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गुजरात

India Maritime Security: समुद्री सुरक्षा होगी और अभेद्य; अहमदाबाद में 138वीं OSCC बैठक में बना भारत का नया सुरक्षा रोडमैप

अहमदाबाद: भारत की समुद्री सीमाओं को पूरी तरह से सुरक्षित और अभेद्य बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए गुजरात के अहमदाबाद में 138वीं ऑफशोर सिक्योरिटी कोऑर्डिनेशन कमेटी (OSCC) की हाई-लेवल बैठक सफलतापूर्वक आयोजित की गई। इस अति-महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक की अध्यक्षता भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने की। इस उच्च स्तरीय बैठक में भारतीय कोस्ट गार्ड, नौसेना (Indian Navy), वायुसेना (Indian Air Force), केंद्रीय गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ओएनजीसी (ONGC) और देश की कई शीर्ष खुफिया व सुरक्षा एजेंसियों के आला अधिकारी एक मंच पर शामिल हुए। बैठक के दौरान विशेष रूप से समुद्र के भीतर और तटीय इलाकों में बने भारत के अरबों डॉलर मूल्य के तेल और प्राकृतिक गैस प्लेटफॉर्मों (Offshore Oil & Gas Platforms) की सुरक्षा की गहन समीक्षा की गई। इसके साथ ही वर्तमान भू-राजनीतिक हालातों में ड्रोन और अन्य नई तकनीकों से बढ़ते आधुनिक खतरों पर भी गंभीर चर्चा हुई।

🌊 अंडमान-निकोबार क्षेत्र की सामरिक निगरानी पर दिया गया विशेष जोर: मल्टी-एजेंसी कोऑर्डिनेशन के जरिए खतरों से तुरंत निपटेगा भारत

बैठक के दौरान रक्षा और सुरक्षा मामलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील अंडमान-निकोबार द्वीप समूह क्षेत्र में लगातार बढ़ रही अंतरराष्ट्रीय समुद्री गतिविधियों और तेजी से बदलते सुरक्षा माहौल को रेखांकित किया। वर्तमान सामरिक चुनौतियों को देखते हुए इस पूरे क्षेत्र में भारत की चौबीसों घंटे निगरानी व्यवस्था (Surveillance System) को और अधिक आधुनिक व मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में सर्वसम्मति से यह भी तय किया गया कि समुद्र में किसी भी प्रकार के बाहरी या आंतरिक खतरे से तुरंत और प्रभावी ढंग से निपटने के लिए देश की अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल (Coordination), रियल-टाइम समुद्री टोही निगरानी और संयुक्त सैन्य कार्रवाई (Joint Operations) की कुल क्षमता को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया जाएगा।

🛸 ड्रोन हमले, समुद्री आतंकवाद और अंडरवॉटर सबोटाज से निपटने का बना रोडमैप: AI आधारित तकनीकों से सजेगा सुरक्षा ढांचा

अहमदाबाद में संपन्न हुई इस महत्वपूर्ण बैठक के केंद्र बिंदु में मुख्य रूप से आधुनिक युद्ध स्वरूप (Modern Warfare) से उपजे खतरे रहे। बैठक में ड्रोन आधारित हवाई हमले, समुद्री आतंकवाद (Maritime Terrorism), सोफिस्टिकेटेड साइबर खतरे, अंडरवॉटर सबोटाज (समुद्र के भीतर तोड़फोड़) और हिंद महासागर (Indian Ocean) में तेजी से पैर पसार रही विदेशी सामरिक चुनौतियों पर विशेष फोकस रखा गया। बदलते दौर और आधुनिक समुद्री खतरों के बीच भारत अब अपने संपूर्ण ऑफशोर सुरक्षा ढांचे को हाई-टेक राडार निगरानी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ‘मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस’, संयुक्त ऑपरेशन क्षमता और मल्टी agency मैकेनिज्म के जरिए अपग्रेड करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

यह उच्च स्तरीय रक्षा बैठक साफ तौर पर संकेत देती है कि आने वाले समय में समुद्री सुरक्षा भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति (National Security Strategy) का सबसे मजबूत और महत्वपूर्ण स्तंभ बनने जा रही है, ताकि देश की आर्थिक और भौगोलिक संप्रभुता पर कोई आंच न आए।

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