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झारखण्ड

Adityapur UPHC Crisis: सरायकेला के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र आदित्यपुर का सरकारी अस्पताल खुद ‘बीमार’; 3.5 लाख आबादी बेहाल

सरायकेला: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण औद्योगिक हब आदित्यपुर का शहरी उप-प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (UPHC) इन दिनों खुद प्रशासनिक उपेक्षा के कारण ‘बीमार’ चल रहा है। लगभग 3.5 लाख की एक विशाल कामकाजी आबादी को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं देने की जिम्मेदारी संभालने वाला यह केंद्र वर्तमान में आधुनिक संसाधनों, पैरामेडिकल स्टाफ और चिकित्सकों की घोर कमी से जूझ रहा है। अव्यवस्था और सरकारी उदासीनता का आलम यह है कि अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की संख्या दिन-ब-दिन लगातार घट रही है। यह बड़ा स्वास्थ्य केंद्र अब केवल सर्दी-खांसी, जुकाम और सामान्य बुखार की दवाइयां बांटने वाले केंद्र तक सिमट कर रह गया है।

💉 सिजेरियन के लिए निजी अस्पताल का सहारा, सांप-कुत्ते के काटने का इंजेक्शन भी नदारद: 8 किमी दूर गम्हरिया हो रहे मरीज रेफर

राज्य स्वास्थ्य विभाग के ऊंचे दावों के बिल्कुल विपरीत, इस केंद्र पर गर्भवती महिलाओं के लिए केवल नॉर्मल डिलीवरी (सामान्य प्रसव) की ही अत्यंत सीमित सुविधा उपलब्ध है। सिजेरियन (ऑपरेशन के जरिए प्रसव) के गंभीर मामलों के लिए विभाग ने जमशेदपुर स्थित एक निजी संस्थान ‘सत्य साईं अस्पताल’ से टाइअप किया है, जहां लाचार मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। सबसे ज्यादा हैरानी और चिंता की बात यह है कि लाखों की घनी आबादी वाले इस औद्योगिक क्षेत्र के इकलौते सरकारी अस्पताल में सांप काटने की जीवनरक्षक दवा (एंटी-वेनम) और पागल कुत्ते के काटने पर लगने वाला (एंटी-रेबीज) इंजेक्शन तक उपलब्ध नहीं है। अस्पताल की मेडिकल ऑफिसर डॉ. लक्ष्मी ने अपनी मजबूरी बताते हुए कहा, “गम्हरिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सभी प्रकार के जरूरी टीके और एंटी-वेनम स्टॉक में उपलब्ध हैं, इसलिए हम गंभीर मरीजों को वहां रेफर कर देते हैं।” गौरतलब है कि आदित्यपुर से गम्हरिया की दूरी लगभग 8 किलोमीटर है। आपातकालीन स्थिति (Medical Emergency) में तड़पते मरीजों को इतनी दूर ले जाने से उन पर न सिर्फ अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है, बल्कि कई बार रास्ते में ही मरीजों की जान पर बन आती है।

🔥 अस्पताल की बदहाली पर छिड़ा सियासी घमासान: मेयर संजय सरदार के औचक निरीक्षण के बाद विपक्ष ने स्वास्थ्य मंत्री को घेरा

आदित्यपुर UPHC की इस दयनीय स्थिति और बदहाली को लेकर हाल ही में आदित्यपुर नगर निगम के मेयर संजय सरदार ने अपनी टीम के साथ अस्पताल का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) किया। अस्पताल परिसर में बुनियादी सुविधाओं और दवाओं की भारी किल्लत देखकर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई और इस दुर्दशा के लिए सीधे तौर पर झारखंड सरकार और सूबे के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी को आड़े हाथों लिया। विपक्ष और स्थानीय सामाजिक संगठनों ने इस पूरी स्थिति को वर्तमान सरकार की ‘घोर प्रशासनिक विफलता’ और ‘चिकित्सकीय लापरवाही’ का जीता-जागता नतीजा करार दिया है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि जब औद्योगिक क्षेत्र से सरकार को इतना भारी टैक्स मिलता है, तो यहाँ के मजदूरों और आम जनता को मुफ्त इलाज क्यों नहीं मिल पा रहा है।

🏥 रीजनल डिप्टी डायरेक्टर डॉ. विष्णु प्रसाद साह का दावा: पूरे कोल्हान प्रमंडल की स्वास्थ्य सेवाओं की हो रही समीक्षा, जल्द सुधरेंगे हालात

दूसरी ओर, स्वास्थ्य विभाग का आला महकमा अपनी कमियों और कमियों को ढकने के साथ-साथ जल्द ही जमीनी स्तर पर बड़े सुधार की बात कह रहा है। कोल्हान प्रमंडल के रीजनल डिप्टी डायरेक्टर (RDD) डॉ. विष्णु प्रसाद साह ने सरायकेला सदर अस्पताल के वार्षिक निरीक्षण के दौरान मीडिया से बात करते हुए कहा कि वर्तमान में पूरे कोल्हान प्रमंडल के भीतर स्वास्थ्य सेवाओं और ढांचागत व्यवस्था की गहन समीक्षा की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि बजट और संसाधनों का आवंटन कर जल्द ही आदित्यपुर समेत प्रमंडल के सभी उप-प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और पर्याप्त डॉक्टरों से लैस कर दिया जाएगा। बहरहाल, प्रशासनिक दावों, वादों और फाइलों के बीच आदित्यपुर की आम जनता आज भी अपनी न्यूनतम बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के अधिकार के लिए तरस रही है।

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