ब्रेकिंग
Political Reset: तमिलनाडु में सत्ता का सस्पेंस खत्म! एक्टर विजय कल बनेंगे नए मुख्यमंत्री, जानें शपथ ... Shashi Tharoor News: शशि थरूर के पर्सनैलिटी राइट्स पर दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला; डीपफेक वीडियो ... West Bengal News: शुभेंदु अधिकारी होंगे बंगाल के नए मुख्यमंत्री; अग्निमित्रा पॉल और निसिथ प्रमाणिक ब... Saharsa Mid Day Meal News: सहरसा में मिड डे मील बना 'जहर'! लगातार दूसरे दिन 80 बच्चे बीमार, बिहार शि... Mumbai Watermelon Case: तरबूज खाकर खत्म हो गया पूरा परिवार! आयशा ने 10वीं में हासिल किए 70% अंक, पर ... NCR Crime News: 30 मुकदमों वाला कुख्यात गैंगस्टर सूरज चिढ़ा गिरफ्तार; दिल्ली-NCR में फैला रखा था जरा... Bulandshahr Accident: बुलंदशहर में भीषण सड़क हादसा; बेकाबू ट्रक ने परिवार को कुचला, पति-पत्नी और 3 म... DMK vs Congress: इंडिया गठबंधन में बड़ी दरार? कनिमोझी ने स्पीकर को लिखा पत्र- 'संसद में कांग्रेस से ... Suvendu Adhikari Agenda: भाषण कम, काम ज्यादा और घोटालों पर कड़ा एक्शन; शुभेंदु अधिकारी ने बताया अपना... Allahabad High Court: सपा सांसद रामजीलाल सुमन को बड़ा झटका; सुरक्षा की मांग वाली याचिका हाईकोर्ट ने ...
देश

महाराष्ट्र और केरल में मामले कम नहीं होने से स्वास्थ्य मंत्रालय हैरान, जल्द भेज सकता है विशेषज्ञों की टीम

नई दिल्ली। केरल और महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी नहीं आने से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय हैरान और परेशान है। देश के अन्य राज्यों में कोरोना की दूसरी लहर जिस तेजी से फैली, उसी गति से कम भी होती चली गयी। इन दोनों राज्यों में पिछले तीन हफ्ते से नए केस आठ हजार से 15 हजार प्रतिदिन के बीच बने हुए हैं। इसकी मूल वजह का पता लगाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय अब इन दोनों राज्यों में वैज्ञानिक अध्ययन कराने पर विचार कर रहा है।

52 फीसद से अधिक केस केरल और महाराष्ट्र से

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पूरे देश में प्रतिदिन कोरोना के नए मामलों में 52 फीसद से अधिक केरल और महाराष्ट्र से आ रहे हैं। यही नहीं, कोरोना के कारण प्रतिदिन होने वाली मौतों में लगभग आधी महाराष्ट्र में हो रही हैं। पूरे देश में कोरोना संक्रमण दर में काफी गिरावट दर्ज की गई है। देश के 66 जिलों में ही 10 फीसद से ज्यादा संक्रमण दर रह गई है। इनमें से केरल के संख्या आठ और महाराष्ट्र में दो जिले शामिल हैं।

वजहों की हो रही पड़ताल 

अधिकारी ने कहा कि दोनों राज्यों में संक्रमण कम नहीं होने के कारणों का पता लगाया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर जल्द ही विशेषज्ञों की टीम दोनों राज्यों में भेजी जाएंगी, जो अधिक संक्रमण होने के वैज्ञानिक कारणों की तलाश करेंगी। नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप आन इम्युनाइजेशन (एनटागी) के प्रमुख डा. एनके अरोड़ा ने पिछले दिनों केरल के अधिकारियों से नए केस अधिक आने की वजह जानने की कोशिश की।

80 फीसद आबादी के संक्रमित होने का खतरा

केरल के अधिकारियों का कहना था कि उनके यहां कराए गए सीरो सर्वे में अब भी 20 फीसद लोगों में ही एंटीबाडी पाई गई है। इसका मतलब है कि 80 फीसद आबादी को अब भी संक्रमित होने का खतरा बरकरार है। केरल के अधिकारियों के अनुसार राज्य में अधिक जागरूकता होने की वजह से शारीरिक दूरी, मास्क और सफाई जैसे कोरोना व्यवहार का समुचित पालन किया जाता है और इसी वजह से अधिकांश लोग इससे अब भी बचे हुए हैं, जो धीरे-धीरे संक्रमित हो रहे हैं

अभी तक कम नहीं हुए मामले

हालांकि केरल का यह तर्क पूरी तरह से गले नहीं उतर रहा है क्योंकि दुनिया के अधिकांश देशों में तमाम सावधानी बरतने के बावजूद संक्रमण तेजी से फैला और कम हुआ है जबकि केरल में जनवरी से ही कोरोना के केस बढ़ने शुरू हो गए थे और अभी तक कम नहीं हुए हैं।

अब तक आए 61 लाख से अधिक केस

महाराष्ट्र के मामले में तो कोरोना बचाव के लिए उचित व्यवहार का तर्क भी नहीं दिया जा सकता है। पहली लहर से अब तक महाराष्ट्र में कोरोना के अब तक 61 लाख से अधिक केस आ चुके हैं और दूसरे नंबर पर 30 लाख से अधिक केस के साथ केरल है। इन दोनों राज्यों से अधिक जनसंख्या के बावजूद अन्य राज्यों में संक्रमण के मामले अपेक्षाकृत कम हैं। अधिकारी ने सही कारण पता चलने की स्थिति में कोरोना के खिलाफ लड़ाई को नई दिशा मिल सकती है।

Related Articles

Back to top button