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राजस्थान

उदयपुर की ‘कातिल शबाना’- बुर्के में रॉड छिपाकर लाई, चेहरा देखते ही कर दिया अटैक; डबल मर्डर के जुर्म का सनसनीखेज खुलासा

उदयपुर। उदयपुर शहर की पॉश कॉलोनी की एक कोठी में बोहरा समुदाय की दो बुजुर्ग वृद्ध बहनों की हत्या की आरोपी महिला को जेल भेज दिया गया। चार दिन की पुलिस हिरासत के बाद उसे मंगलवार को अदालत में पेश किया गया।

पुलिस जांच से पता चला कि वह एक महीने से हत्या की साजिश रच रही थी। इसका आइडिया उसे ‘नाम शबाना’ फिल्म से मिला। शहर की पॉश डायमंड कॉलोनी की कोठी में रहने वाली 75 वर्षीया हुसैना बाई और उनकी 80 वर्षीया बड़ी बहन बोहरवाड़ी निवासी सारा बाई की हत्या उनकी एक और बहन जुबैदा के बेटे मुस्तनसिर बोहरा की पत्नी मारिया (32) ने नकदी और जेवरात चुराने के लिए गत 22 अक्टूबर कर दी थी।

पुलिस ने बताया कि शुरुआत में मारिया की मंशा हत्या की नहीं थी, जिसके लिए उसने दोनों बहनों को बेहोश करने की साजिश रची और सब्जी में नीद की कई गोलियां पीसकर डाल दी। इससे दोनों बहनों को नींद तो नहीं आई, लेकिन तबीयत बिगड़ गई थीं।

नाम शबाना फिल्म से मिला हत्या का आइडिया

उसके यहां रहने वाले केयरटेकर बेणीराम सालवी की बच्चियों की वजह से वह अपनी साजिश में सफल नहीं रही। जिसके बाद उसने हत्या की योजना बनाई तथा ‘नाम शबाना’ फिल्म से आइडिया लिया। जिसमें लोहे की एक रॉड के जरिए सिर पर वार कर हत्या का सीन दिखाया गया है।

इसके लिए वह इसका इंतजार कर रही थी कि कब हुसैना बाई अकेली रह जाए। केयरटेकर के नवरात्रि तथा विजयादशमी पर अवकाश लेकर परिवार सहित पैतृक गांव चले जाने से उसे यह मौका भी मिल गया। वह हत्या की योजना से लोहे की रॉड बुर्का में छिपाकर लाई थी। वह कोठी के फर्स्ट फ्लोर पर रह रही हुसैना के कमरे में पहुंची। तब हुसैना बाई टीवी देख रही थीं तथा उसने पीछे से हुसैना बाई का गला घोंटकर उसकी जान लेनी चाही, लेकिन मारिया के चेहरे से बुर्का उतर गया और हुसैना उसे पहचान गई। तब मारिया से लोहे की रॉड से हुसैना के सिर पर हमला किया और वह लहूलुहान होकर गिर पड़ी।

उसने हुसैना के शरीर से कुछ जेवरात उतारे तथा आलमारी से जेवरात तथा नकदी चुराकर भागने की फिराक में थी, लेकिन तभी दूसरे कमरे से हुसैना की बड़ी बहन सारा आ गई तो मारिया ने लोहे की रॉड से हमला कर उसकी भी जान ले ली।

अगले दिन घर में आग लगाने पहुंची

आरोपित मारिया ने पुलिस को बताया कि हत्या की वारदात करने के बाद वह अगले दिन घर में आग लगाने के लिए पहुंची थी। इसके लिए वह पेट्रोल से भरी बोतल लाई थी। उसने जिस कमरे में हुसैना तथा सारा के शव पड़े थे उसमें आग लगाने के लिए कॉलीन पर पेट्रोल डाला और आग लगाकर भाग गई। उसका अनुमान था कि इससे समूचे घर में आग लग जाएगी और पुलिस तथा पड़ोसी समझेंगे की आग लगने की घटना में दोनों बहनें जिंदा जल गईं। हालांकि, आग फैल नहीं पाई और कालीन सुलगता रहा।

इंटरनेट पर देखी, पुलिस की जांच प्रक्रिया

डबल मर्डर की आरोपी महिला मारिया ने इंटरनेट पर अपराध से जुड़े कई वीडियो देखें, जिसमें यह जाना कि पुलिस के शक होने पर उनसे किस तरह से बातचीत की जाए ताकि बचा जा सके। पुलिस ने लगभग 14 घंटे तक उससे पूछताछ की तब जाकर उसने वारदात करना कबूल किया।

पुलिस का कहना था कि पहले ही बोहरा समुदाय डबल मर्डर से उद्वेलित था। ऐसे में इसी समुदाय की महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ करना मुश्किल लग रहा था। जब तक पुलिस के हाथ पुख्ता सबूत नहीं लगे तब तक उससे पूछताछ नहीं की।

घर पर ही गलाया चुराया सोना, खरीदकर लाई बर्नर

पुलिस ने बताया कि चुराए सोने के जेवरात गलाने के लिए वह वारदात से एक सप्ताह पहले ही बर्नर खरीदकर लाई थी। जिसके जरिए उसने चुराए गए आधे सोने को घर पर ही गला लिया था। जबकि आधे जेवरात बैंक में गिरवी रखकर रकम उठा ली थी। जिसके बाद वह कुवैत जाने की फिराक में थी और इसके लिए उसने टिकट भी बुक करा लिया था। मारिया का पति कुवैत में नौकरी करता है।

तीस लाख की उधारी चुकाने के लिए डबल मर्डर

पुलिस ने बताया कि मारिया ज्यादा स्कूली शिक्षा प्राप्त थी। उसे शेयर बाजार का आधा-अधूरा ज्ञान था, जिसके चलते उसने अपनी जमा रकम शेयर्स में लगा दी थी। जिसमें उसे 30 लाख रुपए का घाटा हो चुका था। जिसे चुकाने के लिए उसने अपने समाज की संस्था से 15 लाख रुपए तथा कुछ परिचितों से ब्याज पर पैसा उठा लिया था। उसे पता था कि हुसैना के पास काफी जेवरात व नकदी रहता था।

हुसैना के बेटे को आरोपित महिला पर था भरोसा

पुलिस ने बताया कि हुसैना बाई का बेटा सैफी दिल्ली में एक मल्टीनेशनल कंपनी में बड़े पद पर था। हुसैना अपने बेटे के पास दिल्ली रहती थी, लेकिन कभी-कभी उदयपुर रहने आती रहती थी। यहां आती तो वह अपनी बड़ी बहन सारा को भी अपने पास बुला लेती। इस बार वह एक महीने से उदयपुर में थी और सारा भी उसके पास रह रही थी। सैफी ने अपने मौसेरे भाई मुस्तनसिर बोहरा की पत्नी मारिया पर भरोसा करता था। अपनी मां के बाहरी कामकाज के लिए उसने मारिया को अपनी पुरानी कार भी दे रखी थी। जो काम हुसैना बाई अपने केयरटेकर के जरिए नहीं कराना चाहती, वह काम मारिया ही करती थी।

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