मेरे पास सिर्फ एक मकान, कहीं एक इंच जमीन नहीं : रघुवर दास

खास बातें
- रघुवर बोले, हिम्मत है तो खुद को झारखंडी बताने वाले सारे नेता करें अपनी जमीन-संपत्ति का खुलासा
- मेरी सरकार में नहीं चली दलालों-बिचौलियो की, यही लोग मेरा करते हैैं विरोध
- मेरी सरकार बेदाग, हवा में आरोप लगाने वालों के पास तथ्य हैं तो आएं मेरे सामने
- हासिल करेंगे 65 प्लस का लक्ष्य, जनता है स्वामी उसी को लेना है फैसला
आजसू से टूटी दोस्ती, अपनी ही कैबिनेट के एक मंत्री से दो-दो हाथ, विपक्ष के जल, जंगल, जमीन लूटने के आरोप सहित तमाम मुद्दों पर मुख्यमंत्री बेबाक राय रखते हैं। वह स्पष्ट कहते हैं, पांच साल जनता की सेवा की है और जनता ही मालिक है। झारखंड को लूटने वाले एकत्र हो गए हैं, लेकिन उनकी दाल गलने वाली नहीं है। झारखंड राज्य के गठन से लेकर अब तक हुए बदलाव से वे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैैं। कहते हैं, झारखंड पर लगे गरीबी के कलंक को मिटाए बगैर चैन से नहीं बैठेंगे। एलान करते हैैं कि उनके पास जमशेदपुर में सिर्फ एक मकान है। इसके अलावा पूरे झारखंड में एक इंच जमीन नहीं है और सवाल दागते हैं, खुद को झारखंडियों का मसीहा बताने वाले भी यह सार्वजनिक कर दें कि उनके पास कितनी जमीन और मकान है? चुनावी व्यस्तता के बीच
मुख्यमंत्री रघुवर दास के साथ तमाम मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की.
सवाल : विपक्ष का आरोप है कि सरकार आदिवासियों की जमीन छीन रही है। आपकी सरकार पर तमाम दाग हैं।
सीएम का जवाब : विपक्ष को झूठ और भ्रम फैलाने से बाज आना चाहिए। उनको बताना चाहिए कि सरकार ने किसकी जमीन छीनी है? किसी के पास इसका सबूत है तो आकर मुझे बताए। यही काम रह गया है कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा का। 2014 में जनता ने इन्हें नकार दिया था। अब इनकी दाल गलने वाली नहीं है। यह गोला का रहने वाला सोरेन परिवार दुमका, साहिबगंज, गोड्डा में कैसे जमीन का मालिक बन गया। रांची में दारू पिलाकर एक आदिवासी लालू उरांव की जमीन ले ली। उसपर सोहराय भवन बना दिया। सबकी जांच चल रही है।
मेरे पास सिर्फ एक मकान है जमशेदपुर में, जाकर देख लीजिए। इसके अलावा पूरे झारखंड में कहीं एक इंच जमीन नहीं है। खुली चुनौती देता हूं सबको। खुद को झारखंड के आदिवासियों का मसीहा बताने वाले नेता भी अपनी संपत्ति सार्वजनिक कर दें, सब खुद-ब-खुद दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा। मैं दावा करता हूं, हेमंत परिवार समेत किसी की इतनी हिम्मत नहीं है, क्योंकि ऐसा करेंगे तो जनता के सामने बेनकाब हो जाएंगे।
सवाल : भाजपा और आजसू ने पांच साल मिलकर सरकार चलाई। चुनाव में दोनों दलों के बीच तालमेल नहीं होने की क्या वजह रही? क्या चुनाव के बाद तालमेल के विकल्प खुले हैैं?
सीएम का जवाब : भाजपा गठबंधन धर्म का पालन करती है। हमने बहुत कोशिश की, लेकिन हमारे गठबंधन के साथी दल आजसू पार्टी की इच्छा ज्यादा सीटों पर लडऩे की थी। इसलिए उन्होंने ये रास्ता चुना। लोकतंत्र में सभी को इसका अधिकार है। अब, जनता इस पर निर्णय लेगी। लोकतंत्र में जनता ही असली मालिक है। रही बात चुनाव के बाद के विकल्प की, तो राजनीति में सारे दल अपने विकल्प खुले रखते हैैं। भाजपा को इसकी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। हम 65 प्लस सीटों का अपना लक्ष्य प्राप्त करेंगे।
सवाल : कहा जा रहा है कि आपने अपनी पसंद-नापसंद के आधार पर टिकट बांटे? मंत्री सरयू राय का टिकट काटा?
सीएम का जवाब : यह सरासर गलत आरोप है। भाजपा बहुत बड़ी पार्टी है। भाजपा में एक व्यक्ति निर्णय नहीं लेता। चुनाव समिति को तीन-तीन नाम का पैनल बनाकर यहां से भेजा गया था। एक-एक नाम पर चुनाव समिति ने चर्चा की। समीकरण पर बात हुई। आपने देखा होगा कि बहुत सीट पर प्रत्याशियों का नाम पेंडिंग था। कई स्तर पर सर्वे कराया गया। पूरी तरह से जीत को लेकर निश्चिंत होने के बाद ही उम्मीदवार के नाम की घोषणा की गई। सरयू राय का नाम तो पैनल में ही नहीं था। लोकतंत्र में सबको अधिकार है चुनाव लडऩे का। दिल्ली का रहने वाला भी आकर चुनाव लड़ रहा है मेरे क्षेत्र से।
सवाल : आपकी स्पष्टतवादिता को कार्यकर्ता गुस्से के रूप में ले लेते हैं, आरोप है कि कार्यकर्ता इससे नाराज हैं?
सीएम का जवाब : देखिए भैया, मैैं राजनीति में झूठ बोलने के लिए नहीं आया। कार्यकर्ता मेरा नेचर जानते हैैं। मैैं स्पष्ट बोलता हूं भी तो यही वजह है कि मैैं किसी से झूठ नहीं बोलता। मेरे कार्यकर्ता मुझे अच्छी तरह जानते और समझते हैैं। वे मुझसे प्यार करते हैैं। वे संगठन की पूंजी हैैं। कार्यकर्ताओं के बल पर ही भाजपा खड़ी हुई है। यहां कोई वंशवाद नहीं चलता। मैैं मजदूर था, मेरे पिता मजदूर थे। मैने कभी नहीं सोचा था कि एमएलए बनूंगा। आज मुख्यमंत्री के पद पर हूं तो संगठन की बदौलत। संगठन से बढ़कर कुछ नहीं है।






