Bakrid 2026 Patna: पटना की बकरा मंडियों में ‘धुरंधर’ और ‘सोनू-मोनू’ का जलवा; जानें इस बार क्या है कीमतों का हाल

पटना: ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का मुकद्दस त्योहार इस बार 28 मई 2026 को पूरे अकीदत के साथ मनाया जाएगा। राजधानी पटना के विभिन्न बकरा बाजारों में त्योहार को लेकर जबरदस्त रौनक देखी जा रही है। इस बार का बाजार समीकरण पिछले सालों से काफी हटके है। अमूमन मंडियों में ‘सलमान’ और ‘शाहरुख’ जैसे नामों के बकरों का जलवा रहता था, लेकिन इस बार ‘सोनू-मोनू’ की जोड़ी और ‘धुरंधर’ नाम के बकरों ने सबका दिल जीत लिया है। पटना के राजाबाजार बकरा मंडी में ‘धुरंधर’ अपनी कीमत और कद-काठी के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जिसकी कीमत एक लाख रुपये से ऊपर है। वहीं, बाजार समिति स्थित हाट में ‘सोनू-मोनू’ बकरों की जोड़ी पर खरीदार अपना दिल हार रहे हैं।
💰 कीमतों में 3 गुना तक का उछाल: खरीदार हुए हैरान-परेशान, पिछले साल के मुकाबले दाम आसमान पर
इस बार बकरों के दामों ने आम खरीदारों के पसीने छुड़ा दिए हैं। पिछले एक साल के भीतर कीमतों में ढाई सौ से तीन सौ प्रतिशत (250%-300%) तक का भारी इजाफा देखने को मिला है। स्थानीय खरीदार नूरुद्दीन अंसारी के अनुसार, जो बकरा पिछले साल तक 10 हजार रुपये में मिल जाता था, उसकी कीमत इस बार 30 हजार रुपये तक पहुंच गई है। हर साल कीमतों में 15 से 20 फीसदी की सामान्य बढ़ोतरी होती थी, लेकिन इस बार का यह बेतहाशा उछाल खरीदारों की समझ से बाहर है।
👑 बलिया से आया ‘सुल्तान’: 100 किलो वजन और पौने दो लाख रुपये है कीमत, नस्लों की हो रही भारी डिमांड
पटना की नेहरू पथ और बाजार समिति मंडियों में बकरों की शुरुआती रेंज ही 15 से 20 हजार रुपये से शुरू हो रही है, जबकि अधिकतम कीमत पौने दो से दो लाख रुपये तक पहुंच गई है। इस बार सबसे महंगा बकरा उत्तर प्रदेश के बलिया से आया है— ‘सुल्तान’। इसका वजन 100 किलोग्राम है और इसकी कीमत 1.75 लाख रुपये तय की गई है। इसके अलावा गोपालगंज से आए 90 किलो के बकरे की कीमत डेढ़ लाख रुपये है। मंडी में राजस्थान की मशहूर ‘तोतापरी’ नस्ल और उत्तर प्रदेश की ‘देशीला’ नस्ल के बकरों की भारी डिमांड देखी जा रही है।
☀️ तपती गर्मी का असर: शाम को सज रही महफिल, गलियों में घूम-घूमकर हो रही बिक्री
भीषण गर्मी और तेज धूप के कारण दिन के समय मंडियां थोड़ी सुस्त रह रही हैं, लेकिन शाम 6 बजे के बाद बाजारों में पैर रखने की जगह नहीं मिल रही है। व्यापारियों ने अब बिक्री का नया तरीका अपनाया है; वे सिर्फ मंडियों के भरोसे नहीं हैं। बेगूसराय, मुजफ्फरपुर, जमुई और छपरा जैसे इलाकों से लाए गए बकरों को लेकर व्यापारी अब पटना के आलमगंज, सुल्तानगंज और सब्जीबाग जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों की गलियों में भी घूम-घूमकर बिक्री कर रहे हैं, जिससे खरीदारों को बकरे घर के पास ही मिल रहे हैं।






