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क्या अल-अक्सा मस्जिद पर हमला करने वाला है इजराइल? महायुद्ध के बीच इस दावे से मची सनसनी

ईरान के इंटेलिजेंस मंत्रालय के एक अधिकारी ने चेतावनी दी है कि इजराइल जेरुसलेम (अल-कुद्स) में अल-अक्सा मस्जिद को निशाना बनाकर हमला कर सकता है और इसका इल्जाम ईरान और रेजिस्टेंस मूवमेंट पर लगाया जाएगा. ईरानी न्यूज एजेंसी तस्नीम के मुताबिक अधिकारी ने कहा कि इस कथित प्लान में मस्जिद कंपाउंड को निशाना बनाकर ड्रोन या मिसाइलों का इस्तेमाल करके झूठा फ्लैग ऑपरेशन शामिल हो सकता है.

अधिकारी ने दावा किया कि ऐसा हमला अल-कुद्स डे से पहले किया जा सकता है, जो हर साल रमजान के आखिरी शुक्रवार को मनाया जाता है. ताकि अरब और मुस्लिम दुनिया को ईरान और रेजिस्टेंस एक्सिस के खिलाफ भड़काया जा सके. अल-मायदीन ने ईरानी सोर्स के हवाला से कहा कि यह ईरान के अमेरिका-इजराइली के साथ टकराव के बाद, इस्लामिक दुनिया में बढ़ते असर को कमजोर करने की कोशिश है.

अधिकारी ने यह भी बताया कि अल-अक्सा मस्जिद के आस-पास के इलाकों से धीरे-धीरे लोगों को निकाला जा रहा है, जो कथित तौर पर गुरुवार से शुरू हो रहा है और यह इशारा किया कि यह कदम ऐसे किसी प्लान की तैयारी से जुड़ा हो सकता है.

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील

ईरानी अधिकारी ने मुसलमानों और इंटरनेशनल कम्यूनिटी से कहा कि वे इज़राइल और उसके पश्चिमी साथियों को पवित्र जगह को निशाना बनाकर कोई भी ऑपरेशन करने से रोकें. उन्होंने जोर देकर कहा कि अल-अक्सा मस्जिद पर हमला एक गंभीर जुर्म होगा जिसके दूरगामी नतीजे होंगे.

इस बीच अल-कुद्स गवर्नरेट ने बताया कि इजराइली पुलिस ने शुक्रवार को नमाज के लिए अल-अक्सा मस्जिद को बंद कर दिया, जिससे जुमे की नमाज नहीं हो पाई. बता दें, ईरान के खिलाफ हमले की शुरुआत से ही इजराइली सेना ने मस्जिद में जाने पर रोक लगा दी है, साथ ही रमजान के महीने में तरावीह की नमाज पढ़ने पर रोक लगी हुई है.

 

अल-अक्सा मस्जिद की अहमियत

अल-अक्सा मस्जिद सिर्फ एक इमारत नहीं है, बल्कि यह मुसलमानों की आस्था, पहचान और इतिहास का हिस्सा है. यह मस्जिद इस्लाम के तीन सबसे पवित्र स्थलों में से एक है और इसका दिल से जुड़ाव हर मुसलमान के लिए बेहद खास है. इस मस्जिद का जिक्र पवित्र किताब कुरान की सूरा अल-इसरा में मिलता है.

इसको पहला किबला भी कहा जाता है. इस्लाम के शुरुआती दौर में करीब 16-17 महीनों तक मुसलमानों के लिए यही पहली क़िबला (वह दिशा जिसकी तरफ मुंह करके नमाज पढ़ी जाती थी) थी. अब यह किबला मक्का का कांबा है.

अल कुद्स डे

अल कुद्स डे, जिसे इंटरनेशनल कुद्स डे भी कहा जाता है. हर साल रमजान महीने के आखिरी शुक्रवार को मनाया जाता है. यह दिन फिलिस्तीन के लोगों के साथ एकजुटता दिखाने और इजराइल के कब्जे का विरोध करने के लिए मनाया जाता है. ‘अल कुद्स’ अरबी भाषा में यरुशलम शहर का नाम है, इसलिए इसे यरुशलम दिवस भी कहा जाता है. इसे फिलिस्तीनियों के समर्थन में एकजुटता दिखाने के दिन के रूप में देखा जाता है.

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