ब्रेकिंग
पंजाब में राहत कार्य जोरो पर: पिछले 24 घंटों में 4711 बाढ़ पीड़ित सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाए गए पंजाब में आपदा के बीच सेवा की मिसाल: आम आदमी पार्टी यूथ और महिला विंग बाढ़ राहत में सबसे आगे, मुश्कि... कृषि मंत्री ने मुख्य कृषि अफ़सरों के साथ वीडियो कान्फ़्रेंस के द्वारा बाढ़ प्रभावित जिलों की स्थिति का ... जीएसटी दर तार्किकरण के तहत राज्यों की वित्तीय स्थिरता के लिए मजबूत मुआवजा ढांचा तैयार किया जाए – हरप... मुख्यमंत्री की ओर से पंजाब के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों की निगरानी के लिए उच्... बाढ़ के बीच ‘आप’ विधायक ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का स्वरूप आदर-सम्मान से सुरक्षित पहुंचाया, सीएम,... दरभंगा में PM मोदी पर अभद्र टिप्पणी करने वाला गिरफ्तार, कांग्रेस से है जुड़ा देश के लिए सिर कटा देंगे, लेकिन सत्ता के लिए समझौता नहीं करेंगे- केजरीवाल ने साधा बीजेपी पर निशाना PM मोदी पर टिप्पणी कांग्रेस-RJD की निंदनीय हरकत, राहुल गांधी माफी मांगे- भजनलाल शर्मा जम्मू में कुदरत का त्राहिमाम: बारिश से मची तबाही में 45 की मौत, उजड़े सैकड़ों आशियाने… स्कूल-कॉलेज ब...
देश

कोरोना जैसी आपात स्वास्थ्य स्थिति में किस हद तक अदालत दे सकती है दखल, सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह इस पर विचार करेगा कि कोरोना जैसी आपात स्वास्थ्य स्थिति में अदालतें कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में किस हद तक दखल दे सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना प्रबंधन मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के हर जिले में निश्चित संख्या में एंबुलेंस, आइसीयू बेड, टीकाकरण आदि के बारे में दिए गए आदेश और प्रदेश के छोटे शहरों और गांवों में स्वास्थ्य व्यवस्था को ‘भगवान भरोसे’ बताने की टिप्पणी से असहमति जताते हुए कहा कि यह देखना होगा कि ऐसे मामलों में संवैधानिक अदालतें किस हद तक दखल दे सकती हैं। कोर्ट ने कहा कि किसी के पास सौ सुझाव हो सकते हैं? तो क्या वे कोर्ट का आदेश बन सकते हैं? हमें याद रखना होगा कि हम संवैधानिक अदालत हैं।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के स्वास्थ्य व्यवस्था को ‘राम भरोसे’ बताने की टिप्पणी से जताई असहमति

न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति दिनेश महेश्वरी की पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश का जिक्र करते हुए कहा कि कितनी एंबुलेंस होंगी, कितने आक्सीजन बेड हैं, इस सब पर वे कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। पीठ ने कहा कि हम यह नहीं कह रहे कि कोई अपना सुझाव नहीं दे सकता लेकिन यह कैसे कहा जा सकता है कि स्थानीय कंपनी टीके का फार्मूला लेकर उत्पादन करें। ऐसा आदेश कैसे दिया जा सकता। पीठ ने माना कि हाई कोर्ट का आदेश अव्यवहारिक है और उस पर पालन संभव नहीं है। पिछली सुनवाई में ही सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

शीर्ष अदालत ने कहा, उद्देश्य कितना भी अच्छा हो संविधान में वर्णित शक्तियों का सम्मान होना चाहिए

बुधवार को पीठ ने कहा कि अगर हाई कोर्ट का आदेश व्यवहारिक भी होता तो भी सवाल उठता है कि क्या जो क्षेत्र कार्यपालिका के लिए चिन्हित हैं उसमें कोर्ट को दखल देना चाहिए। पीठ ने कहा कि इस मुश्किल समय में सभी को सावधानी से चलना चाहिए और यह ध्यान रखना चाहिए कि क्या किया जाए और कौन करे। पीठ ने हाई कोर्ट के आदेश पर कहा कि आपात स्थिति में मिल कर प्रयास करने की जरूरत होती है। लेकिन अच्छा इरादा किसी को दूसरे के क्षेत्राधिकार में घुसने की इजाजत नहीं देता। वैसे इस बारे में कोई समान फार्मूला नहीं हो सकता, लेकिन कुछ तय मानक होते हैं जिनके अंदर ही हर संस्था को काम करना चाहिए।

संवैधानिक अदालतें जनहित में दे सकती हैं आदेश

जस्टिस सरन ने कहा कि हम इस मामले में देखेंगे कि ऐसे मामलों में संवैधानिक अदालतें किस हद तक दखल दे सकती हैं। जस्टिस महेश्वरी ने न्यायमित्र वरिष्ठ वकील निधेश गुप्ता से कहा कि वह कोर्ट को इस सुनवाई में मदद करते हुए बताएंगे कि जब हर संस्था की सीमा और मानक तय हैं तो ऐसा कैसे हो सकता है। निधेश गुप्ता ने कहा कि संवैधानिक अदालतों को बहुत से अधिकार हैं और वे जनहित में आदेश दे सकती हैं। गुप्ता ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल किए गए ताजा हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने कोरोना की रोकथाम और बचाव के लिए उठाए जा रहे कदमों का ब्योरा हलफनामे में दिया है। पीठ ने कहा कि लेकिन राम भरोसे की टिप्पणी को कैसे सही ठहराया जा सकता है।

कोर्ट ने मामले को 12 अगस्त को फिर सुनवाई पर लगाने का आदेश देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह अगली तारीख पर इस मामले में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए सभी आदेशों को संलग्न करके कोर्ट में पेश करें। कोर्ट देखेगा कि हाईकोर्ट इस मामले में अब क्या कर रहा है। पीठ ने कहा कि वह फिलहाल हाईकोर्ट की सुनवाई पर रोक नहीं लगा रहे हैं। मालूम हो कि हाईकोर्ट ने गत 17 मई को कोरोना प्रबंधन मामले में सुनवाई करते हुए बहुत से आदेश दिये थे और स्वास्थ्य व्यवस्था के राम भरोसे होने की टिप्पणी भी की थी जिसके खिलाफ प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट मे याचिका दाखिल की है।

Related Articles

Back to top button