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छत्तीसगढ़ सरकार की सक्रियता और संवेदनशीलता से किसानों के मन में भी जगी उम्मीद

किसान मानसून आते ही खेतों में पसीना बहाने लगता है। वह बीजों की रोपाई, फसल की निंदाई-कोडाई, खाद-पानी देने से लेकर कटाई, मिंजाई और उत्पाद को मंडी तक ले जाने, उसे बेचने के लिए लगातार श्रम करता रहता है। इस कार्य में उसे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। फसलों को तैयार करने में जो परेशानी होती है किसान उसे झेल जाता है, लेकिन उससे अधिक परेशानी बेचने की प्रक्रिया के दौरान होती है।
मसलन पर्ची कटाने के लिए लंबी लाइन में लगना, बारदाने की समस्या आदि से जूझता है। बीते वर्ष बारदानों का संकट खड़ा हुआ तो इसकी कालाबाजारी शुरू हो गई थी। किसान बारदाने से वंचित रह गए थे। धान की तौलाई कराने में देरी से भी वह परेशान होता है। इन समस्याओं को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है। वह अभी से प्रयास कर रही है कि किसान को कोई दिक्कत न हो।
राज्य सरकार के निर्देश पर गिरदावरी के लिए न केवल पटवारी, बल्कि कलेक्टर भी खेतों तक यह जानने के लिए पहुंच रहे हैं कि किस किसान ने कितने रकबे में कौन-सी फसल बोई है। यह जानकारी दस्तावेज में दर्ज कराई जा रही है। रिपोर्ट तैयार करने में कोई गड़बड़ी न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। साथ ही आगे चलकर मंडी में किसान को परेशानी न हो और वह अपना उत्पाद आसानी से बेचे, उसके खाते में समय पर राशि पहुंचे और वह अपना जीवन स्तर सुधार सके, इसका भी सरकार को पूरा ध्यान है। राज्य में वर्ष 2020-21 में 90 लाख टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया था। इसके लिए करीब पांच लाख गठान (एक गठान में 500 नग) बारदाने की जरूरत थी। धान की खरीदी राज्य सरकार केंद्र सरकार की एजेंसी के रूप में करती है।
धान मिलिंग के बाद राज्य अपने पीडीएस की जरूरत का चावल राज्य के गोदामों में रख लेती है। बाकी केंद्र से मिली सहमति के अनुसार एफसीआइ के गोदामों में जमा कर देती है। धान खरीदी पर खर्च हुई राशि एक वर्ष में केंद्र सरकार धीरे-धीरे राज्य को लौटा देती है। पिछले साल से सबक लेकर इस बार राज्य सरकार सतर्क है। यही वजह है सरकार ने इस साल धान खरीदी की तैयारी को लेकर मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक बुलाई है। इस बैठक में धान खरीदी में बारदाने समेत आने वाली दूसरी समस्याओं पर चर्चा की है।
हालांकि धान खरीदी की तिथि तय नहीं की गई है, क्योंकि फसल अभी खेतों में है और तैयार भी नहीं हुई है। सरकार इस पर लगातार नजर रखे हुए है। मंत्रिमंडलीय उपसमिति की कई दौर की बैठक होनी है। सरकार की सक्रियता और संवेदनशीलता से किसानों के मन में भी यह उम्मीद जागी है कि इस बार समस्याएं नहीं आएंगी।

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