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फ्लोर टेस्ट की मांग लेकर भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, कल होगी सुनवाई

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश विधानसभा के 26 मार्च स्थगित होने के कुछ देर बाद ही मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार के फ्लोर टेस्ट का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान फ्लोर टेस्ट की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। भाजपा द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर 12 घंटे में फ्लोर टेस्ट कराए जाने की मांग की गई है। जानकारी के मुताबिक, कल इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेवाई चंद्रचुड व जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ सुनवाई करेगी। बता दें कि सोमवार को जैसे ही विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई और राज्यपाल का अभिभाषण हुआ तो उसके तुरंत बाद कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया।

विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कोरोना वायरस का हवाला देते हुए सदन को 26 मार्च तक स्थगित कर दिया। इस दौरान भाजपा विधायकों ने सदन में जमकर हंगामा किया और कहा कि कमलनाथ सरकार फ्लोर टेस्ट से डर रही है। मुख्यमंत्री कमलनाथ लगातार यह कहते आ रहे हैं कि वे फ्लोर टेस्ट को तैयार हैं, लेकिन जब तक बेंगलुर में बंधक उनके विधायकों को स्वतंत्र नहीं किया जाता, तब तक फ्लोर टेस्ट नहीं हो सकता। इस बात को सोमवार को भी उन्होंने दोहराया है।

सीएम कमलनाथ ने राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर फ्लोर टेस्ट रोकने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि वर्तमान परिस्थिति में फ्लोर टेस्ट कराना अलोकतांत्रिक होगा। कमलनाथ ने आरोप लगाया है कि भाजपा ने कांग्रेस के कई विधायकों को कर्नाटक में बंदी बना लिया है। वहीं, मध्यप्रदेश कांग्रेस के मंत्री पीसी शर्मा ने कहा था कि हम फ्लोर टेस्ट का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन फ्लोर पूरा नहीं हुआ है। कांग्रेस के 16 विधायकों को गायब कर दिया गए हैं, जिसके बारे में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गृह मंत्री अमित शाह को सूचना दी है।

बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के साथ की मध्यप्रदेश सरकार पर बहुमत साबित करने का संकट है। सिंधिया के भाजपा में जाने के साथ 22 विधायकों ने भी कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। अभी की बात करें तो कांग्रेस के पास मात्र 99 विधायक हैं और भाजपा के पास अपने 107 विधायक हैं।

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