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मध्यप्रदेश

Antique Coins: चांदी के भाव बढ़ते ही गलने लगे ऐतिहासिक सिक्के, कॉइन कलेक्टर्स ने जताई बड़ी चिंता

इंदौर: देश भर में जिस तेजी से चांदी की कीमत बढ़ रही है. उससे सराफा बाजार के अलावा प्राचीन सिक्कों की खरीदी बिक्री का मुद्रा बाजार भी संकट में आ गया है. बाजार में अब तक जो चांदी के सिक्के सामान्य खरीदी में बिकने आते थे, उन्हें भी ज्यादा कीमत मिलने के लालच में गलाया जा रहा है, जाहिर है इस स्थिति में प्राचीन दुर्लभ मुद्रा नष्ट हो रही है.

चांदी के भाव से फीका पड़ा मुद्रा मेला

भारत में चांदी के सिक्के छठवीं शताब्दी में ही चलन में आ गए थे. भारतीय पहला सिक्का 11.5 ग्राम का था और ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा इन सिक्कों को तैयार किया जाता था. हालांकि, उस दौर के लोगों के पास अन्य देशों के भी दुर्लभ सिक्के मौजूद थे. वर्तमान में देश में मुद्रा कलेक्शन करने वाले जो लोग चांदी के सिक्के का कलेक्शन करते हैं, उनमें से अधिकांश ने चांदी की कीमत बढ़ते ही उसकी मेटल वैल्यू से ज्यादा कमाई के लालच में सराफा बाजार में बेशकीमती सिक्के बेचना शुरू कर दिए. सुनार पुरातन काल के सिक्के गला रहे हैं.

बढ़ता-घटता रेट बना परेशानी का सबब

चांदी के दाम बढ़ाने के बाद से न तो मुद्रा बाजार में पहले की तुलना में सिक्के बिकने के लिए आ रहे हैं न ही सिक्के खरीदने वाले खरीदार बचे हैं. इंदौर में चल रहे मुद्रा मेले में भी यही हाल है. मुद्रा विक्रेता आशीष सोनी का कहना है, “चांदी का दुर्लभ सिक्का जो पहले 1200 से 1500 रुपए में मिलता था, अब उसकी कीमत 1800 से 3000 रुपए तक हो चुकी है. इसके अलावा सामान्य सिक्का जो सबके पास मौजूद होता था. उसकी कीमत भी 850 रुपए से बढ़कर 2000 रुपए तक हो चुकी है.”

लालच में लोग गवां रहे बेशकीमती सिक्के

मुद्रा विशेषज्ञ ऋषि राज उपाध्याय ने बताया, “वर्तमान में जिन सामान्य लोगों के पास चांदी के पुराने और दुर्लभ सिक्के हैं. वे लोग भी इस मौके पर उन सिक्कों को इसलिए बेच रहे हैं, क्योंकि उन्हें इतने ज्यादा दाम फिर नहीं मिलेंगे. यही वजह है कि बड़ी मात्रा में पुराने चांदी के सिक्कों को टकसाल में गलाया जा रहा है. इनमें ऐसे भी दुर्लभ सिक्के हैं, जिनके बारे में लोगों को जानकारी नहीं होने के कारण उन्हें भी सामान्य पुरानी चांदी के साथ बेच दे रहे हैं. ऐसी स्थिति में दुर्लभ मुद्रा भी खत्म हो रही है.

उन्होंने कहा, “जिन लोगों के पास पुराने सिक्के हैं, उन्हें सिक्कों की मेटल वैल्यू के लालच में पड़ने के बजाय उनकी एंटीक वैल्यू पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि चांदी के रेट के अलावा दुर्लभ सिक्कों के रेट भी तुलनात्मक रूप से ज्यादा होते जाएंगे.”

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