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मध्यप्रदेश

तीन दिवसीय श्रुत आराधना महोत्सव 24 को निकलेगी शोभायात्रा

भोपाल। श्रुत पंचमी जैनों का एक महापर्व है। इस दिन ग्रंथराज श्री षट खण्डागम जी की विशेष आराधना, पूजा विधान और शोभायात्रा निकाली जाती है। इस विशेष पर्व के मौके पर दिगंबर जैन समाज अशोका गार्डन द्वारा तीन दिवसीय श्रुत आराधना महोत्सव मनाया जा रहा है। महोत्सव के पहले दिन सोमवार को आचार्य छत्तीसी विधान होगा। दूसरे दिन मंगलवार को श्रुतस्कंध विधान किया जाएगा और तीसरे दिन 24 मई को श्रुत पंचमी को भव्य जिनवाणी शोभायात्रा निकाली जाएगी। महोत्सव की पूर्व तैयारियों के लिए रविवार को मुनि निर्दोष, निर्लोभ, निरुपम सागर महाराज के सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी अविनाश भैया ने पात्र चयन आदि क्रियाएं कराईं। तीन दिवसीय महोत्सव के लिए सौधर्म इंद्र शिखरचंद जैन, कुबेर इंद्र देवेंद्र कुमार, ईशान इंद्र विनय कुमार, माहेंद्र इंद्र जितेंद्र जैन चक्रवर्ती, भरत के लिए सचेंद्र जैन गुड्‌डू और बाहुबली के लिए शरद अजमेरा ने अपने नाम समिति को भेंजे हैं।

रविवार को मुनि निर्लोभ सागर महाराज ने कहा कि श्रुत पंचमी जैनों का महान पर्व है। इस दिन जैनधर्म के महान ग्रंथ श्री षटखंडागम जी की रचना हुई थी। श्रुत की आराधना के लिए देवों ने महाआरती, पूजा विधान कर बड़ा उत्सव मनाया गया। वहीं मुनि निर्दोष सागर जी ने कहा कि सतयुग में श्रुत को लिपिबद्व करने की जरूरत नहीं थी, क्योंकि उस समय लोगों की स्मृति बहुत तेज होती थी। वह किसी बात को भूलते नहीं थे, लेकिन पंचम काल यानी कलियुग की शुरुआत होते ही मनुष्यों की स्मृति कम होने लगी तब श्रुत को लिपिबद्व करने की जरूरत पड़ी। अब मनुष्यों की स्मृति कम होने लगी और वे भूलने लगे। करीबन 2000 वर्ष पूर्व वीर निर्वाण संवत 614 में आचार्य धरसेन स्वामी महाराज जो श्रुत के ज्ञाता थे। उन्होंने अपना जीवन अल्प जाना, तब श्रुत की रक्षार्थ उन्होंने महिमानगरी में एकत्रित मुनिसंघ के पास एक पत्र भेजा। तब मुनि संघ ने पत्र पढ़ कर दो मुनियों को गिरनार भेज दिया। वे मुनि विद्या ग्रहण करने में तथा उनका स्मरण रखने में समर्थ, अत्यंत विनयी, शीलवान तथा समस्त कलाओं मे पारंगत थे।

स्वर विज्ञान द्वारा थायराइड का उपचार, 150 को मिला लाभ

श्रुत आराधना पर्व के मौके पर रविवार को निश्शुल्क थायराइड उपचार शिविर लगाया गया। जिसमें अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वान श्री राजेंद्र जैन इंदौर ने स्वर विज्ञान के माध्यम से थायराइड का उपचार किया। सुबह छह बजे शुरू हुआ शिविर नाै बजे तक चला जिसमें करीबन 150 महिला पुरुषों को लाभ उठाया। इस विधा के माध्यम अब तक 40 हजार लोगों का उपचार कर चुके हैं। उनका नाम गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में भी दर्ज है। शिविर का आयोजन अरुण सारणी, भारती जैन, जयदीप भैया, शरद अजमेरा, सचेंद्र जैन के सहयोग से संपन्न हुआ।

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