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8 कोच, 85KM की रफ्तार और हर मौसम में कश्मीर का सफर… चिनाब ब्रिज से गुजरी पहली वंदे भारत में क्या खास?

घाटी में रहने वाले लोगों के लिए खुश खबरी है. अब जल्द ही वंदे भारत ट्रेन से घाटी के लोग सफर कर सकेंगे. दरअसल, चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे पुल पर वंदे भारत ट्रेन का सफल ट्रायल हुआ है. 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन पुल के ऊपर से गुजरी. माता वैष्णो देवी कटरा रेलवे स्टेशन से बारामुला तक वंदे भारत का ट्रायल सफलता पूर्वक संपन्न हुआ. अब कटरा से तीन घंटे में कश्मीर आसानी से पहुंचा जा सकेगा. कन्याकुमारी से कश्मीर घाटी सालों साल रेल मार्ग के जरिए देश-दुनिया से जुड़ा रहेगा.

बता दें कि रियासी जिले में चिनाब नदी पर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल बना है. यह पुल खास टेक्निक के जरिए बनाया गया है. पुल भूकंप और ब्लास्ट सब झेल लेगा. अंजी खंड पर बने देश के पहले रेलवे केबल पुल और 359 मीटर ऊंचे चिनाब ब्रिज से पहली बार वंदे भारत ट्रेन गुजरी. एफिल टावर से 35 मीटर ऊंचा और 1.3 किमी लंबाई इस पुल की है. यह दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल है.

अब कश्मीर का सफर होगा आसान

घाटी में विकास और प्रगित का एक नया दौर शुरू हो जाएगा. इस सेवा से न केवल देश व दुनिया के अन्य हिस्सों तक पहुंचने के लिए सफर आसान होगा, बल्कि पर्यटन, फ्रूट, बागबानी और होटल उद्योग को भी एक नई दिशा मिलेगी. इस सेवा के माध्यम से दिल्ली से कश्मीर का सफर मात्र 13 घंटों में तय हो जाएगा और यात्री सस्ते किराए की दरों पर हर आधुनिक सुविधा से लैस इस रेल के माध्यम से दिल्ली से श्रीनगर पहुंच सकेंगे.

इस वंदे भारत ट्रेन में क्या है विशेषता?

देश के विभिन्न हिस्सों में चलने वाली अन्य 136 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की तुलना में, इस ट्रेन में जम्मू और कश्मीर की चरम मौसम स्थितियों में परिचालन चुनौतियों और यात्रियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए कई अतिरिक्त विशेषताएं हैं. इसमें उन्नत हीटिंग सिस्टम शामिल है, जो पानी और बायो-टॉयलेट टैंकों को जमने से रोकते हैं, वैक्यूम सिस्टम के लिए गर्म हवा प्रदान करते हैं.

आठ कोच वाली वंदे भारत ट्रेन चलेगी

पूरी तरह वातानुकूलित आठ कोच वाली ट्रेन का सफल और अंतिम स्पीडी ट्रायल पूरा कर लिया गया है. ट्रेन की गति क्षमता 160 किमी प्रतिघंटा है, लेकिन रेलवे सुरक्षा आयोग ने 85 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चलाने की अनुमति दी है. चलाने की तैयारी पूरी कर ली गई है. रेलवे ट्रैक पर ट्रेन को दौड़ाकर निरीक्षण-परीक्षण कर लिया गया है. सिर्फ शीर्ष स्तर पर हरी झंडी मिलने का इंतजार है.

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