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UP Cabinet Approved : सूक्ष्म, लघु और मध्यम दर्जे की औद्योगिक इकाइयों से 25% सरकारी खरीद जरूरी

लखनऊ। छोटे उद्योगों की बड़ी मुराद पूरी करते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने फैसला किया है कि सभी सरकारी विभाग अब अपनी कुल खरीद का 25 प्रतिशत प्रदेश की सूक्ष्म, लघु और मध्यम दर्जे की औद्योगिक इकाइयों (एमएसएमई) से खरीदेंगे। शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में इसके लिए श्रम एवं लघु उद्यम क्रय नीति, 2020 को मंजूरी दी गई। सरकार के इस फैसले से छोटे उद्योगों को फायदा होगा।

कैबिनेट बैठक के बाद एमएसएमई मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार ने सरकारी विभागों को एमएसएमई इकाइयों से अपनी कुल खरीद का 20 प्रतिशत खरीदने के दिशा-निर्देश दिये थे। केंद्र ने एमएसएमई इकाइयों से की जाने वाली सरकारी खरीद की सीमा को अब बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया है। राज्य सरकार ने केंद्र के फैसले पर अमल तो किया है, लेकिन उसने अपने सरकारी विभागों को कुल खरीद का 25 प्रतिशत प्रदेश की एमएसएमई इकाइयों से ही खरीदने की शर्त को अनिवार्य रूप से लागू करने का फैसला किया है।

साथ ही, खरीदारी के लिए होने वाली टेंडर प्रक्रिया में प्रदेश की एमएसएमई इकाइयों को 15 प्रतिशत प्राइस प्रिफरेंस भी देने का प्रावधान किया है। इसका मतलब यह है कि जेम पोर्टल पर खरीदारी के लिए टेंडर प्रक्रिया में यदि सबसे कम दर कोट करने वाली कोई एमएसएमई इकाई प्रदेश के बाहर की है और उससे 15 प्रतिशत अधिक दर कोट करने वाली कोई लघु इकाई प्रदेश की है, तो खरीद में प्रदेश की इकाई को वरीयता दी जाएगी।

सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश इन प्रावधानों को लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। यदि किन्हीं कारणों से सरकारी विभाग प्रदेश की एमएसएमई इकाइयों से खरीद नहीं कर पाते है या सूबे की लघु औद्योगिक इकाइयां उन्हें सामान की आपूर्ति नहीं कर पाती हैं तो उन्हें देश की किसी एमएसएमई इकाई से सामान की खरीदारी करनी होगी।

सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बताया कि मंजूर की गई नीति के तहत सरकारी विभागों द्वारा की जाने वाली 25 प्रतिशत खरीद में महिला द्वारा संचालित एमएसएमई को तीन प्रतिशत, अनुसूचित जाति के व्यक्ति द्वारा संचालित इकाई को चार प्रतिशत वरीयता दी जाएगी। इसमें पांच प्रतिशत वरीयता उन एमएसएमई इकाइयों को भी दी जाएगी, जो उत्पादन के लिए ग्रीन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करती हैं।

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