ब्रेकिंग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुणे को दी 21,800 करोड़ की मेट्रो परियोजनाओं की सौगात, हिंजेवाड़ी से शि... बॉम्बे हाईकोर्ट का बीएमसी को कड़ा निर्देश, अभिनेत्री दीया मिर्जा का हटाया गया वीडियो दोबारा सोशल मीड... अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी में सियासी घमासान, छह वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्र... जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बड़ा भूचाल, सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे से उमर अब्दुल्ला क... दक्षिण ब्लॉक होगा पूरी तरह खाली, थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और डीजीएमओ का कार्यालय नए शौर्य भवन में... अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी में सियासी हलचल तेज, कोर कमेटी की बैठक में पार्थ पवार के फैसलों पर ज... आगरा के कमला नगर में पीवीसी कारोबारी के घर बड़ी चोरी, तीन नकाबपोश बदमाश 70 लाख के जेवर ले उड़े गोवंश तस्करी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, वाहन जब्ती को अवैध करार देकर सरकार पर लगाया ... बिहार में नदियों की गाद से बनेंगे नेशनल हाईवे, NHAI और राज्य सरकार के बीच हुआ बड़ा समझौता Health and Nutrition Tips Protein Products Market: बाजार में बिकने वाले प्रोटीन प्रोडक्ट्स खरीदने से...
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में एनीमिया गंभीर स्वास्थ्य चुनौती

प्रदेश में एनीमिया यानी खून की कमी एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है। इसे हराने के लिए जरूरी है कि समय रहते इसकी जानकारी मिल जाए। इसके लिए जांच जरूरी है। जांच हीमोग्लोबिन मीटर के बिना हो नहीं सकती। सिर्फ लक्षणों के आधार पर इलाज शुरू कर देना डाक्टरों और अस्पतालों को झोलाछाप डाक्टरों की श्रेणी में ले आने के लिए पर्याप्त है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में एनीमिया के खिलाफ सक्रिय अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन हीमोग्लोबिन मीटर खरीदी का टेंडर निरस्त करना सरकार की नीति और क्रियान्वयन में विरोधाभास को दर्शाता है। यह गंभीर समस्या है कि टेंडर न होने के कारण महिलाओं और बच्चों की रक्त अल्पता संबंधी जांच रुकी हुई है। इसके लिए सख्ती जरूरी है, ताकि ऐसी विसंगतियों को बढ़ावा न मिलने पाए। सोचिए, जांच और चिकित्सा के अभाव में कितनी महिलाओं और बच्चों की जान चली जाती है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार प्रदेश में जहां वर्ष 2016 में 15 से 49 आयु वर्ग की 47 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित थीं, वहीं वर्तमान में 61 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। वहीं 51 फीसद गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित रहती हैं। राज्य सरकार के अथक प्रयासों के बावजूद पिछले पांच वर्षों में एनीमिया से पीड़ित महिलाओं की दर में लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो राज्य की मातृ एवं शिशु मृत्यु दर बढ़ाने में एक महती भूमिका निभा सकती है। स्वास्थ्य विभाग की मानें तो एनीमिया को दूर करने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों में महिलाओं की स्क्रीनिंग, इलाज और दवाएं जैसे आयरन, विटामिन की गोलियां निश्शुल्क बांटी जा रही हैं

निरस्तीकरण का पहला अर्थ यह हो सकता है कि अस्पतालों के पास पर्याप्त मात्रा में मीटर हैं। दूसरा अर्थ यह कि प्रशासन की तरफ से लापरवाही बरती जा रही है। पहला कारण कुछ संदिग्ध लगता है, क्योंकि जनप्रतिनिधि के साथ-साथ सीजीएमएससी के संचालक ने सवाल उठाए हैं। आशा की जानी चाहिए कि टेंडर जल्द कराया जाएगा और एनीमिया जांच कार्य को गति दी जाएगी।

Related Articles

Back to top button