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मध्यप्रदेश

युवाओं को अब मिलने लगा सरकारी नौकरियों का संबल

भोपाल । मप्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जो संकल्प लिया है, उसके तहत बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार के अवसर के साथ ही सरकारी नौकरियां दी जा रही हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीते साल 83 हजार 119 लोगों को नौकरियां दिलाई गई हैं, जिनमें सामान्य और ओबीसी वर्ग के युवा भी शामिल हैं। वहीं प्रदेश में छह साल बाद करीब 25 हजार एससी और एसटी वर्ग के लोगों को नौकरियां मिली है। इनमें अनुसूचित जाति वर्ग के 16,572 और जनजाति वर्ग के 8,789 लोग शामिल हैं।गौरतलब है कि प्रदेश में बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने रोजगार मेलों का आयोजन शरू कर दिया है। सरकारी दावों के अनुसार, इस साल के पहले तीन महीनों में 13 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार दिया गया है। वैसे मप्र में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 30 लाख 23 हजार से अधिक है। जानकारी के अनुसार करीब 6 हजार आरक्षक और 20 हजार शिक्षकों सहित विभिन्न विभागों में की गई भर्तियों की वजह से नौकरी मिलने वाले युवाओं की संख्या 80 हजार को पार कर गई है। वैसे निजी क्षेत्र में भी सरकार ने युवाओं को नौकरियां दिलाने का प्रयास किया है।

सरकारी नौकरी के लिए हर साल लाखों पंजीयन
मप्र में बेरोजगारी की समस्या का आकलन इसी से लगाया जा सकता है कि यहां हर साल 4 लाख से लेकर 17 लाख तक युवा सरकारी नौकरियां पाने के लिए विभिन्न रोजगार कार्यालयों में अपना पंजीयन कराते हैं। वर्तमान में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 30 लाख 23 हजार से अधिक है और इनमें शिक्षित बेरोजगारों की संख्या 28 लाख 74 हजार है। आयुक्त रोजगार कार्यालय से मिले आकड़ों के अनुसार 2015 में नौकरी के लिए 4.23 लाख पंजीयन कराए गए, जिसमें से मात्र 334 को ही नौकरी मिली। इसी तरह 2016 में 3.45 लाख पंजीयन में से 129 को नौकरी मिली, 2017 में 17.05 लाख पंजीयन में से 109 को नौकरी मिली, 2018 में 7.47 लाख पंजीयन में से 054 को नौकरी मिली, 2019 में 8.46 लाख पंजीयन में से 360 को नौकरी मिली, 2020 में 6.11 लाख पंजीयन में से  3,605 को नौकरी मिली वहीं 2021 में 12.36 लाख पंजीयन में से 83,119 को नौकरी मिली। वैसे तो सरकार 2002- 03 से बैकलॉग के पद भरने के लिए विशेष अभियान भी चला रही है।

कांग्रेस पूरा नहीं कर पाई वचन
वर्ष 2018 में बनी कांग्रेस सरकार ने अपने वचन पत्र में बेरोजगारों को 4 हजार रुपए महीने भत्ता देने का वादा किया था। लेकिन सरकार बनने के बाद कांग्रेस भी बेरोजगारों को भत्ता नहीं दे सकी। कांग्रेस सरकार में 2019 में केवल 360 लोगों को सरकारी नौकरी मिल सकी थी। लेकिन बीते छह सालों में सिर्फ 4,591 लोगों को ही नौकरी से लगाया जा सका है, जबकि सरकारी विभागों में बैकलॉग के रिक्त पदों की संख्या करीब 18 हजार से अधिक है। लेकिन सरकार ने पिछले साल बेरोजगारों को नौकरी दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाया और उसका ही परिणाम है कि 83 हजार 119 युवाओं को नौकरी से लगाया गया।

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