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पंजाब

बर्ल्टन पार्क को बचाने की जंग फिर हाईकोर्ट पहुंची, अदालती फैसले पर टिका स्पोर्ट्स हब का भविष्य

जालंधर: बर्ल्टन पार्क को लेकर फिर एक बार विवाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। शहर के वरिष्ठ नागरिकों ने नगर निगम और उसके ठेकेदार के खिलाफ याचिका दाखिल की है, जिसमें पार्क के ग्रीन बेल्ट, रोज़ गार्डन और वैली में हो रहे निर्माण कार्य को रोकने की मांग की गई है। यह याचिका इंदर पाल सिंह कुमार और अन्य निवासियों की ओर से सीपीसी की धारा 151 के तहत दाखिल की गई है। मामला मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए पिछले दिनों आया। याचिकाकर्त्ताओं का कहना है कि अगर निर्माण कार्य जारी रहा, तो पिछले 30 वर्षों से स्थानीय निवासियों और बर्लटन पार्क वैल्फेयर एसोसिएशन द्वारा सहेजे गए इस सुंदर हरे क्षेत्र की शांति और प्राकृतिक सुंदरता हमेशा के लिए नष्ट हो जाएगी।

याचिकाकर्त्ताओं ने अदालत से 15 एकड़ पार्क क्षेत्र (जिसमें रोज़ गार्डन, वैली और ग्रीन बेल्ट शामिल हैं) को सुरक्षित रखने की अपील की है, जबकि शेष 48 एकड़ में खेल परिसर (स्पोर्ट्स हब) का काम जारी रखने की अनुमति देने का सुझाव दिया है। उन्होंने यह भी मांग की कि किसी भी विकास कार्य से पहले सभी पर्यावरणीय मंज़ूरियाँ और जरूरी अनुमति ली जाएं। अदालत ने इस मुद्दे पर 17 सितंबर को नोटिस जारी करते हुए स्टे पर विचार की टिप्पणी दर्ज की थी। अब मामला 29 अक्तूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

यह विवाद नया नहीं है। पहले भी वर्ष 2009 में छह वरिष्ठ नागरिकों ने नगर निगम के खिलाफ याचिका दायर की थी, जब निगम ने 63 एकड़ के इस पार्क में कमर्शियल प्रोजैक्ट शुरू करने की कोशिश की थी। तब अदालत ने आदेश दिया था कि बिना अनुमति कोई पेड़ नहीं काटा जाएगा और न ही निर्माण होगा। 2012 में फिर याचिका दायर की गई, जब निगम ने पार्क की ज़मीन का उपयोग “पार्क” से बदलकर “मिक्स्ड यूज़” कर दिया। अदालत ने तब स्टेटस-को (यथास्थिति बनाए रखने) का आदेश दिया था और निगम को पर्यावरणीय मंजूरी लेने के लिए बाध्य किया था।

अब की याचिका में कहा गया है कि पहले याचिकाकर्ताओं में से पांच का निधन हो चुका है और एक विदेश में है, इसलिए यह जिम्मेदारी अब नई पीढ़ी उठा रही है। याचिकाकर्त्ताओं का आरोप है कि पर्यावरण की रक्षा करने वाले ही अब उसे नष्ट कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2022 में लगभग 77 करोड़ रुपए का ठेका स्मार्ट सिटी मिशन के तहत स्पोर्ट्स हब बनाने के लिए दिया गया, जबकि पर्यावरणीय अनुमति लिए बिना ही जून 2025 में प्रोजैक्ट का उद्घाटन कर दिया गया। याचिकाकर्त्ताओं ने कहा कि वे स्पोर्ट्स हब के विरोध में नहीं हैं, लेकिन शहर के फेफड़े समझे जाने वाले 15 एकड़ हरे क्षेत्र को बचाना जरूरी है। उनका कहना है कि निगम बाकी 48 एकड़ में स्पोर्ट्स हब विकसित करे, लेकिन हरियाली को नष्ट न करे।

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