ब्रेकिंग
इंदौर पुलिस में हड़कंप: फर्जी गवाह और विवेचना में लापरवाही पर पूर्व थाना प्रभारी दिनेश वर्मा का डिमो... मध्य प्रदेश: श्रीकृष्ण की 64 कलाओं और 14 विद्याओं से निखरेगी Gen Z प्रतिभा, ₹1 लाख छात्रवृत्ति पर छि... इंदौर में कलयुगी बेटी की करतूत: मां के खाते से उड़ाए मृत पिता के ₹80 लाख, कोर्ट के आदेश पर बेटी-दामा... वेस्टइंडीज का 26 साल पुराना सपना टूटा! Port of Spain टेस्ट में पाकिस्तान की धमाकेदार जीत, बाबर-शफीक ... राजपाल यादव की बढ़ीं मुश्किलें: शाहजहांपुर की दो संपत्तियां होंगी नीलाम, सेंट्रल बैंक का ₹16.61 करोड... पाकिस्तान में नेताओं के झूठे हलफनामे पर कसेगा शिकंजा: चुनाव आयोग बदलने जा रहा है 2017 के कड़े नियम केंद्र सरकार की 'गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम' में बड़े बदलाव की तैयारी, ज्वैलर्स को मिल सकता है 1% अतिरि... पीएम मोदी का पोस्ट डिलीट होने पर भड़की सरकार, मेटा चीफ जोएल कपलान ने अश्विनी वैष्णव से मिलकर मांगी म... सावन कांवड़ यात्रा: गलती से कांवड़ जमीन पर गिर जाए या टूट जाए तो डरें नहीं, करें ये अचूक उपाय बालों के झड़ने के पीछे कहीं प्रोटीन की कमी तो नहीं? जानें शरीर में दिखने वाले 5 संकेत और घरेलू उपाय
मध्यप्रदेश

झूठ बोलने पर बड़ी कार्रवाई: शहडोल कलेक्टर केदार सिंह पर हाईकोर्ट ने लगाया ₹2 लाख का भारी जुर्माना

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शहडोल के कलेक्टर डॉक्टर केदार सिंह पर गंभीर टिप्पणी करते हुए दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. इसके साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राशि कलेक्टर केदार सिंह को अपने व्यक्तिगत खाते से चुकानी होगी. हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच में हुई सुनवाई के बाद, अदालत ने झूठा हलफनामा देने पर शहडोल कलेक्टर केदार सिंह को अवमानना नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं. पूरा मामला एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत की गई एक गलत कार्रवाई से जुड़ा है.

डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद आदेश पारित करते हुए कहा कि कलेक्टर द्वारा कोर्ट में प्रस्तुत हलफनामे में झूठी जानकारी दी गई थी, जिससे न्यायालय को गुमराह किया गया. दरअसल, शहडोल जिले के ब्यौहारी तहसील के ग्राम समन निवासी हीरामणि बैस ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उनके पुत्र सुशांत बैस को प्रशासन ने गलत तरीके से एनएसए के तहत हिरासत में ले लिया.

याचिकाकर्ता के अनुसार, पुलिस अधीक्षक ने एनएसए लगाने की सिफारिश नीरजकांत द्विवेदी नामक व्यक्ति पर की थी, लेकिन कलेक्टर ने गलती से सुशांत बैस के नाम पर आदेश जारी कर दिया, जिससे उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ.

24 सितंबर को अदालत के निर्देश पर कलेक्टर डॉ. केदार सिंह और एसपी रामजी श्रीवास्तव कोर्ट में उपस्थित हुए थे. उनकी दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) एस.एस. शुक्ला को भी शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे. एसीएस ने कोर्ट में कहा कि कलेक्टर कार्यालय के बाबू से टाइपिंग में गलती हो गई थी, जिसके कारण यह त्रुटि हुई और संबंधित कर्मचारी को नोटिस दिया गया है. हालांकि अदालत इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुई.

कोर्ट ने पाया कि कलेक्टर द्वारा दिए गए हलफनामे में यह उल्लेख किया गया था कि कार्रवाई अपराध क्रमांक 44/22 के आधार पर की गई है, जबकि वह प्रकरण पहले ही समाप्त हो चुका था. साथ ही कलेक्टर ने जिन लोगों के बयान प्रस्तुत किए थे, वे वर्ष 2022 में दर्ज किए गए थे, जो संदर्भहीन थे.

याचिकाकर्ता के वकील ब्रह्मेन्द्र प्रसाद पाठक ने तर्क दिया कि सुशांत की फरवरी में शादी हुई थी और सितंबर में जब एनएसए लगाया गया, तब उसकी पत्नी गर्भवती थी. मार्च में बेटी के जन्म के बावजूद सुशांत उसे देख भी नहीं सका. इस कारण यह कार्रवाई न केवल अवैध थी बल्कि मानवीय दृष्टि से भी अन्यायपूर्ण थी.

अदालत ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ इस तरह का खिलवाड़ अस्वीकार्य है. झूठा हलफनामा देने पर कोर्ट ने डॉ. केदार सिंह को अवमानना नोटिस जारी करने के निर्देश दिए और दो लाख रुपये का जुर्माना व्यक्तिगत रूप से भरने का आदेश दिया.

Related Articles

Back to top button