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छत्तीसगढ़

12 साल की बिटिया ने इसलिए कहा थैंक्यू मैडम, बेटी को बचाने के लिए जंगल और नदी पार कर पहुंचे अफसर

सुकमा: बिटिया सिर्फ बेटी नहीं होती बल्कि घर की लक्ष्मी होती है. ईश्वर का दिया वो अनमोल तोहफा होती है, जिसकी हिफाजत करना माता पिता का धर्म और कर्तव्य दोनों होता है. बटिया माता पिता के सपनों को अपने पंख देती है ताकि घर स्वर्ग बन जाए. लेकिन कई बार गरीबी और अशिक्षा के चलते इसी बिटिया का विवाह माता पिता कम उम्र में कर देते हैं. सुकमा में ऐसी ही एक बेटी का विवाह उसके घरवाले 12 साल की उम्र में करने जा रहे थे.

12 साल की बच्ची की करा रहे थे परिवार वाले शादी

महिला एवं बाल विकास विभाग और चाइल्ड लाइन को जैसे ही इस बात की खबर मिली, तत्काल इसकी सूचना कलेक्टर अमित कुमार को दी गई. कलेक्टर के निर्देश पर एक टीम नक्सल प्रभावित इलाके के नाडीगुफा गांव में भेजी गई. जिला मुख्यालय सुकमा से निकली ये टीम नदी-नालों और जंगलों को पार कर गांव तक पहुंची. प्रशासन की टीम ने बच्ची के परिवार वालों को एक साथ बैठाया और उनसे बातचीत की.

बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की दी जानकारी

महिला एवं बाल विकास विभाग और चाइल्ड लाइन की टीम ने स्थिति को बेहद संवेदनशीलता के साथ संभाला. परिजनों और ग्रामीणों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई. बताया गया कि बाल विवाह न सिर्फ कानूनन अपराध है, बल्कि इससे बालिका के स्वास्थ्य, शिक्षा और पूरे भविष्य पर गंभीर असर पड़ता है. ग्रामीणों की मौजूदगी में विधिवत पंचनामा तैयार किया गया और बालिका को सुरक्षित संरक्षण प्रदान किया गया.

परिवार वालों को प्रशासन की टीम ने बताया कि बच्ची को अपना बचपन जीने दें. बच्ची अगर पढ़ना चाहती है तो उसे पढ़ने दें. कम उम्र में उसपर शादी का दबाव नहीं बनाएं. जिला प्रशासन की पहल रंग लाई और परिवार वालों ने अपनी गलती मान ली. परिवार वालों ने जिला प्रशासन से वादा किया वो भविष्य में इस तरह की गलती दोबारा नहीं करेंगे. जिस बच्ची की शादी परिवार वाले जबरन करा रहे थे उसकी उम्र महज 12 साल थी.

गांव वालों को भी किया जागरुक

घने जंगलों और नदी नालों को पार कर गांव तक पहुंची टीम ने सभी गांव वालों को भी सख्त हिदायत दी है. जिला प्रशासन ने कहा है कि किसी नाबालिग बच्ची का विवाह कम उम्र में नहीं करना है. बिटिया जब 18 साल की हो जाए तब उसका विवाह राजी खुशी से करें.

सुकमा जिले में बाल विवाह को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. प्रशासन का लक्ष्य सिर्फ कानून का पालन कराना नहीं, बल्कि हर बच्चे को सुरक्षित बचपन और बेहतर भविष्य देना है. दुर्गम क्षेत्रों में भी टीमों की सक्रियता जारी रहेगी. जिले की हर पंचायत को बाल विवाह मुक्त बनाने का हमारा संकल्प और उद्देश्य है: अमित कुमार, कलेक्टर, सुकमा

क्या है बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006

यह कानून 18 साल से कम उम्र की बच्चियों और 21 साल से कम उम्र के लड़कों के विवाह पर रोक लगाता है, इसे कानूनी अपराध मानता है. बाल विवाह को रोकने, पीड़ितों को राहत देने और अपराधियों को दंडित करने के लिए प्रावधान भी करता है. इस कानून की मदद से बाल विवाह कराने वालों के लिए 2 साल तक की जेल और ₹1 लाख तक का जुर्माना किया जा सकता है. यह अधिनियम 1929 के बाल विवाह निरोधक अधिनियम का स्थान लेता है और बाल विवाह को शून्य घोषित करता है, साथ ही बाल विवाह निषेध अधिकारियों की नियुक्ति का भी प्रावधान करता है.

बाल विवाह के आंकड़ों में तेजी से आ रही गिरावट

बाल विवाह में तेजी से गिरावट भी आ रही है. जिसका सबसे बड़ा कारण है, बेटी पढ़ाओ बेटी बढ़ाओ जैसे अभियान. सामाजिक चेतना के जरिए भी लोगों को जागरुक करने का काम किया जा रहा है. शिक्षा का स्तर बढ़ने से भी बाल विवाह के आंकड़ों में कमी आई है.

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