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राजस्थान

Asaram Bapu Case: राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला; आसाराम की उम्रकैद की सजा बरकरार, सरेंडर के आदेश

जोधपुर: नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे डेरा प्रमुख आसाराम बापू को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत नहीं मिली है। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने बुधवार (27 मई) को अपना फैसला सुनाते हुए निचली अदालत द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि फिलहाल अंतरिम जमानत पर बाहर चल रहे आसाराम को अब तुरंत सरेंडर करना होगा।

⚖️ सह-आरोपियों को मिली बड़ी राहत

जहाँ एक ओर कोर्ट ने आसाराम की सजा को कायम रखा है, वहीं इस मामले में सह-आरोपी रही शिल्पी और शरतचंद को बड़ी राहत देते हुए कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है। 2018 में जोधपुर की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने आसाराम को आजीवन कारावास और इन दोनों को 20-20 साल की सजा सुनाई थी, जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। लंबी चली डे-टू-डे सुनवाई के बाद आज कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है।

📜 केस का बैकग्राउंड: धार्मिक उपचार के नाम पर दरिंदगी

यह मामला 2013 में तब सुर्खियों में आया था जब एक नाबालिग छात्रा ने आरोप लगाया था कि आध्यात्मिक मार्गदर्शन और धार्मिक उपचार के बहाने उसे जोधपुर स्थित आश्रम बुलाया गया, जहाँ उसके साथ यौन शोषण और दुष्कर्म किया गया। मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर ट्रायल कोर्ट ने 25 अप्रैल 2018 को आसाराम को दोषी पाया था।

📅 कानूनी प्रक्रिया और भविष्य

इस मामले में हाईकोर्ट की बेंच ने 16 फरवरी से 20 अप्रैल 2026 तक निरंतर सुनवाई की थी। तमाम दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने 20 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिस पर आज अंतिम निर्णय आया है। आसाराम, जो कि वर्तमान में जमानत अवधि का लाभ ले रहे थे, अब कानूनी रूप से उन्हें वापस जेल जाना होगा। यह फैसला पीड़ित पक्ष और कानूनी जानकारों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

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