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Sovereign AI और चिप डिजाइन से सोशल मीडिया की ‘लक्ष्मण रेखा’ तक, टेक दिग्गजों को भारत सरकार का कड़ा संदेश

भारत उम्र के आधार पर सोशल मीडिया पर लिमिट लगाने को लेकर टेक कंपनियों से बात कर रहा है. सरकार अलग-अलग उम्र के लोगों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस पर संभावित लिमिट पर चर्चा कर रही है. इसका फोकस कम उम्र के यूजर्स को बचाने पर है. अभी तक कोई फाइनल नियम या उम्र की लिमिट तय नहीं की गई है. ये बातें केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत मंडपम में #IndiaAIImpactSummit में कहीं.

केंद्रीय मंत्री ने कहा, आईटी इंडस्ट्री इंडिया की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है. जब भी कोई टेक्नोलॉजी ट्रांजिशन होता है तो इसको इंडस्ट्री, एकेडेमिया और सरकार को मिलकर मैनेज करना होता है. इसलिए अभी हम इंडस्ट्री और एकेडेमिया के साथ 3 मोर्चों पर काम कर रहे हैं. इसमें एक- मौजूदा टैलेंट को रीस्किलिंग और अपस्किलिंग करना जो वर्कफोर्स में काम कर रहा है. दूसरा- एक नई टैलेंट पाइपलाइन बनाना. तीसरा- यह पक्का करना कि आने वाली जेनरेशन इस नई टेक्नोलॉजी के लिए तैयार हों. अब तक, 100 से ज़्यादा कॉलेज ऐसे हैं जहां IT इंडस्ट्री अपने टैलेंट को रीस्किल कर रही है.

इंफ्रा लेयर और एनर्जी लेयर में भारी इन्वेस्टमेंट इंटरेस्ट

अश्विनी वैष्णव ने कहा, AI स्टैक की सभी पांच लेयर में इन्वेस्टमेंट आ रहा है. हमने VCs को डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए फंड देते हुए देखा है. हमने VCs और दूसरे प्लेयर्स को बड़े सॉल्यूशंस, बड़े एप्लिकेशन्स के लिए फंड देते हुए देखा है. VCs को कटिंग-एज मॉडल्स में आगे की रिसर्च के लिए फंड देते हुए देखा है क्योंकि मॉडल्स का अगला लेवल इनोवेशन, इंजीनियरिंग इनोवेशन के साथ-साथ मैथमेटिकल इनोवेशन से आएगा. तो इन दोनों चीजों में फंडिंग अट्रैक्ट हो रही है.

केंद्रीय मंत्री ने कहा, हम इंफ्रा लेयर और एनर्जी लेयर में भी भारी इन्वेस्टमेंट इंटरेस्ट देख रहे हैं. हम उन बहुत कम देशों में से एक हैं जहां 50% से ज़्यादा पावर जेनरेशन कैपेसिटी क्लीन सोर्स से आती है. यह बहुत बड़ी बात है. हमारी 51% पावर जेनरेशन कैपेसिटी क्लीन सोर्स से आती है और यह भारत का एक बड़ा फ़ायदा है और यह इसलिए मुमकिन हुआ क्योंकि हमारे प्रधानमंत्री ने क्लीन एनर्जी की इस बड़ी ज़रूरत को पहले ही भांप लिया था और क्लीन एनर्जी के लिए उनके कमिटमेंट और उनके पक्के इरादे की वजह से एनर्जी में इतना बड़ा इन्वेस्टमेंट हुआ.

AI स्टैक की पांच लेयर में $200 बिलियन से ज़्यादा का इन्वेस्टमेंट

वैष्णव ने कहा, हमने जो भी इन्वेस्टमेंट कमिटमेंट देखे हैं, आने वाले दो सालों में हमें AI स्टैक की पांच लेयर में $200 बिलियन से ज़्यादा का इन्वेस्टमेंट देखने को मिलेगा. ग्लोबल लीडर्स के बीच एक अच्छी आम सहमति बन रही है. अब तक कई दूसरे देशों के साथ हमारी बातचीत में, हर कोई मानता है कि AI का इस्तेमाल अच्छे कामों के लिए किया जाना चाहिए और सभी नुकसानदायक असर को रोका जाना चाहिए, यह एक टेक्निकल तरीके से किया जाना चाहिए जो सिर्फ़ रेगुलेट करने या सिर्फ़ कानून पास करने से नहीं किया जा सकता. यह एक टेक्नोलीगल तरीके से किया जाना चाहिए.

केंद्रीय मंत्री ने कहा, टॉप ग्लोबल AI लीडर मौजूद हैं, लगभग 20 सेशन चल रहे हैं, जो मज़बूत इंटरनेशनल कमिटमेंट को दिखाता है. AI को पांचवीं इंडस्ट्रियल क्रांति बताया जा रहा है, जो इकॉनमी और समाज के हर सेक्टर पर असर डालेगी. एक्सपो में हेल्थकेयर में इनोवेशन ज़्यादा सस्ती सर्विस का वादा करते हैं, जबकि AI-ड्रिवन एजुकेशन सॉल्यूशन हर स्टूडेंट के लिए पर्सनलाइज़्ड लर्निंग देते हैं, जो सभी सेक्टर में AI की बदलाव लाने की क्षमता को दिखाता है.

अगले फेज में चिप डिज़ाइन पर मुख्य फोकस

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर मिशन AI-ड्रिवन एडवांसमेंट के साथ जुड़ा हुआ है, जिसमें अगले फेज में चिप डिज़ाइन पर मुख्य फोकस होगा. उन्होंने भरोसा जताया कि क्रिएट इन इंडिया पुश के तहत आने वाले सालों में कम से कम 50 डीप-टेक कंपनियां उभरेंगी. कई डेवलप्ड देश भारत के पेमेंट सिस्टम की तारीफ़ करते हैं, जापान जैसे देश तो पेटेंट के ज़रिए भी इसे पहचान देते हैं.

उन्होंने सॉवरेन AI पर बात की और कहा कि इसका मतलब है भारत के अपने AI मॉडल बनाना. ताकि स्ट्रेटेजिक ज़रूरतों के लिए दूसरों पर निर्भरता से बचा जा सके. इसमें चिप्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, कंट्रोल सिस्टम और डिप्लॉयमेंट में क्षमताएं शामिल हैं, जिससे यह पक्का होता है कि भारत बाहरी मंज़ूरी के बिना स्वतंत्र रूप से सॉल्यूशन डेवलप और स्केल कर सकता है.

इन कंपनियों को कानूनी दायरे में काम करना चाहिए

केंद्रीय मंत्री ने कहा, नेटफ्लिक्स, यूट्यूब, मेटा और X जैसी कंपनियों को भारत के संवैधानिक और कानूनी दायरे में काम करना चाहिए. उन्होंने देश के कल्चरल कॉन्टेक्स्ट का सम्मान करने के महत्व पर जोर दिया, यह देखते हुए कि जो एक देश में स्वीकार्य है वह दूसरे में बैन हो सकता है. ज़्यादातर मल्टीनेशनल कंपनियां यह समझती हैं और लगातार लोकल नियमों के साथ तालमेल बिठाना सीखती हैं.

उन्होंने कहा कि डीपफेक के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए मजबूत रेगुलेशन की जरूरत है. केंद्रीय मंत्री ने बच्चों और समाज की सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया और बताया कि इंडस्ट्री और पार्लियामेंट्री कमेटियों के साथ बातचीत चल रही है. ताकि कड़े कानूनी उपाय किए जा सकें और उन्हें लागू करने के लिए आम सहमति बनाई जा सके.

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