ब्रेकिंग
छत्तीसगढ़ बनेगा क्रिटिकल मिनरल्स का हब: लिथियम, REE और 35 रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की होगी खोज, GSI ने स... छत्तीसगढ़ में ED का बड़ा एक्शन: पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के धमतरी आवास पर छापा, कांग्रेस का... बरेली: नीली बत्ती वाली फर्जी महिला IAS का करोड़ों का जॉब स्कैम, फर्जी ज्वाइनिंग लेटर देकर करते थे ठग... IIT में अच्छी रैंक के बाद भी चुना शतरंज: सड़कों पर गुजारी रातें, अब 30 देशों में सिखा रहे हैं चेस; प... गोविंदा-सुनीता के 40 साल पुराने रिश्ते में सुलह: फैमिली कोर्ट पहुंचीं पत्नी सुनीता आहूजा, तलाक की या... केन्या में भीषण हेलिकॉप्टर क्रैश: इक्वाडोर के खुफिया प्रमुख और 5 अमेरिकी नागरिकों सहित सभी 7 लोगों क... माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में बड़ा बदलाव: कुल पोर्टफोलियो और कर्जदार घटे, औसत लोन साइज 19% बढ़ा भारत में Starlink की नई छलांग: Gen 2 सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन और D2D सर्विस के लिए नया आवेदन सावन पुत्रदा एकादशी कब है? जानें 23 अगस्त 2026 की सही तिथि, पूजा विधि और संतान प्राप्ति के सिद्ध मंत... ब्रेड से बनाएं ये 5 क्रिस्पी और टेस्टी स्नैक्स: बच्चों और बड़ों के नाश्ते के लिए आसान और हेल्दी रेसि...
धार्मिक

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग: 12 ज्योतिर्लिंगों में अंतिम ज्योतिर्लिंग…जहां दर्शन से मिलता है संतान सुख!

ये घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव का एक स्वयंभू ज्योतिर्लिंग है जो भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. इस ज्योतिर्लिंग के बारे में मान्यता है कि संतान की कामना कर रहे जोड़ों के लिए यह वरदान से कम नहीं है. यहां निसंतानों को भोलेनाथ संतान का आशीर्वाद देते हैं. इसी कामना से इस मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. दूर दराज से लोग अपनी सूनी गोद लेकर यहां आते हैं और उम्मीद करते हैं कि उनकी गोद बहुत जल्दी भर जाएगी.

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग से भगवान शिव के कई चमत्कारी कहानी जुड़ी हुई है. उसी में से एक है की शिव भगवान ने यहां एक भक्त के पुत्र को जीवित कर दिया था तभी से यहां संतान की कामना की जाती है.

कहां स्थित है यह ज्योतिर्लिंग ?

भगवान शिव का यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के दौलताबाद के बरेल गांव में स्थित है इस मंदिर को घुश्मेश्वर महादेव के नाम से भी लोग जानते हैं. ये नाम एक भक्त के नाम प्रसिद्ध हुआ है. ये मंदिर महाराष्ट्र के अजंता अलोरा की गुफाओं के कुछ ही दूर पर यह मंदिर स्थित है.

इस मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

इस मंदिर को लेकर एक पौराणिक कथा प्रचलित है. कहा जाता है कि सुधर्मा नाम का एक ब्राह्मण अपनी पत्नी सुदेहा के साथ देवगिरी पर्वत पर रहता था. उसके कोई संतान नहीं हुई थी. ज्योतिष से पता चला कि सुदेहा गर्भवती नहीं हो सकती इसलिए सुदेहा ने अपने पति की अपनी छोटी बहन घुश्मा से शादी करवा दी. घुश्मा शिव की अनन्य भक्त थी. वो प्रत्येक दिन शिव के 101 पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा करती थी. कुछ दिन पश्चात घुश्मा को एक सुंदर बालक की प्राप्ति हुई. कुछ दिनों बाद सुदेहा को घुश्मा से जलन होने लगी और उसने एक दिन उसके बालक को तालाब में फेंक दिया. इसी तालाब में घुश्मा रोज पार्थिव शिवलिंगों को विसर्जित किया करती थी. सुबह हुई तो बालक की मृत्यु की खबर फैली, सब शोकाकुल हो गए लेकिन घुश्मा भगवान शिव की भक्ति करती रही जैसे कुछ हुआ ही ना हो और रोज की तरह शिवलिंग को विसर्जित करने तालाब पहुंची. जैसे ही उसने शिवलिंग का विसर्जन किया महादेव प्रकट हो गए और उसके पुत्र को पुनर्जीवित कर दिया. महादेव सुदेहा पर क्रोधित हो गए और त्रिशूल उठा लिया लेकिन तब तभी घुश्मा ने कहा कि उसकी बहन को माफ कर दें. महादेव इस बात से अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने कहा की घुश्मा कोई वर मांगो. भक्त घुश्मा ने कहा कि महादेव आप जगत कल्याण के लिए यही निवास करें. तब से घुश्मा के नाम पर ही यह ज्योतिर्लिंग घुश्मेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया. माना जाता है कि यहां आराधना करने वालों को आज भी संतान की प्राप्ति होती है.

इस मंदिर में आज भी मौजूद है वह सरोवर

माना जाता है कि जहां घुश्मा ने सभी शिवलिंगों का विसर्जन किया था वह सरोवर आज भी यहां जीवित है. इसके दर्शन मात्र से संतान दंपतियों को संतान का सुख मिलता है और उनकी मनोकामना पूर्ण होती है.

Related Articles

Back to top button