को हराने के लिए ओवैसी ममता के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहते हैं

अभी अभी पश्चिम बंगाल से सटी बिहार विधानसभा की पांच सीटों पर जीत से उत्साहित ओवैसी ने तृणमूल के सामने पासा फेंका था। उन्होंने कहा था कि भाजपा को हराने के लिए वह ममता के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहते हैं। यह इसलिए एक पासा कहा जा सकता है क्योंकि वहां किसी घोषणा से पहले ओवैसी अपने लिए आधार तैयार करना चाहते हैं।

पश्चिम बंगाल में चार दर्जन सीटों पर अल्पंसख्यक प्रभाव 

ध्यान रहे कि 294 सीटों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा मे चार दर्जन से कुछ ज्यादा सीटें ऐसी हैं जहां अल्पसंख्यक मुस्लिम वोटर प्रभावी है। वैसे तो ममता पर अल्पसंख्यक राजनीति करने का आरोप ही चस्पा रहा है, लेकिन भाजपा के बढ़ते राजनीतिक दबाव के कारण पिछले कुछ वर्षों में वह साफ्ट हिंदुत्व की ओर बढ़ी हैं।जबकि ओवैसी हार्ड लाइन रखने वाले अल्पसंख्यक नेता हैं। बिहार में उनकी जीत का एक बड़ा कारण यही रहा। यही कारण है कि बिहार में राजग के मुकाबले सिर्फ महागठबंधन के होने के बावजूद कुछ सीटों पर बड़ी संख्या में ओवैसी की पार्टी को वोट पड़े थे।

ममता ओवैसी के साथ जाती हैं तो भाजपा करेगी वार, यदि नहीं तो ओवैसी को मिलेगा मौका 

ऐसी स्थिति में ममता के लिए परेशानी यह है कि वह कट्टर राजनीति करने वाले ओवैसी के साथ जाती हैं तो भाजपा को वार करने का और बड़ा मौका मिलेगा। अगर हाथ झिड़कती हैं तो ओवैसी को जमीन पर खुलकर खेलने का मौका मिलेगा।

ओवैसी की नजर उत्तर बंगाल पर है

यह भी ध्यान रहे कि ओवैसी की नजर मुख्यत: उत्तर बंगाल पर है और यही वह क्षेत्र है जहां लोकसभा में भी भाजपा ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था। बताया जाता है कि यही कारण है कि कुछ दिनों पहले तक परोक्ष रूप से ओवैसी को बाहरी और भ्रमित करने वाले नेता बताकर तंज करने वाली तृणमूल कांग्रेस में अभी चुप्पी है।

ममता के लिए किसी भी दल के साथ हिस्सेदारी करना मुश्किल है

वैसे भी एक दशक से पश्चिम बंगाल पर एकछत्र राज कर रहीं ममता के लिए किसी भी दल के साथ हिस्सेदारी करना बहुत मुश्किल है।

वाम-कांग्रेस के मोर्चा से ममता को और बढ़ेगी परेशानी

यह परेशानी और बढ़ेगी क्योंकि वाम-कांग्रेस का मोर्चा भी तैयार होगा जिसमें हर वर्ग के नेता है। जबकि खुद तृणमूल के कई दिग्गज साथ छोड़ चुके हैं और कई लाइन में खड़े हैं।

Related Articles

Back to top button