ममता बनर्जी का ‘चुनावी युद्ध’: क्या महिला वोटरों को रोकने के लिए हो रहा है SIR का इस्तेमाल

मतदाता सूची के संशोधन की प्रक्रिया ‘स्पेशल इटेंसिव रिवीजन SIR को लेकर बिहार से लेकर पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठा रही हैं. पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. पहले बीएलओ की मौत को लेकर तृणमूल कांग्रेस चुनाव आयोग पर निशाना साध रही थी और अब सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर बड़ा आरोप लगाया है.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि महिलाओं के नाम ‘टारगेट’ करके वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं. जो महिलाएं शादी के बाद अपने ससुराल चली गई हैं और जिनके सरनेम बदल गए हैं, उन्हें बाहर किया जा रहा है.
ममता बनर्जी ने सवाल किया कि क्या कोई हमेशा एक ही घर में रहता है? वे एक मोहल्ले से दूसरे मोहल्ले में चले गए हैं. जो महिलाएं शादी के बाद अपने ससुराल चली गई हैं और जिनके सरनेम बदल गए हैं, उन्हें टारगेट करके बाहर किया जा रहा है.
महिलाओं को लेकर ममता का बयान अहम
विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी का यह बयान सियासी रूप से काफी अहम है. इससे पहले चुनाव आयोग ने SIR की प्रक्रिया के बाद ड्राफ्ट लिस्ट जारी किया था. ड्राफ्ट लिस्ट में 54 लाख मतदाताओं के नाम कटे थे. अब जिन मतदाताओं की मैपिंग का मिलान नहीं हो पा रहा है. उनको नोटिस भेजा जा रहा है और उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है.
सुनवाई की प्रक्रिया को लेकर ममता बनर्जी ने काफी नाराजगी जताई है. उन्होंने इसे लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त को दो महीने में पांच पत्र लिख चुकी हैं. ममता बनर्जी का आरोप है कि चुनाव आयुक्त पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण तरीके से काम कर रहे हैं, लेकिन अब ममता बनर्जी ने महिलाओं को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साधा है और इसकी वजह भी है.
आधी आबादी पर ममता बनर्जी की नजर
पिछले चुनाव के आंकड़े बताते हैं कि चाहे विधानसभा चुनाव हो या फिर लोकसभा चुनाव हो, महिलाओं ने ममता बनर्जी का खुलकर समर्थन किया था. महिला वोट उनके और तृणमूल के पब्लिक सपोर्ट की नींव में से एक है. 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले, ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसे प्रोजेक्ट्स ने ममता बनर्जी के लिए जादू की छड़ी की तरह काम किया था.
इस योजना के तहत ममता बनर्जी राज्य की हर महिला को प्रति माह 1000 रुपए की मदद देती हैं. इसके साथ ही स्वास्थ्य साथी से लेकर कही परियोजनाएं ममता बनर्जी ने महिलाओं के लिए शुरू की हैं. लोकसभा चुनाव में भी इसका असर दिखा था. अब ममता बनर्जी 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले उन महिलाओं को एक मैसेज देना चाहती थीं.
SIR में महिलाएं क्यों हो रही हैं ज्यादा परेशान?
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि दूसरे राज्यों के वोटरों के नाम पश्चिम बंगाल की लिस्ट में जोड़ने की साज़िश हो रही है. इस संदर्भ में उन्होंने बिहार, ओडिशा और झारखंड के नामों का जिक्र किया. इत्तेफाक से, झारखंड को छोड़कर बाकी दो राज्यों में बीजेपी की सरकार है. ममता ने आगे आरोप लगाया कि कई लोगों के नाम ब्लॉक और बाहर किए जा रहे हैं. उन्हें सुनवाई में जाने का मौका भी नहीं दिया जा रहा है. ममता बनर्जी मतदाता सूची में हेरफेर का आरोप लगा रही हैं.
SIR की प्रक्रिया के दौरान महिलाओं को विशेष रूप से परेशानी हुई है. पहले SIR का फॉर्म भरने और फिर पिता या पिता का नाम लिखने और सरनेम बदले जाने को लेकर समस्या हुई है. कई महिलाओं ने शिकायत की कि चूंकि शादी के बाद उनका सरनेम बदल गया है. इस कारण उन्हें नोटिस दिया गया है और सुनवाई के लिए बुलाया गया है. ऐसा नहीं है कि महिलाओं को केवल पश्चिम बंगाल में ही समस्या का सामना करना पड़ रहा है.
यूपी में पुरुष-महिला का अनुपात का अंतर 3-5 फीसदी
उत्तर प्रदेश में भी SIR अभियान में वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों में पुरुषों से अधिक महिलाएं हैं. कई जिलों में मतदाता सूची में पुरुषों और महिलाओं के अनुपात का अंतर करीब 3-5 फीसदी है. हालांकि चुनाव आयोग जेंडर रेशियो और SIR में हटाए गए नामों को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में विपक्षी पार्टियां इसे लेकर चुनाव आयोग और भाजपा पर हमला बोल रही है.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर वोटर लिस्ट में नकली वोटर जुड़वाने का आरोप लगाया और कहा कि भगवा पार्टी देश के डेमोक्रेटिक सिस्टम को खराब करने के लिए SIR एक्सरसाइज में हेरफेर करना चाहती है. इसके साथ ही उन्होंने महिला वोटर्स के नाम जिस तरह से काटे जा रहे हैं. उसे लेकर भी चिंता जताई है.
SIR पर अखिलेश ने भी उठाए हैं सवाल
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा देश की डेमोक्रेटिक मशीनरी को खराब करने के लिए बेताब है. वे SIR में हेरफेर करना चाहते हैं. अगर SIR से जुड़े अधिकारी BJP पदाधिकारियों के साथ मिलकर नकली और मनगढ़ंत वोटर जुड़वाते पाए गए तो FIR दर्ज की जाएगी.
इससे पहले बिहार में SIR की प्रक्रिया के दौरान भी महिलाओं के नाम काटे जाने को लेकर विवाद पैदा हुआ था, हालांकि बाद में चुनाव आयोग ने इसे लेकर सफाई दी थी, लेकिन अब फिर से उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में SIR की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं और इसका कनेक्शन पूरी तरह से सियासी है और सभी राजनीतिक पार्टियों की आधी आबादी के वोट पर नजर है.






