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रिहा अमेरिकी पत्रकार का दावा, म्यांमार सेना विरोधियों का ठिकाना जानने को कैदियों को दे रही यातना

वाशिंगटन। म्यांमार में स्थिति प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। सेना का जुल्म बढ़ता जा रहा है। अब खबर है कि म्यांमार की सेना वरिष्ठ विपक्षी सदस्यों और कार्यकर्ता नेताओं के ठिकाने जानने के लिए बंदियों को  टॉर्चर (यातना) कर रहे हैं। हाल ही में यंगून जेल से रिहा एक अमेरिकी पत्रकार ने सीएनएन को दी जानकारी में यह दावा किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 44 वर्षीय नाथन माउंग (Nathan Maung) को 15 जून को अमेरिका भेजे जाने से पहले म्यांमार में तीन महीने से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया था। नाथन ने रिहा होने के बाद बताया कि उन्होंने देश के सबसे बड़े शहर यांगून में एक गुप्त सैन्य-संचालित पूछताछ केंद्र में दो सप्ताह का समय बिताया।

बुधवार को सीएनएन से बात करते हुए माउंग ने बताया कि नरक जैसी जगह पर उनको रखा जहां पर वह खुद को मारने के लिए तैयार थे क्योंकि उन्हें यह विश्वास था कि सैनिक उनको मार देंगे।

नाथन माउंग (Nathan Maung) उन 6,200 से अधिक लोगों में से एक है, जिन्हें जनरल मिन आंग हलिंग के नेतृत्व में म्यांमार की सेना द्वारा 1 फरवरी को तख्तापलट में सत्ता पर कब्जा करने के बाद से गिरफ्तार किया गया था। एडवोकेसी ग्रुप असिस्टेंस एसोसिएशन फॉर पॉलिटिकल प्रिजनर्स (AAPP) के अनुसार, एक अधिकार समूह जो राजनीतिक कैदियों (political prisoners)पर नजर रखता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, म्यांमार ऑनलाइन समाचार साइट कामयुत मीडिया के सह-संस्थापक और प्रधान संपादक माउंग को 9 मार्च को समाचार निर्माता 39 वर्षीय हंथर न्येन के साथ गिरफ्तार किया गया था। दरअसल, सुरक्षा बलों ने उनके कार्यालय पर छापा मारा था। इसलिए यह गिरफ्तारी हुई थी।

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