ब्रेकिंग
बिलासपुर-बेंगलुरु साप्ताहिक एक्सप्रेस का नियमित परिचालन शुरू; रायपुर, दुर्ग, गोंदिया होकर चलेगी ट्रे... रायपुर सेंट्रल जेल: रक्षाबंधन पर बंदियों से मिल सकेंगी बहनें; 100 ग्राम मिठाई की अनुमति, मोबाइल-पर्स... रायपुर में ₹16 लाख के सरकारी राशन का गबन: जोरा में राशन दुकान संचालक टोपेश्वर साहू गिरफ्तार, 389 क्व... छत्तीसगढ़ राज्य खेल अलंकरणों की घोषणा: 82 खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को मिलेगा सम्मान मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति का मामला गरमाया: नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल को लिखा पत्र सागर-रीवा-शहडोल संभाग में मूसलाधार बारिश की चेतावनी; टीकमगढ़ में नाले उफान पर, भोपाल में सीजन कोटे क... इंदौर में रेलवे में TTE बनवाने के नाम पर चूड़ी कारोबारी से ₹18.50 लाख की ठगी: पत्नी और ससुराल पक्ष प... इंदौर के गाड़ी अड्डा क्षेत्र में अचानक धंसी सड़क: वाल्मीकि बस्ती में हुआ 20 फीट गहरा गड्ढा, वाहन चाल... खंडवा के हरसूद में चरवाहों और पारदी समाज के बीच खूनी संघर्ष: 24 भेड़ों की मौत, 3 लोग घायल इंदौर में रक्षाबंधन पर बसों की मनमानी पर परिवहन विभाग का शिकंजा: ₹1.24 लाख जुर्माना वसूला, 2 बसें जब...
देश

फर्जी बीमा दावा करने वाले वकीलों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से सुप्रीम कोर्ट नाराज

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल और वर्कमैन कंपनसेशन एक्ट के तहत फर्जी दावे से बीमा कंपनियों को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने वाले वकीलों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर बार काउंसिल आफ उत्तर प्रदेश को फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने गंभीर मामले में अधिवक्ताओं पर ही आरोप है।

जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि यह यूपी बार काउंसिल की ओर से उदासीनता और असंवेदनशीलता को दर्शाता है। कोर्ट ने बार काउंसिल के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा को इस पर गौर करने के लिए कहा है।

पीठ ने कहा कि ऐसे में यह राज्य की बार काउंसिल का कर्तव्य है कि वह मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल और वर्कमैन कंपनसेशन एक्ट के तहत फर्जी दावे दायर करने वाले अधिवक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करे। कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि बार काउंसिल आफ स्टेट कार्रवाई करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है और इसलिए अब बार काउंसिल आफ इंडिया को कदम उठाना होगा और गलती करने वाले अधिवक्ताओं के खिलाफ उचित कार्रवाई करनी होगी।

शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित 7 अक्टूबर 2015 के आदेश के अनुपालन में गठित एक विशेष जांच दल (एसआईटी) को भी 15 नवंबर को या उससे पहले सीलबंद लिफाफे में जांच के संबंध में रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने यूपी सरकार की ओर से दायर एक पूरक हलफनामे पर ध्यान दिया जिसमें कहा गया था कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित 7 अक्टूबर 2015 के आदेश के अनुपालन में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था।

पीठ ने कहा कि एसआइटी को कुल 1,376 शिकायतें/संदिग्ध दावों के मामले प्राप्त हुए हैं। यह कहा गया है कि एसआइटी द्वारा प्राप्त संदिग्ध दावों के कुल 1,376 मामलों में से अब तक संदिग्ध दावों के 246 मामलों की जांच पूरी की जा चुकी है और प्रथम दृष्टया अपराध पाए जाने के बाद कुल 166 आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ संज्ञेय अपराध जिसमें याचिकाकर्ता, अधिवक्ता, पुलिस कर्मी, डाक्टर, बीमा कर्मचारी, वाहन मालिक आदि शामिल हैं।

शीर्ष अदालत ने अपने 5 अक्टूबर के आदेश में इस दलील का भी संज्ञान लिया कि अब तक दर्ज कुल आपराधिक शिकायतों में से 33 आपराधिक मामलों की जांच पूरी हो चुकी है और आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने की कानूनी प्रक्रिया चल रही है। शीर्ष अदालत ने कहा कि 2015 से बीमा कंपनियों को करोड़ों रुपये के नुकसान से संबंधित मामलों की करने के लिए इलाहाबाद एचसी द्वारा पारित आदेश के अनुसार एसआइटी का गठन किया गया था और इसके बावजूद जांच आज तक पूरा नहीं किया गया है। पीठ ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एसआईटी ने भी त्वरित कार्रवाई नहीं की और जांच पूरी नहीं की।

Related Articles

Back to top button