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जेल या फाइव स्टार होटल? 2 साल की सजा काट रहे दोषी को मेडिकल कॉलेज में मिला ‘वीआईपी ट्रीटमेंट’; वार्ड के बाहर नहीं, अंदर तैनात रहती है खाकी!

कोरबा: जिले के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और रसूखदार दोषियों को सजा मिलने के बाद भी नियमों को ताक पर रखने की चर्चा है. मामले के सामने आने के बाद अब लीपापोती का प्रयास शुरू हो गया है जिले का पुलिस महकमा और मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन एक दूसरे पर जिम्मेदारी थोप रहे हैं.

इस प्रकरण में हुई आरोपी को सजा

मिली जानकारी के अनुसार परिवादी संस्था सत्या ट्रकिंग, भारत बेंज कंपनी के भारी वाहनों का अधिकृत विक्रेता और वाहनों की सर्विस देने का व्यवसाय करते हैं. अभियुक्त वासन(32 वर्ष) ट्रांसपोर्टिंग का व्यवसाय करता है. समय-समय पर अपने वाहनों को मरम्मत के लिए परिवादी संस्था में लाता रहा है. जिसका हिसाब लंबे समय से नहीं किया गया. वाहनों की मरम्मत के आंशिक भुगतान के लिए अभियुक्त ने परिवादी को 9 लाख 83 हजार 166 रूपये का चेक दिया था. 20 सितंबर 2026 को भुगतान चेक बाउंस हो गया, तभी से यह प्रकरण कोरबा कोर्ट में चल रहा था.

कोरबा कोर्ट ने सुनाई 2 साल जेल और 16 लाख का जुर्माना

परिवादी द्वारा अधिनियम की धारा 138 के तहत परिवाद विशेष न्यायाधीश (एससी -एसटी एक्ट) जयदीप गर्ग के समक्ष प्रस्तुत किया गया था. मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने आरोपी अपूर्व को 2 वर्ष के कारावास सहित 16 लाख रुपया अर्थदंड भुगतान की सजा बीते 6 मार्च को सुनाई थी.

जेल के बजाय पहुंचे अस्पताल और फरमाया आराम

अब तक की जानकारी के अनुसार आरोपी को सजा वाले दिन, 6 मार्च को ही मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जबकि न्यायालय के निर्देश के मुताबिक उसे सीधे जेल में दाखिल कराया जाना था. इसके बावजूद अस्पताल में उसे वीआईपी सुविधाएं दी गईं, जबकि नियमों के अनुसार सामान्य बीमारी की स्थिति में बंदियों को अस्पताल के जनरल वार्ड में भर्ती किया जाता है. गंभीर स्थिति होने पर ही आईसीयू में रखा जाता है. लेकिन इस मामले में आरोपी को न तो आईसीयू में भर्ती किया गया और न ही जनरल वार्ड में, बल्कि उसके लिए अलग कमरे की व्यवस्था कर दी गई

एक दूसरे पर थोप रहे हैं जिम्मेदारी

अपने रसूख के दम पर दोषी अस्पताल परिसर में घूमता-फिरता भी रहा और पुलिसकर्मी के सामने मोबाइल चलाता हुआ नजर आया. जिसका वीडियो मीडिया के कैमरे में कैद हो गया. पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में आरोपी को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया. अस्पताल प्रबंधन ने किस डॉक्टर के सलाह पर न्यायालय से दोषी ठहराए गए व्यक्ति को भर्ती किया गया, इस बिंदु पर जांच की बात कही है. यह भी कहा है की सजा मिलने के बाद दोषी को जेल दाखिल कराना पुलिस की जिम्मेदारी होती है. जबकि पुलिस का कहना है कि न्यायालय से पेशी के दौरान आरोपी को सजा दी गई है. इसलिए प्रक्रिया के तहत जेल दाखिल करने के पहले उसका मेडिकल कराया जाना जरूरी होता है. डॉक्टर के सलाह पर उसे अस्पताल में भर्ती किया गया था. हैरान करने वाली बात यह भी है कि जिला जेल प्रबंधन को ऐसे किसी बंदी के अस्पताल में भर्ती होने या जेल भेजे जाने की सूचना तक नहीं दी गई थी.

हालांकि पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद अंतिम सूचना यह मिल रही है कि चेक बाउंस के मामले में दोषी ठहराए गए अपूर्व को उच्च न्यायालय से बेल मिल गई है. जिसके बाद उसे बेल पर रिहा किया गया है. बेल वाले दिन ही दोषी को अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया और जेल ले जाकर औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बेल दिया गया.

जांच करेंगे ऐसा क्यों हुआ, किस चिकित्सक ने दी सलाह

इस संबंध में मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. गोपाल कंवर ने कहा कि कस्टिडियल के बाद मेडिकल जांच के लिए लाया गया था. बीपी और डायटिबीज बढ़ा हुआ था इसलिए अस्पताल लाया गया था. 6 मार्च को लाया गया था आज डिस्टार्ज कर दिया गया.

कंवर ने कहा कि न्यायालय से किसी आरोपी को दोषी ठहराए जाने के बाद उसे जेल में दाखिल कराना पुलिस की जिम्मेदारी होती है, यदि वह गंभीर होता है तभी भर्ती किया जाता है. इस मामले में जेल प्रबंधन को सूचना दिए बिना कैसे भर्ती कराया गया इसकी जांच की जाएगी.

जेल दाखिल करने के पहले किया जाता है मेडिकल

वहीं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले ने बताया कि कोर्ट से सजा मिलने के बाद अपूर्व वासन नाम के व्यक्ति को कोर्ट से सजा मिलने के बाद पुलिस की टीम ने अस्पताल लेकर गई. उसे जेल भेजा गया और वैधानिक कार्रवाई की गई. एक पेशी के रूप में आरोपी उपस्थित था जहां उसे सजा हुई. कोर्ट के माध्यम से पुलिस को सूचना मिली, सूचना के आधार पर पुलिस कोर्ट पहुंची और जेल दाखिल करने से पहले मेडिकल के लिए अस्पताल ले जाया गया जहां उसे एडमिट कराया गया. फोन के माध्यम से जेल में सूचना दी गई थी, आरोपी को जेल भेजकर विधिवत कार्रवाई की गई है.

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