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झारखण्ड

झारखंड में 80 साल पुराना ‘टाइम बम’! 9 दिन बाद भी सेना नहीं कर पाई डिफ्यूज; अब बंकर बनाकर होगा धमाका, दहशत में आधा शहर

​झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में 9 दिन पहले मिले जिंदा बम को अभी तक डिफ्यूज नहीं किया जा सका है. सेना अभी इसे डिफ्यूज करने की कोशिश में है. पूर्वी सिंहभूम में बहरागोड़ा थाना क्षेत्र के पानीपड़ा-नागुड़साई में सुवर्णरेखा नदी के तट पर मिले इस बम का वजन 227 किलो है. अब सेना की टीम ‘बंकर तकनीक’ का उपयोग कर इसे डिफ्यूज करेगी. भारतीय सेना की एक विशेष टीम द्वारा बम की वैज्ञानिक जांच की गई है. इसके साथ ही सुरक्षा के दृष्टिकोण से ड्रोन कैमरे के माध्यम से आसपास के रिहायशी इलाकों की भी जानकारी इकट्ठा की गई है.

प्रारंभिक जांच में 227 किलो का यह विशाल बम जिंदा अवस्था में पाया गया है. ऐसे में सेना की टीम अब बंकर तकनीक का उपयोग कर इसे डिफ्यूज करेगी. 227 किलो के इस शक्तिशाली बम को निष्क्रिय करने के दौरान होने वाले कंपन और मलबे को रोकने के लिए सेना द्वारा बंकर तकनीक का उपयोग किया जाएगा.

क्या होता है बंकर तकनीक? 

दरअसल, ‘बंकर तकनीक’ के तहत बम के चारों ओर बालू से भरी बोरियों की ऊंची दीवार खड़ी की जाती है और जमीन के अंदर एक विशेष गड्ढा तैयार किया जाता है, ताकि विस्फोट का दबाव जमीन के भीतर ही अवशोषित हो सके. बम को डिफ्यूज करने के दौरान अभियान की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन द्वारा कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं.

सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए सेना द्वारा पूरे क्षेत्र की घेराबंदी की गई है. उस क्षेत्र में सेना की टीम के अधिकृत लोगों के अलावा किसी भी व्यक्ति के प्रवेश पर पाबंदी है.

खाली करवाया एक किलोमीटर का इलाका

इसके साथ ही विस्फोटक स्थल से लगभग 1 किलोमीटर के दायरे में आने वाले रिहायशी क्षेत्र, खासकर पानीपड़ा गांव के लोगों को बम निष्क्रिय करने के दौरान सुरक्षा के दृष्टिकोण से क्षेत्र खाली करने के निर्देश दिए गए हैं और कई हिदायतें भी दी गई हैं. साथ ही बम निष्क्रिय करने के दौरान उस क्षेत्र से किसी भी हेलीकॉप्टर या विमान का परिचालन नहीं होगा.

कैसे यहां पहुंचा बम?

वहीं, 227 किलो के इस विशाल बम को लेकर चर्चा है कि यह अमेरिकी मॉडल का बम है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के समय का बताया जा रहा है. माना जा रहा है कि इसे उस समय विमान से गिराया गया था, लेकिन यह बालू या मिट्टी के नीचे दब गया होगा. बाद में बालू की खुदाई के कारण यह बाहर आ गया. हैरानी की बात यह है कि बम अब भी पूरी तरह जिंदा अवस्था में है.

17 मार्च को पूर्वी सिंहभूम के बहरागोड़ा में सुवर्णरेखा नदी के तट पर 500 पाउंड (227 किलो) का अमेरिकी बम मिला था. तभी से भारतीय सेना की बम निरोधक दस्ता टीम द्वारा सोमवार को पानीपड़ा-नागुड़साई मार्ग स्थित घटनास्थल पर ड्रोन सर्वे के जरिए पूरे इलाके की जांच की जा रही थी. उसी दौरान टीम को एक और बम होने का संकेत मिला. फिलहाल सेना ने पूरे इलाके को अपने नियंत्रण में ले लिया है.

दूसरी ओर स्थानीय लोगों का दावा है कि उस क्षेत्र में कई और बम जमीन के नीचे दबे हो सकते हैं. ड्रोन सर्वे और मेटल डिटेक्टर की मदद से सेना द्वारा पूरे इलाके में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है.

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