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कुवैत की योगा ट्रेनर, ब्राजील के वेदांत गुरु… पद्म पुरस्कार का ऐलान, जानें किसे मिला सम्मान

केंद्र ने शनिवार को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कार 2025 के लिए प्राप्तकर्ताओं की सूची की घोषणा की. इस सूची में कई गुमनाम और अनोखे पद्म पुरस्कार विजेता हैं, जिनमें सेब सम्राट हरिमान, कुवैत की योगा ट्रेनर और ब्राजील के वेदांत गुरु जोनास मैसेट के नाम शामिल हैं. शनिवार को जारी एक सरकारी बयान में कहा गया कि गोवा के 100 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी, पश्चिम बंगाल के एक ढाक वादक, जिन्होंने पुरुष प्रधान क्षेत्र में 150 महिलाओं को प्रशिक्षित किया और भारत की पहली महिला कठपुतली कलाकार उन 30 गुमनाम नायकों में शामिल हैं, जिन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया.

देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्म पुरस्कार तीन श्रेणियों पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री में पुरस्कार प्रदान किये जाते हैं. केंद्र सरकार ने पद्म श्री के लिए 30 नामों की घोषणा की है. यह पुरस्कार कला, सामाजिक कार्य, सार्वजनिक मामले, विज्ञान, इंजीनियरिंग, व्यापार, उद्योग, चिकित्सा, साहित्य, शिक्षा, खेल और सिविल सेवा जैसे विविध क्षेत्रों में उत्कृष्टता को मान्यता देता है.

गोवा के स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली लीबिया लोबो सरदेसाई ने 1955 में पुर्तगाली शासन के खिलाफ लोगों को एकजुट करने के लिए एक वन क्षेत्र में एक भूमिगत रेडियो स्टेशन – ‘वोज दा लिबरडेबे (स्वतंत्रता की आवाज़)’ की सह-स्थापना की थी. उन्हें 76वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया है.

बंगाल के 57 वर्षीय ढाक बजाने वाले गोकुल चंद्र डे को अवार्ड

पुरस्कार पाने वालों में पश्चिम बंगाल के 57 वर्षीय ढाक वादक गोकुल चंद्र डे भी शामिल हैं, जिन्होंने पुरुष प्रधान क्षेत्र में 150 महिलाओं को प्रशिक्षित करके लैंगिक रूढ़िवादिता को तोड़ा. डे ने पारंपरिक वाद्य यंत्र से 1.5 किलोग्राम हल्का ढाक भी बनाया और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया तथा पंडित रविशंकर और उस्ताद जाकिर हुसैन जैसे उस्तादों के साथ प्रस्तुति दी.

दिल्ली की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरजा भाटला को पद्म श्री से सम्मानित किया गया, जो गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का पता लगाने, उसकी रोकथाम और प्रबंधन मामलों की विशेषज्ञ हैं.

भोजपुर के सामाजिक कार्यकर्ता भीम सिंह भावेश को पिछले 22 वर्षों से अपनी संस्था ‘नई आशा’ के माध्यम से समाज के सबसे हाशिए पर पड़े समूहों में से एक मुसहर समुदाय के उत्थान के लिए अथक काम करने के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया.

माहेश्वरी शिल्प को बढ़ावा देने वाली सैली होलकर को अवार्ड

महिला सशक्तिकरण की मुखर समर्थक, 82 वर्षीय सैली होलकर ने कभी लुप्त हो रहे माहेश्वरी शिल्प को बदल दिया और पारंपरिक बुनाई तकनीकों का प्रशिक्षण देने के लिए मध्य प्रदेश के महेश्वर में हथकरघा विद्यालय की स्थापना की.

पी. दत्चनमूर्ति को पद्मश्री से सम्मानित किया गया. वे दक्षिण भारतीय संगीत और संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण शास्त्रीय ताल वाद्य थाविल में विशेषज्ञता रखने वाले वाद्य वादक हैं, जिनके पास 5 दशकों से अधिक का अनुभव है.

इसके साथ ही एल. हैंगथिंग को पद्मश्री से सम्मानित किया गया. वे नोकलाक, नागालैंड के फल किसान हैं, जिन्हें गैर-देशी फलों की खेती में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है. मध्य प्रदेश की सामाजिक उद्यमी सैली होल्कर और मराठी लेखक मारुति भुजंगराव चितमपल्ली को पद्म श्री मिला.

यहां अब तक जारी पद्म श्री पुरस्कार विजेताओं की सूची दी गई है:

एल हैंगथिंग (नागालैंड)

हरिमन शर्मा (हिमाचल प्रदेश)

जुमदे योमगम गैमलिन (अरुणाचल प्रदेश)

जोयनाचरण बाथरी (असम)

नरेन गुरुंग (सिक्किम)

विलास डांगरे (महाराष्ट्र)

शेखा ए जे अल सबा (कुवैत)

निर्मला देवी (बिहार)

भीम सिंह भावेश (बिहार)

राधा बहिन भट्ट (उत्तराखंड)

सुरेश सोनी (गुजरात)

पंडीराम मंडावी (छत्तीसगढ़)

जोनास मैसेट (ब्राजील)

जगदीश जोशीला (मध्य प्रदेश)

हरविंदर सिंह (हरियाणा)

भेरू सिंह चौहान (मध्य प्रदेश)

वेंकप्पा अम्बाजी सुगतेकर (कर्नाटक)

पी दत्चानमूर्ति (पुडुचेरी)

लीबिया लोबो सरदेसाई (गोवा)

गोकुल चंद्र डे (पश्चिम बंगाल)

ह्यू गैंटजर (उत्तराखंड)

कोलीन गैंटजर (उत्तराखंड)

डॉ. नीरजा भाटला (दिल्ली)

क्या है पद्म पुरस्कार?

पद्म पुरस्कार भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक हैं, जिनकी घोषणा हर साल गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर की जाती है. ये पुरस्कार तीन श्रेणियों में दिए जाते हैं: पद्म विभूषण (असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए), पद्म भूषण (उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा) और पद्म श्री (विशिष्ट सेवा). यह पुरस्कार उन सभी गतिविधियों या विषयों में उपलब्धियों को मान्यता देने का प्रयास करता है, जिनमें सार्वजनिक सेवा शामिल होता है. पद्म पुरस्कार पद्म पुरस्कार समिति द्वारा की गई सिफारिशों पर प्रदान किए जाते हैं, जिसका गठन हर साल प्रधानमंत्री द्वारा किया जाता है.

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