अब दवा पर भी महंगाई का मारः पैरासिटामॉल, हार्ट, ब्लडप्रेशर, शुगर समेत 750 से ज्यादा दवाइयां 11% हुई महंगी, जानिए जेब पर कितना असर पड़ेगा

भोपाल। अब दवा पर भी महंगाई का मार पड़ी है। देश में अप्रैल से बनेन वाली हार्ट, ब्लडप्रेशर, शुगर, थायराइड समेत 750 से ज्यादा दवाइयां के दाम बढ़ गए हैं। दवाइयों के दाम में 11 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। फार्मा प्राइसिंग अथॉरिटी ने क़ीमतें बढ़ाने की घोषणा कर दी है। हालांकि दवाइयों का नया लॉट को बाज़ार में आने में लगेगा दो से तीन महीने का समय लगेगा। मटेरियल की सप्लाय में आई कमी और ईंधन के दाम बढ़ने से कम्पनी ने किया दाम बढ़ाने का फ़ैसला लिया है।
नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NPPA-National Pharmaceutical Pricing Authority of India) ने शुक्रवार को कैलेंडर वर्ष 2021 के थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में 2020 की इस अवधि की तुलना में 10.7 प्रतिशत बदलाव की घोषणा की। इसका मतलब यह है कि अधिकांश सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली आवश्यक दवाओं की सूची में लगभग 800 दवाओं की कीमतों में 1 अप्रैल से 10.7 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।
जानकारों के अनुसार जिन परिवारों में ब्लडप्रेशर, हार्ट से संबंधित मरीज हैं। ऐसे में दो लोगों की दवाइयों पर प्रतिमाह छह हजार का औसत खर्च आता है। उन्हें अब 650 से 700 रुपए ज्यादा खर्च करना होंगे। दवा कारोबारियों का कहना है कि दो साल बाद रेट बढ़े हैं।
इन दवाओं के बढ़ेंगे दामअब बुखार, संक्रमण, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, त्वचा रोग और एनीमिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के दाम बढ़ जाएंगे। इसमें पेरासिटामोल, फेनोबार्बिटोन, फ़िनाइटोइन सोडियम, एज़िथ्रोमाइसिन, सिप्रोफ्लोक्सासिन हाइड्रोक्लोराइड और मेट्रोनिडाज़ोल जैसी दवाएं शामिल हैं। ़
फार्मा इंडस्ट्री दाम बढ़ाने की कर रही थी मांग कोरोना महामारी के बाद से फार्मा इंडस्ट्री दवाओं की कीमत बढ़ाए जाने की लगातार मांग हो रही थी। इसके बाद शेड्यूल ड्रग्स के लिए कीमतों में 10.7 प्रतिशत बढ़ोत्तरी की मंजूरी दी गई है। शेड्यूल ड्रग्स में आवश्यक दवाएं शामिल होती हैं और इनकी कीमतों पर नियंत्रण होता है। इनके दाम बगैर अनुमति नहीं बढ़ाए जा सकते हैं।
