ब्रेकिंग
Uttarakhand Disaster Management Model: ब्रिक्स देशों ने मानी उत्तराखंड की धाक; आपदा प्रबंधन मॉडल की ... Akshay Kumar Charity: क्या अक्षय कुमार सिर्फ पैसा कमाने के लिए करते हैं फिल्में? एक्टर ने चैरिटी के ... Manav Suthar Test Debut: टेस्ट डेब्यू पर 6 विकेट लेकर रचा इतिहास; मानव सुथार ने 18 साल का सूखा किया ... Israel-Iran Conflict: मिडिल ईस्ट में फिर छिड़ा युद्ध का खतरा; क्या नेतन्याहू की जंग की जिद बन रही है ... Gold-Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट; जानें क्या है आज का नया भाव Environmental Impact of AI: एआई की बढ़ती मांग से बढ़ रहा जल संकट; 2027 तक हालात हो सकते हैं गंभीर Kalashtami Vrat 2026: कालाष्टमी पर काल भैरव देव की विशेष पूजा; जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व Banarasi Kachori Sabji Recipe: घर पर बनाएं बनारस का प्रसिद्ध नाश्ता; कचौड़ी-सब्जी बनाने की आसान विधि MP Rajya Sabha Election 2026: तीसरी सीट पर भाजपा का दांव; महेश केवट के नामांकन के बाद बढ़ी सियासी हलच... Earthquake in Northeast: भूटान के पास 5.7 तीव्रता का जोरदार भूकंप; सिक्किम और बंगाल तक महसूस किए गए ...
देश

कोविडकाल की चुनौतियों से बिना हारे बचा रहे जिंदगियां

रायपुर। मरीजों की सेवा करना एक डॉक्टर का धर्म और जान बचाकर बीमारी से निजाद दिलाना एक डॉक्टर का कर्तव्य होता है। तभी तो डॉक्टर को धरती पर भगवान का दर्जा दिया गया है। बलौदाबाजार के सिमगा ब्लॉक के मेडिकल ऑफिसर डॉ. पारस पटेल उन्हीं में से एक हैं। यहां के विशेष कोविड अस्पताल के मरीज और उनके परिजन डॉक्टर पटेल की सेवा भावना के कायल हैं। कोविड काल की चुनौतियों से हारे बगैर डॉ. पटेल की निगरानी में उनकी टीम ने कई मरीजों की जिंदगी बचाई है, जिसकी वजह से उन्हें मरीजों से विशेष सम्मान मिल रहा है।

वर्षों से सरकारी अस्पताल और वहां की व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास जीतने का प्रयास करने वाले डॉक्टर पारस पटेल कोविड मरीजों की देखभाल करने के लिए अपने परिवार और बच्ची से कई माह दूर भी रहे। कोविड काल के प्रथम और दूसरी लहर के दौरान कई चुनौतियां भी आईं, मगर उनकी परवाह किए बिना मरीजों को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा देने में जुटे हैं।

उनकी लगन की वजह से कोविड के ज्यादातर मरीज ठीक होकर घर वापस लौटे हैं। सुहेला सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र हो या फिर सिमगा, वहां की ओपीडी और आईपीडी में अब पहले से ज्यादा मरीज इलाज के लिए पहुंचने लगे हैं। डॉ. पटेल का कहना है सरकारी अस्पतालों और वहां की उपचार व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास जीतना उनकी पहली प्राथमिकता है। “मेरी पोस्टिंग जहां भी रही वहां के अस्पताल की जितनी क्षमता है, उस मापदंड पर खरा उतरना ही मेरा प्रयास रहता है।“

पिता से मिली प्रेरणा- डॉ. पारस पटेल बताते हैं “उन्हें सरकारी अस्पताल में मरीजों की सेवा करने की प्रेरणा उनके पिता से मिली। पिता सुदूर ग्रामीण अंचल के सरकारी सिविल अस्पताल में ड्रेसर रहे हैं। पिता की सेवा भावना और मरीजों के प्रति लगाव ने मरीजों की सेवा करने के लिए उन्हें प्रेरित किया।“ सिम्स बिलासपुर से उन्होंने 2015 में एमबीबीएस और इंटर्नशिप किया।

इसके बाद उनकी पहली पोस्टिंग 2017 में सुहेला जिला बलौदाबाजार के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में हुई। वर्तमान में सिमगा में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) के रूप में पदस्थ हैं। डॉ. पटेल बताते हैं “सरकारी अस्पताल पर मरीजों का भरोसा जीतना एक बड़ी चुनौति है। सुहेला में जब उनकी पोस्टिंग थी तब वहां ओपीडी में 20-30 मरीज आते थे परंतु अस्पताल की चिकित्सकीय व्यवस्था की वजह से ओपीडी की संख्या 100 से अधिक हो गई यानि मरीजों का सरकारी अस्पताल पर विश्वास जागने का ही परिणाम है।“

बेटी और परिवार से महीनों रहे दूर- डॉ. पारस कोविड की पहली लहर के दौरान पॉजिटिव मरीजों की देखभाल करने लगे। उनकी तीन साल की बेटी है। कोविड से कहीं उनका परिवार और बेटी प्रभावित ना हो जाएं, इस डर की वजह से वह अपने परिवार से 4 माह दूर रहकर कोविड मरीजों की सेवा की। डॉ. पटेल बताते हैं “परिवार विशेषकर, बच्ची से दूर रहकर, कई बार डर, चिंता और मनोबल में कमीं का अहसास हुआ।

कोविड की दूसरी लहर जब आई तो मुझे मनोबल और हिम्मत परिवार के साथ ही चाहिए था इसलिए उनके साथ रहकर, बच्ची से दूरी बनाकर मरीजों की सेवा की।“ उन्होंने कहा “उनकी टीम के सदस्य भी काफी सक्रिय और डेडीकेटेड हैं इसलिए सिमगा से ज्यादातर मरीज ठीक होकर घर लौट सके हैं।“

कई लोगों को दी है जिंदगी- कोविड-19 से संक्रमित कई ऐसे मरीज जिनका ऑक्सीजन सेच्युरेशन लेवल काफी कम था, उन्हें भी सिमगा के कोविड अस्पताल से नई जिंदगी मिली है। इनमें सिमगा जिला बलौदाबाजार के 63 वर्षीय युगल किशोर और सिमगा अस्पताल की नर्स के 53 वर्षीय पति भी एक हैं। युगल किशोर का पूरा परिवार , उनके समधी तक कोविड संक्रमित होकर अस्पताल में भर्ती हुए।

युगल किशोर को छोड़ सभी की हालत उतनी खराब नहीं थी जो क्रमशः ठीक होते चले गए। मगर युगल किशोर का ऑक्सीजन सेच्युरेशन काफी कम होने के बावजूद 44 दिन बाद अस्पताल से स्वस्थ्य होकर लौटे। डॉ. पारस का कहना है “मरीजों की सेवा करना है औऱ चुनौतियां चाहे जैसी भी हों वह अपने मरीजों को बेहतर इलाज देने के सिद्धांत से पीछे नहीं हटेंगे।“

Related Articles

Back to top button