ब्रेकिंग
नरोत्तम मिश्रा को टिकट न मिलने पर कैलाश विजयवर्गीय की दो टूक, कहा- आशुतोष तिवारी भारी मतों से जीतेंग... दतिया उपचुनाव: नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने पर भाजपा में घमासान, समर्थकों का प्रदर्शन और पथराव MP Crime News: लवकुशनगर में 8वीं के छात्र के साथ कुकर्म, आरोपी सरकारी कर्मचारी सलाखों के पीछे मुजफ्फरनगर: कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे पर चढ़कर युवक ने कोतवाल को दी वर्दी उतरवाने की धमकी, वीडियो व... IND vs ENG: साउथैम्प्टन में टीम इंडिया की साख दांव पर, क्या नंबर 1 का ताज बचा पाएंगे रोहित? टीवी एक्टर रोहित चंदेल गिरफ्तार: नाबालिग का पीछा करने और मारपीट के मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई स्पेन में जंगल की आग का तांडव: 12 लोगों की मौत, 23 लापता; यूरोप में भीषण गर्मी का कहर Sony RX10 V लॉन्च: 25x ऑप्टिकल ज़ूम और AI फीचर्स वाला दमदार कैमरा, जानें कीमत और खूबियां Shani Dev Puja: शनिवार को न करें ये काम, वरना झेलना पड़ सकता है शनिदेव का प्रकोप! झड़ते बालों से हैं परेशान? जिंक की कमी के लक्षणों को पहचानें और डाइट में शामिल करें ये चीजें
देश

भारत से प्यार है, यह मेरे दूसरे घर जैसा है… गृहमंत्री से परमिट बढ़ाने की गुहार लगाकर बोलीं तस्लीमा नसरीन

बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन ने सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह से गुहार लगाई कि उन्हें भारत में रहने दिया जाए. दरअसल, मामला यह है कि उनका रेजिडेंस परमिट खत्म हो रहा है और इसी को बढ़ाने के लिए उन्होंने अपने सोशल मीडिया एक्स पर गुहार लगाई है.

लेखिका ने भारत को अपना दूसरा घर बताते हुए कहा, मैं यहां 22 साल से रह रही हूं, पर गृह मंत्रालय मेरा परमिट 22 जुलाई से बढ़ा नहीं रहा है. इसको लेकर मैं चिंता में हूं. अगर आप इसे बढ़ा देंगे, तो मैं आपकी आभारी रहूंगी.

स्वीडन की नागरिकता रखने वाली नसरीन कई मौकों पर इस्लाम के कट्टर स्वरूप की आलोचना कर चुकी हैं. वह धर्म में सुधार की मांग भी करती हैं.जिसकी वजह से अक्सर वह कट्टरपंथियों के निशाने पर रहती हैं. उनकी पहचान एक नारीवादी के रूप में भी है. अपनी उपन्यास लज्जा को लेकर भी वह चर्चा में रही थीं.

फतवा के कारण देश छोड़ा

बांग्लादेश की लेखिका को 90 के दशक में कट्टरपंथियों की धमकी के बाद देश छोड़ना पड़ा थ. उन पर इस्लाम के खिलाफ लिखने का आरोप लगा था. 1994 में उनके खिलाफ फतवा जारी किया गया, जिसके बाद उन्हें देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा. निर्वासन के दौरान वह अमेरिका और यूरोप में भी रहीं हैं, उसके बाद वे भारत में ही रह रही हैं. वर्ष 1998 में वह कुछ दिनों के लिए वापस बांग्लादेश गईं लेकिन शेख हसीना की सरकार ने उन्हें वहां रहने नहीं दिया.

जुलाई में खत्म हो गया है परमिट

बांग्लादेशी लेखिका का रेजिडेंस परमिट 27 जुलाई को खत्म हो गया है, जिसे भारत सरकार ने अभी तक रिन्यू नहीं किया है. लेखिका ने कहा कि भारत में रहना उन्हें अच्छा लगता है, क्योंकि यहां की और बांग्लादेश की संस्कृति और परिवेश एक जैसे हैं, इसलिए मुझे ऐसा नहीं लगता कि मैं अपने घर से बाहर रह रही हूं.

Related Articles

Back to top button