ब्रेकिंग
OTT Censorship: 'सतलुज' विवाद के बाद सख्त हुई सरकार, OTT फिल्मों के लिए CBFC सर्टिफिकेट होगा अनिवार्... ISRO Brain Drain: इसरो में मची खलबली, 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने दिया इस्तीफा, सरकार ने सख्त किए न... Datia By-Election: दतिया में गरजे नरोत्तम मिश्रा, प्रशासन को दी चेतावनी, बोले- 'किसी में हिम्मत नहीं... Datia By-Election: 'नरोत्तम मिश्रा बड़ी चुनौती थे, आशुतोष तिवारी कुछ नहीं', कांग्रेस प्रत्याशी घनश्य... Haldiram in London: लंदन के लीसेस्टर स्क्वायर में खुला हल्दीराम का पहला स्टोर, छोले-भटूरे खाने उमड़ी... Telangana ACB Raid: HMDA के चीफ इंजीनियर के घर छापा, 100 करोड़ की बेहिसाब संपत्ति का खुलासा Telangana ACB Raid: HMDA के चीफ इंजीनियर बी. रविंदर गिरफ्तार, 9.24 करोड़ की बेहिसाब संपत्ति जब्त Delhi Education Hub: दिल्ली को शिक्षा का बड़ा हब बनाने की तैयारी, CM रेखा गुप्ता ने DU के छात्रों को... Datia By-Election: जीतू पटवारी का बड़ा दावा- 'दतिया उपचुनाव 25 हजार वोटों से जीतेगी कांग्रेस' Shirdi Sai Baba Prasad: शिरडी में 700 किलो मिलावटी पेड़ा जब्त, FDA ने मारा छापा
देश

ओवैसी के पासे से ममता के लिए सांप-छछूंदर की स्थिति, ओवैसी ने दिया साथ चुनाव लड़ने का प्रस्ताव

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में भाजपा और वाम-कांग्रेस के मोर्चे से लड़ाई की रणनीति तैयार कर रही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एआइएमआइएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने सांप-छछूंदर की स्थिति पैदा कर दी है। ओवैसी ने साथ चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दे दिया है जिसे स्वीकार करना और न करना दोनों की ममता की मुश्किलें बढ़ाएगा। यही कारण है कि ओवैसी के प्रस्ताव पर तृणमूल में चुप्पी है।

भाजपा को हराने के लिए ओवैसी ममता के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहते हैं

अभी अभी पश्चिम बंगाल से सटी बिहार विधानसभा की पांच सीटों पर जीत से उत्साहित ओवैसी ने तृणमूल के सामने पासा फेंका था। उन्होंने कहा था कि भाजपा को हराने के लिए वह ममता के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहते हैं। यह इसलिए एक पासा कहा जा सकता है क्योंकि वहां किसी घोषणा से पहले ओवैसी अपने लिए आधार तैयार करना चाहते हैं।

पश्चिम बंगाल में चार दर्जन सीटों पर अल्पंसख्यक प्रभाव 

ध्यान रहे कि 294 सीटों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा मे चार दर्जन से कुछ ज्यादा सीटें ऐसी हैं जहां अल्पसंख्यक मुस्लिम वोटर प्रभावी है। वैसे तो ममता पर अल्पसंख्यक राजनीति करने का आरोप ही चस्पा रहा है, लेकिन भाजपा के बढ़ते राजनीतिक दबाव के कारण पिछले कुछ वर्षों में वह साफ्ट हिंदुत्व की ओर बढ़ी हैं।जबकि ओवैसी हार्ड लाइन रखने वाले अल्पसंख्यक नेता हैं। बिहार में उनकी जीत का एक बड़ा कारण यही रहा। यही कारण है कि बिहार में राजग के मुकाबले सिर्फ महागठबंधन के होने के बावजूद कुछ सीटों पर बड़ी संख्या में ओवैसी की पार्टी को वोट पड़े थे।

ममता ओवैसी के साथ जाती हैं तो भाजपा करेगी वार, यदि नहीं तो ओवैसी को मिलेगा मौका 

ऐसी स्थिति में ममता के लिए परेशानी यह है कि वह कट्टर राजनीति करने वाले ओवैसी के साथ जाती हैं तो भाजपा को वार करने का और बड़ा मौका मिलेगा। अगर हाथ झिड़कती हैं तो ओवैसी को जमीन पर खुलकर खेलने का मौका मिलेगा।

ओवैसी की नजर उत्तर बंगाल पर है

यह भी ध्यान रहे कि ओवैसी की नजर मुख्यत: उत्तर बंगाल पर है और यही वह क्षेत्र है जहां लोकसभा में भी भाजपा ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था। बताया जाता है कि यही कारण है कि कुछ दिनों पहले तक परोक्ष रूप से ओवैसी को बाहरी और भ्रमित करने वाले नेता बताकर तंज करने वाली तृणमूल कांग्रेस में अभी चुप्पी है।

ममता के लिए किसी भी दल के साथ हिस्सेदारी करना मुश्किल है

वैसे भी एक दशक से पश्चिम बंगाल पर एकछत्र राज कर रहीं ममता के लिए किसी भी दल के साथ हिस्सेदारी करना बहुत मुश्किल है।

वाम-कांग्रेस के मोर्चा से ममता को और बढ़ेगी परेशानी

यह परेशानी और बढ़ेगी क्योंकि वाम-कांग्रेस का मोर्चा भी तैयार होगा जिसमें हर वर्ग के नेता है। जबकि खुद तृणमूल के कई दिग्गज साथ छोड़ चुके हैं और कई लाइन में खड़े हैं।

Related Articles

Back to top button