ब्रेकिंग
Physical Intelligence in India: भारत में आई नई तकनीक, MEIL और Analog की साझेदारी से बदलेगा इंफ्रास्ट... Bharat Tiwari Encounter: भोजपुर पुलिस पर उठे सवाल, हत्या के नामजद आरोपी अधिकारी को मिली नई जिम्मेदार... Voter List Revision: मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) पर मौलाना अरशद मदनी ने जताई चिंता, प्रक्रिया पर ... Karnataka High Court: वकील के साथ मारपीट करने वाली महिला PSI पर कोर्ट सख्त, लगाया 1 लाख का जुर्माना Supaul News: बिहार के सुपौल में मानवता शर्मसार, 1 साल तक कमरे में बंद रही नाबालिग बच्ची; मां को बेचन... Supreme Court PIL: डिजिटल कंटेंट के लिए रेगुलेटरी सिस्टम की मांग, '₹370 की बिरयानी' विवाद पर सुप्रीम... CM Dr. Mohan Yadav in Seoni: सिवनी को मिली 494 करोड़ की सौगात, सीएम यादव ने बांटे कोदो-कुटकी बोनस Jaunpur News: दूल्हा आजाद बिंद हत्याकांड के एक लाख के इनामी आरोपी भोले राजभर ने किया सरेंडर Monsoon Update: 'अल नीनो' के खतरे पर पीएम मोदी सख्त, राज्यों को पानी बचाने और आपदा प्रबंधन के लिए कि... Delhi Green Drive Portal: दिल्ली को 'ग्रीन और क्लीन' बनाने की बड़ी पहल, CM रेखा गुप्ता ने किया पोर्टल...
देश

फर्जी बीमा दावा करने वाले वकीलों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से सुप्रीम कोर्ट नाराज

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल और वर्कमैन कंपनसेशन एक्ट के तहत फर्जी दावे से बीमा कंपनियों को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने वाले वकीलों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर बार काउंसिल आफ उत्तर प्रदेश को फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने गंभीर मामले में अधिवक्ताओं पर ही आरोप है।

जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि यह यूपी बार काउंसिल की ओर से उदासीनता और असंवेदनशीलता को दर्शाता है। कोर्ट ने बार काउंसिल के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा को इस पर गौर करने के लिए कहा है।

पीठ ने कहा कि ऐसे में यह राज्य की बार काउंसिल का कर्तव्य है कि वह मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल और वर्कमैन कंपनसेशन एक्ट के तहत फर्जी दावे दायर करने वाले अधिवक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करे। कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि बार काउंसिल आफ स्टेट कार्रवाई करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है और इसलिए अब बार काउंसिल आफ इंडिया को कदम उठाना होगा और गलती करने वाले अधिवक्ताओं के खिलाफ उचित कार्रवाई करनी होगी।

शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित 7 अक्टूबर 2015 के आदेश के अनुपालन में गठित एक विशेष जांच दल (एसआईटी) को भी 15 नवंबर को या उससे पहले सीलबंद लिफाफे में जांच के संबंध में रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने यूपी सरकार की ओर से दायर एक पूरक हलफनामे पर ध्यान दिया जिसमें कहा गया था कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित 7 अक्टूबर 2015 के आदेश के अनुपालन में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था।

पीठ ने कहा कि एसआइटी को कुल 1,376 शिकायतें/संदिग्ध दावों के मामले प्राप्त हुए हैं। यह कहा गया है कि एसआइटी द्वारा प्राप्त संदिग्ध दावों के कुल 1,376 मामलों में से अब तक संदिग्ध दावों के 246 मामलों की जांच पूरी की जा चुकी है और प्रथम दृष्टया अपराध पाए जाने के बाद कुल 166 आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ संज्ञेय अपराध जिसमें याचिकाकर्ता, अधिवक्ता, पुलिस कर्मी, डाक्टर, बीमा कर्मचारी, वाहन मालिक आदि शामिल हैं।

शीर्ष अदालत ने अपने 5 अक्टूबर के आदेश में इस दलील का भी संज्ञान लिया कि अब तक दर्ज कुल आपराधिक शिकायतों में से 33 आपराधिक मामलों की जांच पूरी हो चुकी है और आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने की कानूनी प्रक्रिया चल रही है। शीर्ष अदालत ने कहा कि 2015 से बीमा कंपनियों को करोड़ों रुपये के नुकसान से संबंधित मामलों की करने के लिए इलाहाबाद एचसी द्वारा पारित आदेश के अनुसार एसआइटी का गठन किया गया था और इसके बावजूद जांच आज तक पूरा नहीं किया गया है। पीठ ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एसआईटी ने भी त्वरित कार्रवाई नहीं की और जांच पूरी नहीं की।

Related Articles

Back to top button