मानव-पशु संघर्षो से निपटने के लिए जन भागीदारी व स्थानीय ज्ञान जरूरी : भूपेंद्र यादव

नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने गुरुवार को कहा कि पशु संरक्षण तथा मानव-पशु संघर्षो से निपटने के लिए जनभागीदारी और स्थानीय क्षेत्रों का ज्ञान आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमें उन क्षेत्रों की पहचान करने की जरूरत है जहां मानव-पशु संघर्ष होते हैं। हमें इन मुद्दों को हल करने के लिए नीति तैयार करते समय स्थानीय क्षेत्रों का दौरा करना होगा।
मंत्री ने एक कार्यक्रम में यह बात कही जिसमें उन्होंने हाथी और बाघों की आबादी के आकलन के लिए अखिल भारतीय समकालिक पद्धति जारी की। यादव ने कहा कि शेर संरक्षण का मुद्दा आने के बाद गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने छह-सात दिनों तक गिर में डेरा डाला था।
उन्होंने कहा, ‘एशियाई शेर अगर कहीं भी सुरक्षित है तो वे गिर (गुजरात) में हैं और इसका श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को जाता है, क्योंकि उन्होंने जमीनी स्तर पर काम किया।’
मंत्री ने कहा कि पशु संरक्षण जमीनी स्तर पर काम किए बिना नहीं हो सकता क्योंकि केवल तकनीक के जरिये यह मुमकिन नहीं है। जनभागीदारी और स्थानीय क्षेत्र का ज्ञान इसके लिए आवश्यक है।
जलवायु परिवर्तन की वैश्विक समस्या से निपटने के लिए उठाए गए कई कदम
बता दें कि अभी हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के पैनल की छठी आकलन रिपोर्ट (एआर6) का स्वागत करते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने ट्वीट किया था कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने जलवायु परिवर्तन की वैश्विक समस्या से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं और आर्थिक विकास से अपने उत्सर्जन को अलग करने के रास्ते पर चल पड़ा है। आइपीसीसी की रिपोर्ट इसका प्रमाण है।






